दृश्य सामग्री - visual material
दृश्य सामग्री - visual material
दृश्य सामग्री वह सामग्री है, जिसमें आँखों का उपयोग होता है। प्रमुख दृश्य साधन /सामग्री नीचे दी जा है रही है
चार्ट - जब किसी वस्तु के प्रतिमान उपलब्ध नहीं होते अथवा वास्तविक सामग्री का कक्षा में प्रयोग सम्भव नहीं होता तब चार्ट का प्रयोग किया जा सकता है। नक्शे- नक्शों का प्रयोग ऐतिहासिक तथा भौगोलिक तथ्यों तथा स्थानों का ज्ञान प्रदान करने के लिये कक्षा में किया जाता है।
मॉडल- मॉडल किसी वास्तविक वस्तु, क्रिया अथवा प्रक्रिया की समस्त विशेषताओं का दिग्दर्शन कराता है, ताकि छात्रों को उस अभीष्ट वस्तु के विषय में सही जानकारी प्राप्त हो सके । सामान्यतः मॉडल दो प्रकार के होते हैं:- स्थिर मॉडल एवं गत्यात्मक मॉडल
स्लाइड- स्लाइड एक छोटा किन्तु पारदर्शक दृश्य साधन है। स्लाइड तैयार करने के लिए अधिकतर कैमरे से एक पारदर्शक फोटो खींचा जाता है। स्लाइड प्रोजेक्टर के माध्यम से परदे पर प्रक्षेपित कर देखा जाता है। स्लाइडों के प्रदर्शन के समय विषय को स्पष्ट करने के लिए शिक्षक अपनी कमेन्टरी (टिप्पणी) भी प्रस्तुत करता जाता है, जिससे पाठ में सरसता एवं रोचकता बढ़ जाती है।
स्लाइड प्रोजेक्टर- स्लाइड प्रोजेक्टर, फिल्म स्ट्रिप प्राजेक्टर का एक उन्नत रूप है । फिल्म स्ट्रिप प्रोजेक्टर में एक फिल्म होती है, जिसमें एक ही स्ट्रिप में बहुत से फोटोग्राफ होते हैं, जबकि स्लाइड प्राजेक्टर में संबंधित प्रकरणों पर अलग-अलग आंकड़े डायग्राम, स्कैच, फोटोग्राफ तथा संदेश आदि अलग-अलग स्लाइडों पर अंकित किए जाते हैं। आवश्यकतानुसार इन स्लाइडों को एक-एक करके पर्दे पर प्रक्षेपित किया जाता है तथा संबंधित विषयवस्तु की व्याख्या की जाती है।
फिल्मस्ट्रिप प्रोजेक्टर- फिल्म स्ट्रिप एक विषय विशेष से संबंधित एक प्रकार की 15-20 स्लाइडों को मिलाकर 35 मिमी. की फिल्म होती है। यह रील का एक अंश होता है, जिसमें वांछित विषय-वस्तु प्रकरण के विषय में क्रमवार अनेक चित्र, संदेश प्रदर्शित किए जाते हैं। इसे फिल्म स्ट्रिप प्रोजेक्टर के माध्यम से पर्दे पर छात्रों को बड़ा करके दिखाया जाता है।
ओवर हैड प्रोजेक्टर - इसमें विषय से संबंधित विषय-वस्तु पर विभिन्न ट्रांसपेरेन्सी तैयार की जाती है और इन्हें पर्दे पर या दीवार पर प्रक्षेपित किया जाता है।
एपीडायस्कोप - एपीडायस्कोप के माध्यम से पारदर्शक तथा अपारदर्शक दोनों तरह की वस्तुओं की छवि पर्दे पर प्रक्षेपित की जाती है, इसके द्वारा जो भी चित्र दिखाया जाता है, वह जिस प्रकार का होगा, जिस रंग का होगा वह बिल्कुल वैसा ही दिखायी देता है।
श्रृव्य-दृश्य सामग्री
श्रव्य दृश्य सामग्री का तात्पर्य उस सामग्री से है, जिसमें सुनने और देखने, दोनों तरह की इन्द्रियों का प्रयोग किया जाता है।
संप्रेषण के निम्नांकित महत्वपूर्ण श्रव्यदृश्य साधन हैं-
टेलीविजन या दूरदर्शन दूरदर्शन के द्वारा प्रत्येक घटना देखी जा सकती है तथा हर घटना का विवरण सुना जा सकता है। इसमें प्रत्येक घटना को रिकार्ड करके उसके प्रसारण की व्यवस्था होती है।
कम्प्यूटर- कम्प्यूटर शैक्षिक तकनीकी प्रथम के अंतर्गत आता हे जिसका उपयोग व्यक्तिगत अनुदेशन हेतु किया जाता है। इसका उपयोग शिक्षा में अनुदेशन आँकड़ों के विश्लेषण, नवीनतम सूचनाओं की प्राप्ति, शोध कार्यों एवं परीक्षा प्रणाली में अधिक किया जाने लगा है।
वीडियो टैक्स - वीडियो टैक्स में घरेलू टेलीविजन एक कम्प्यूटर की तरह कार्य करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा आँकड़ों पर आधारित सूचनाएं एकत्र की जा सकती है। इसके लिये वीडियो टैक्स में एक रिकार्डर, टेलीफोन, टेलीविजन तथा की-बोर्ड का प्रयोग किया जाता है।
वीडियो डिस्क- वीडियो डिस्क भी संप्रेषण के क्षेत्र में एक नवीन खोज है। वीडियो डिस्क प्रणाली में वीडियो-डिस्क, वीडियो डिस्क प्लेयर और एक टेलीविजन सेट की जरुरत होती है। वीडियो डिस्क पर आवाज सहित अथवा बिना आवाज के दृश्य या छवियाँ इलेक्ट्रानिक अथवा आप्टीकल ढंग से रिकार्ड की जाती है।
टेलीकॉन्फ्रेंसिंग- टेलीकॉन्फ्रेंसिंग एक ऐसी इलेक्ट्रानिक प्रणाली है, जिसमें दो या दो से अधिक दूर बैठे व्यक्ति इच्छित विषय-वस्तु से संबंधित चर्चा, परिचर्चा में भाग ले सकते हैं, अपनी बात कह सकते हैं, दूसरों की बात सुन सकते हैं और उन पर तुरन्त प्रतिक्रियाएँ / सुझाव या अभिमत प्राप्त कर सकते हैं एवं आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
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