व्यावसायिक चयन एवं कर्मचारी चयन - Vocational Selection & Staff Selection

व्यावसायिक चयन एवं कर्मचारी चयन - Vocational Selection & Staff Selection


व्यावसायिक निर्देशन के क्षेत्र में आधुनिक उपागम जिस प्रकार व्यावसायिक विकास, व्यावसायिक संतुष्टि और व्यावसायिक प्रगति पर बल देता है उसे देखते हुए सेवायोजक के पक्ष पर विचार किये बिना नहीं रहा जा सकता है। जैसा कि सुपर द्वारा दी गई परिभाषा में सामाजिक हित पर बल दिया गया है, व्यावसायिक निर्देशन और व्यावसायिक विकास के उद्देश्यों की पूर्ति भी व्यावसायिक चयन की प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना संभव नहीं है। यदि एक व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व, व्यावसायिक आत्म संप्रत्यय एवं व्यावसायिक समायोजन व व्यावसायिक प्रगति के लिए सहयोग प्रदान करना है तो कर्मचारी चयन / व्यावसायिक चयन की प्रक्रिया के बनाने के लिए सेवायोजकों द्वारा अपनाए जाने वाली नीति को, उनकी समझ को तथा कर्मचारी चयन की पद्धति को मनोवैज्ञानिक आधारों से प्रभावित करना होगा।


व्यावसायिक चयन का उद्देश्य क्या है इसे दो प्रकार से रखा जा सकता है, प्रथम, व्यावसायिक चयन का उद्देश्य एक कर्मचारी को उसकी क्षमताओं और विशेषताओं के अनुरूप उपयुक्त कार्यो में लगाना है द्वितीय व्यावसायिक चयन का उद्देश्य एक कार्य को संपन्न करने के लिए कार्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उस कार्य पर एक ऐसे कर्मचारी को लगाना जिसमें वांछित क्षमताएं और विशेषताएं हो दोनों लक्ष्यों का सम्मिलित निहितार्थ यही है कि कार्य की मांग और व्यक्ति की क्षमताओं और विशेषताओं के मध्य मेल स्थापित हो जैसा कि एक ही जैसी बात का दो पृथक रूपों में रखा गया है । दोनो लक्ष्यों के अभीष्ट उद्देश्य पृथक हैं एक में कार्य के तथा सेवायोजक के हित में यह है कि कार्य पर उपयुक्त व्यक्ति को लगाया जाय जिससे की कार्य भली प्रकार संपादित हो सके जबकि दूसरे लक्ष्य में व्यक्ति का हित महत्वपूर्ण है। दोनों ही बातें एक सिक्के के दो पहलु की भांति है । यदि कार्य की मांगों जरूरतों और व्यक्ति की क्षमताओं एवं विशेषताओं के बीच उचित मेल की स्थापना, कार्य एवं व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक अध्ययन एवं विश्लेषण के आधार पर की जाए तो व्यक्ति को कार्य तुष्टि की प्राप्ति होगी,

तथा कार्य क्षेत्र में अच्छे निष्पादन के आधार पर उसकी व्यावसायिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ-साथ सेवायोजक को अच्छे लाभ की प्राप्ति होगी और समाज लाभान्वित होगा। अतः आधुनिक परिप्रेक्ष्य में व्यावसायिक निर्देशन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि व्यावसायिक चयन / कर्मचारी विश्लेषण के आधार पर किया जाए।


उद्योगों, संगठनों एवं कार्यालयों में कर्मचारियों को विविध परिस्थितियों में विविध प्रकार के कार्य करने होते हैं। संपन्न किए जाने वाले कार्यों की संरचना में अंतर होता है। अलग अलग प्रकार के कार्यों को संपन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार की योग्यताओं क्षमताओं और विशेषताओं की आवश्यकता होती है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि विविध प्रकार के कार्यों या व्यावसायों की मांगे भिन्न भिन्न प्रकार की होती हैं। यदि कर्मचारी में सौपें गए कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक क्षमताएं या विशेषताएं नही है तो कर्मचारी उस कार्य को कुशलता और सफलतापूर्वक संपादित नहीं कर सकेगा ।

ऐसी दशा में उद्योग, संगठन या कार्यालय को क्षति होगी। अतः यह आवश्यक है कि कोई उद्योग या संगठन अथवा कार्यालय किसी कार्य को संपन्न कराने के लिए ऐसे कर्मचारी का चयन करें जो उस कार्य को भली प्रकार पूरा करने के लिए सक्षम एवं योग्य हो।


आधुनिक विश्व में उद्योग एवं संगठन का हित ही सर्वोपरी नहीं होता, कर्मचारी का हित भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। कर्मचारी जिस कार्य को कर रहा होता है उस कार्य से कर्मचारी को प्राप्त होने वाली कार्य संतुष्टि तथा वहां पर कर्मचारी के व्यावसायिक समायोजन का कर्मचारी के निष्पादन स्तर और उत्पादकता पर एवं इस प्रकार पूरे संगठन की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है।

मानवीय मूल्यों, कर्मचारी हितों एवं औद्योगिक हितो को पूर्णतः एक दूसरे से स्वतंत्र नहीं किया जा सकता है। व्यक्तियों के मध्य मनोवैज्ञानिक दृष्टियों से व्यापक स्तर पर वैयक्तिक भिन्नताएं पायी जाती हैं। व्यक्तियों की योग्यताओं, क्षमताओं,रूचियां, अभिक्षमताओं, विशेषताओं, प्रशिक्षण, कार्यकुशलता एंव अनुभव आदि में अंतर पाया जाता है। कर्मचारियों की वैयक्तिक विशेषताओं का उनकी कार्य संतुष्टि, व्यावसायिक समायोजन तथा निष्पादन स्तर पर अपने कार्य क्षेत्र में प्रगति करने की संभावना पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार कर्मचारी के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि वह ऐसे कार्य ' नौकरी का चयन करे, जो उसके लिए उपयुक्त हो।


कर्मचारी के लिए उपयुक्त कार्य का चयन तथा सेवायोजकों के लिए उपयुक्त कर्मचारी का चयन महत्वपूर्ण है ।

कर्मचारी, उद्योग या व्यवसाय एवं समाज के हित में यह महत्वपूर्ण है कि कर्मचारी और कार्य एक दूसरे के प्रति अनुरूपता का किसी भी पक्ष के हित में नहीं होता है। उपयुक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर व्यावसायिक चयन एवं कर्मचारी चयन की प्रक्रिया वैज्ञानिक आधार पर संपन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों पक्षों पर ध्यान रखकर कार्य की आवश्यकताओं तथा इच्छुक अभ्यर्थियों की विशेषताओं के मध्य समेलन स्थापित किया जाता है। इस प्रकार पूरी प्रक्रिया उपयुक्त कर्मचारियों का चयन कर लेने या अनुपयुक्त कर्मचारियों की छंटनी कर देने के कार्य रूप में देखने की अपेक्षा यह और भी अधिक औचित्यपूर्ण एवं सार्थक होगा कि आधुनिक चयन प्रक्रिया में कार्य और कर्मचारी के मध्य उचित मेल स्थापित करने का कार्य किया जाता है।


अनेक अध्ययनों द्वारा यह ज्ञात हुआ है कि जिन उद्योगों में कर्मचारी चयन के लिए वैधानिक आधार नहीं अपनाया जाता है वहां औद्योगिक संगठन और कर्मचारी दोनों को क्षति पहुंचती है तथा अंततः राष्ट्र एवं समाज को मानवीय तथा आर्थिक संसाधन के क्षेत्र में घाटा उठाना पड़ता है। अनुपयुक्त चयन के कारण अनुपस्थिति में वृद्धि हो जाती है, कार्यकुशलता और उत्पादन में कमी आती है, व्यक्ति के व्यक्तिगत समायोजन में कमी आती है तथा दुर्घटनाओं में वृद्धि हो जाती है।


वस्तुनिष्ठ एवं वैज्ञानिक आधार पर चयन प्रक्रिया पूरा करने के दो आधार होते है।


1. कार्य विश्लेषण


2. कर्मचारी विश्लेषण