वाल्टर, गॉर्डन तथा मोदीगिल्यानी एवं मिलर के लाभांश मॉडल - Walter, Gordon and ModiGiliani and Miller's Dividend Model
वाल्टर, गॉर्डन तथा मोदीगिल्यानी एवं मिलर के लाभांश मॉडल - Walter, Gordon and ModiGiliani and Miller's Dividend Model
लाभांश नीति तथा फर्म के मूल्य के संबंध में निम्नलिखित दो प्रकार की विचारधारायें प्रकट की गयी-
1. लाभांश की प्रासंगिक विचारधारा
2. लाभांश की अप्रासंगिक विचारधारा
लाभांश की प्रासंगिक विचारधारा मानने वालों में वाल्टर तथा गोर्डन हैं जो यह मानते हैं कि फर्म के मूल्य को लाभांश प्रभावित करती है। फर्म के मूल्य में वृद्धि करने में लाभांश अपनी महत्वपूर्ण तथा प्रासंगिक भूमिका निभाती है। दूसरी ओर फर्म के मूल्यांकन में लाभांश की कोई भूमिका नहीं होती है
या लाभांश इस संदर्भ में अप्रासंगिक होता है, इस विचारधारा के समर्थक मोदीगिल्यानी तथा मिलर रहे हैं। इनका विचार है कि लाभांश संबंधी निर्णय फर्म के मूल्य के लिए अप्रासंगिक होता है। इस विचारधारा को एम. एम. उपागम के नाम से भी जाना जाता है । इस प्रकार से लाभांश के तीन प्रमुख मॉडल हैं जो निम्नलिखित हैं:
1. वाल्टर का लाभांश मॉडल
2. गोर्डन का लाभांश मॉडल
3. मोदीगिल्यानी एवं मिलर मॉडल
इन तीनों मॉडल का विस्तृत वर्णन अग्रलिखित है:
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