ब्रिटिश काल में महिला शिक्षा - Women's Education in British Era
ब्रिटिश काल में महिला शिक्षा - Women's Education in British Era
ब्रिटिश शासन के प्रथम चरण में महिला शिक्षा को अनावश्यक समझ कर उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया । ऐसा प्रतीत होता है कि ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में अपना प्रशासन चलाने के लिए महिला लिपिकों अथवा प्रशासकों की आवश्यकता नहीं थी। स्त्रियों के अनेक अंधविश्वासों से घिरे रहने तथा भारतीयों का दृष्टिकोण अत्यंत रूढ़िवादी होने के कारण भी संभवतः ईस्ट इंडिया कंपनी ने महिला शिक्षा में कोई रूचि नहीं ली। कंपनी शासन के दौरान महिला शिक्षा का प्रसार मिशनरियों तथा अन्य सामाजिक संस्थानों के द्वारा किए गए इसाई व्यक्तिगत प्रयासों से प्रारंभ हुआ। भारत पर अंग्रेजी शासन के दौरान कस्तूरबा गाँधी, मीरा बहन, भीखाजी कामा जैसे अनेकानेक विदुषियों ने अपने देशप्रेम, त्याग व योग्यताओं से महिलाओं की उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया। मिशनरियों ने भारत में अनेक बालिका विद्यालयों की स्थापना की, जिनमें सहस्त्रों लड़कियाँ शिक्षा ग्रहण करती थीं।
1854 में वुड के आदेश पत्र में अधिकारिक तौर पर सबसे पहले स्त्री शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया गया तथा स्त्रियों की शिक्षा के प्रसार के सभी संभव प्रयास किए जाने की सिफारिश की गई जिसके परिणामस्वरूप लड़कियों के लिए अनेक स्थानों पर प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की गई। 1902 तक स्त्री शिक्षा ने एक आंदोलन का रूप ग्रहण कर लिया था। परिणामतः माता-पिता अपनी लड़कियों को शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता महसूस करने लगे थे तथा शिक्षा विभाग ने लड़कियों के लिए अलग बालिका विद्यालय खोलने प्रारंभ कर दिए थे। आर्य समाज, ब्रह्म समाज जैसी समाज सुधारक संस्थाओं ने महिला शिक्षा पर विशेष बल दिया था जिसके फलस्वरूप महिला शिक्षा का तीव्र गति से विकास हुआ था। 1917 से 1947 तक स्त्री शिक्षा का विकास अत्यंत तीव्र गति से हुआ इस काल में महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया था। इस समय भारतीय नारी संगठन तथा राष्ट्रीय महिला परिषद की स्थापना हुई। 1927 में प्रथम अखिल भारतीय नारी सम्मलेन हुआ। इसी दौरान बाल-विवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए शारदा एक्ट पारित हुआ। इन सभी समाज सुधारक कार्यों में स्त्री शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला । स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में लगभग तीस हज़ार महिला शिक्षण संस्थाएँ थीं जिनमें लगभग पचास •लाख महिलाएँ शिक्षा ग्रहण कर रहीं थीं।
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