स्त्री आरक्षण विधेयक और कुछ - Women's Reservation Bill and some

 स्त्री आरक्षण विधेयक और कुछ - Women's Reservation Bill and some


पंचायत चुनावों में मिली सफलता के अनुभव के आधार पर 73वें संविधान संशोधन अधिनियम की तरह ही एक-तिहाई आरक्षण स्त्रीयों के लिए संसद और विधान सभाओं में लागू करने की बात आई तो इसे लेकर काफ़ी विवाद उत्पन्न हो गया। संसद और विधानसभाओं में स्त्रीयों का कम प्रतिनिधित्व संख्या देखकर आरक्षण की तरह ही संसद और विधान सभाओं में स्त्रीयों के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षित कर दी जाए। इसके लिए सितंबर, 1996 में संसद के समक्ष 81वाँ संविधान संशोधन विधेयक लाया गया, जिसे स्त्री आरक्षण विधेयक (डब्ल्यूआरबी) या स्त्री विधेयक के नाम से जाना जाता है। इस विधेयक में संसद और राज्य विधान मंडलों में एक-तिहाई सीटे स्त्रीयों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था, जिसकी वजह से संसद में स्त्री सांसदों की संख्या 181 हो जाती । प्रत्येक चुनाव से पूर्व आरक्षित की जाने वाली सीटों का चयन लाटरी से करने की व्यवस्था दी गई थी। सीटों के आरक्षण के चयन करने की प्रणाली प्रत्येक चुनाव में प्रयोग में लाई जानी थी। किंतु 73वें संविधान संशोधन अधिनियम की तरह संसद में पारित नहीं हो पाया और संयुक्त चयन समिति को भेज दिया गया। यह विधेयक 1998 में फिर एक बार संसद में प्रस्तुत हुआ किंतु भारी विरोध के चलते पारित न हो सका। सन 1999 में स्त्री आरक्षण विधेयक एक बार फिर 85वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में प्रस्तुत किया गया किंतु कोई सहमति न बन पाई। इस विधेयक ने विधेयक के पक्ष-विपक्ष में कई वाद-विवादों को जन्म दिया।