औद्योगिक लाइसेंस नीतियां(2) - Industrial License Policie
औद्योगिक लाइसेंस नीतियां(2) - Industrial License Policies
लाइसेंस से छूट - औद्योगिक लाइसेंस लेने की छूट की सीमा एक करोड़ रु से बढ़ाकर तीन करोड़ रू. कर दी गई, लेकिन यह छूट उन कंपनियों पर लागू नहीं होगी जो एकाधिकारी एवं प्रतिबंधात्मक व्यापारिक पद्धतियां अधिनियम में अंतर्गत आती है। साथ ही यह छूट उन विदेशी कंपनियों को नहीं मिलेगी, जिनमें 40 प्रतिशत से अधिक पूंजी लगी है। आयात में छूट उन वस्तुओं में आयात मे छूट दी जाएगी, जिनका उत्पादन लघु उद्योगों के लिए सुरक्षित है। इसके साथ ही पूजीगत वस्तुओं के आयात के लाइसेंस के लिए अब तक 12 मध्यस्थों की कड़ी से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब तीन मध्यस्थों की कड़ी से गुजरना होगा।
(ङ) औद्योगिक लाइसेंस नीति, 1980
1980 में भी औद्योगिक लाइसेंस नीति में कुछ संशोधन किए गए। सुरक्षित वस्तुओं की संख्या 807 से 834 की गई जो लघु उद्योगों के लिए सुरक्षित थी। 30 टन आटा पीसने वाले कारखाने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया तथा लाइसेंस प्रणाली सरल कर लाइसेंस देने का समय 90 दिन से कम करके 60 दिन कर दिया गया।
(च) औद्योगिक लाइसेंस नीति, 1982
1982 उत्पादक वर्ष घोषित किया गया, अतः उद्योगों को अपनी क्षमता बढ़ाने की अनुमति दी गई। बड़े व्यावसायिक घरानों व विदेशी कंपनियों को भी 5 और क्षेत्रों में कुछ रियायतें दी गई।
(छ) औद्योगिक लाइसेंस नीति, 1983
1 अप्रैल 1983 से औद्योगिक लाइसेंस से छूट की सीमा 3 करोड़ रु. से बढ़ाकर 5 करोड़ रू कर दी गई तथा बिना उद्योग वाले जिलों में उद्योगों की स्थापना हेतु आर्थिक सहायता की दर भी बढ़ाकर विनियोग के 25 प्रतिशत तक कर दी गई।
(ज) औद्योगिक लाइसेंस नीति, 1985
16 मार्च, 1985 को बजट भाषण में वित्त मंत्री ने घोषणा की कि जिन क्षेत्रों में विस्तार की अपेक्षा है, वहा ऐसे उद्योगों की सूची बनाई जाएगी जिनके लिए लाइसेंस लेना आवश्यक नहीं होगा।
उन्होंने 25 उद्योगों को कतिपय निर्दिष्ट शर्तें पूरी करने पर लाइसेंस से मुक्त करने की घोषणा की। इस प्रकार लाइसेंस से मुक्त उद्योगों की संख्या 49 हो गई है। इससे पूर्व 1985 में 24 उद्योगों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया था। एकाधिकार वाली कंपनियों की परिभाषा में आने वाली कम्पनियों के लिए सीमा बढ़ाकर 100 करोड़ रु. कर दी गई।
(झ) औद्योगिक लाइसेंस नीति, 1991-
जुलाई 1991 में नई औद्योगिक नीति की घोषणा की गई। इसमें औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली में अनेक सुधारों की भी घोषणा की गई। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है:
(i) लाइसेंस में कमी- 1991 की नई नीति के अनुसार लाइसेंस में कमी की गई। इसमें केवल 14 उद्योगों के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया गया। 1999 में अनिवार्य लाइसेंस केवल 6 उद्योगों के लिए कर दिया गया। अब यह केवल 5 उद्योगों के लिए रह गया है। शेष सभी उद्योगो को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया।
(ii) सुरक्षित उद्योगों की संख्या में कमी- 1956 की औद्योगिक नीति से 1991 तक की नीति घोषित बोर्ड से पहले सार्वजनिक क्षेत्र के लिए 17 उद्योग सुरक्षित थे। इन उद्योगों के लिए निजी क्षेत्र को लाइसेंस नहीं जारी होता था। 1991 में नई औद्योगिक नीति घोषणा में इनकी संख्या घटाकर 8 कर दी गई। 1999 में केवल 6 कर दी गई परन्तु अब इनकी संख्या केवल 3 रह गई है
(iii) एकाधिकारी कानून में संशोधन 1970 की लाइसेंसिंग नीति में एकाधिकारी कानून लागू था। इसमें यदि उद्योग 25 प्रतिशत से अधिक उत्पादन क्षमता का विस्तार करना चाहते थे तो उन्हें लाइसेंस लेना पड़ता था। 1991 की लाइसेंसिंग नीति में इस सीमा को समाप्त कर दिया गया।
एकाधिकारी कानून में संशोधन कर दिया गया तथा निर्धारित पूंजी निवेश सीमा को समाप्त कर दिया गया।
(iv) लघु उद्योगों को संरक्षण- लघु उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने के लिए कुछ वस्तुओं के उत्पादन को इनके लिए सुरक्षित रखा गया।
वार्तालाप में शामिल हों