2002-2007 की नई आयात-निर्यात नीति की विशेषताएं - Features of the New Import-Export Policy of 2002-2007
2002-2007 की नई आयात-निर्यात नीति की विशेषताएं - Features of the New Import-Export Policy of 2002-2007
आयात-निर्यात के क्षेत्र में विभिन्न उद्योगों को अनेक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयत्न किया है इसलिए नई नीति में कुछ विशेष रियायत दी गई है।
(i) प्रतिबंधों की समाप्ति नई नीति में निर्यात पर विशेष जोर दिया गया है। निर्यात पर मात्रात्मक प्रतिबन्धा समाप्त कर दिए गए है। इसके साथ ही दो दर्जन से अधिक प्रतिबंधित सूची की वस्तुओं पर से आयात प्रतिबंध समाप्त किए गए हैं। निर्यात से होने वाली आय को शत-प्रतिशत विदेशी मुद्रा में रखने की छूट भी दी गई है।
(ii) विशेष आर्थिक क्षेत्र के उद्योगों को ऋण सुविधा: विशेष निर्यात क्षेत्र में स्थापित उद्योगों को तीन वर्ष की अवधि के लिए बाहर से ऋण लेने की सुविधा प्राप्त होगी रिजर्व बैंक द्वारा इस सम्बन्ध में नियम व प्रक्रिया बनाई जाएगी।
इससे इन उद्योगों को आर्थिक संसाधनों का लाभ मिल जाएगा। इस क्षेत्र के उद्योगों व इकाइयों को आयकर में कुछ रियायतें भी शीघ्र देने का आश्वासन दिया गया।
(iii) बैंको को विशेष शाखाएं खोलने की अनुमति विशेष आर्थिक क्षेत्रों में बैंको को अपनी विशेष शाखाएं खोलने की अनुमति दी गई है जिन्हें ओवरसीज शाखाओं के समान सुविधाएं प्राप्त होगी। इकाइयों के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधारी पर सभी प्रकार के प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। उन्हें विदेशों में भी पूरी छूट होगी।
(iv) विदेशों में व्यावसायिक केन्द्रों की स्थापना- विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों में व्यावसायिक केन्द्रों की स्थापना की जाएगी।
यह सम्बन्धित देशों में हमारे निर्यात व्यापार के लिए सूचना व सहायता केन्दों के रूप में कार्य करेंगे उन सम्भावनाओं का पता लगाएंगे कि उन देशों का हमारे देश से क्या-क्या निर्यात हो सकता है।
(v) कम्प्यूटर हार्डवेयर को बढ़ावा कम्प्यूटर हार्डवेयर क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा। यह सम्बन्धित देशों में हमारे निर्यात व्यापार के लिए सूचना व सहायता केन्द्रों के रूप में कार्य करेंगे। उन सम्भावनाओं का पता लगाएगे कि उन देशों में हमारे देश से क्या क्या निर्यात हो सकता है?
(vi) सीमा शुल्क की छूट-रूस, अफ्रीका तथा अन्य देशों से आने वाले गैर तराशे हुए हीरों पर से भी सीमा शुल्क हटा दिया गया है।
(vii) कुटीर उद्योगों तथा हस्तशिल्प को प्रोत्साहन - कुटीर उद्योग तथा हस्तशिल्प व खादी के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की गई।
कुटीर व हस्तशिल्प निर्यात इकाइयों को पांच करोड़ रूपए का निर्यात कारोबार करने पर निर्यातक घरानों की सुविधाएं प्रदान करने का फैसला किया गया है। जबकि अन्य इकाइयों को यह सुविधाएं 15 करोड़ का निर्यात करने पर मिलती है। हस्तशिल्प क्षेत्र को निर्यात शुल्क से भी छूट दी गई है।
(viii) कुछ खास शहरों के निर्यातकों को अनेक लाभ-नई नीति में निर्यात में कुछ खास शहरों की विशेष भूमिका देखते हुए वहां के निर्यातकों के लिए
कई लाना की घोषणा की गई है, जैसे- होजरी के लिए तिरुपुर, ऊनी कपड़ों के लिए लुधियाना तथा पानीपत को उत्कृष्ट निर्यात वाला शहर घोषित किया गया है। इन्हें निर्यातों के लिए विशेष सुविधाएं दी जाएगी।
(ix) कृषि निर्यात को प्रोत्साहन कृषि उत्पादनों के निर्यात को बढ़ा देने के लिए देश में 20 कृषि निर्यात क्षेत्र स्थापित किए जाएंगे। केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को इनकी स्थापना के लिए सहायता उपलब्ध कराएगी। खाद्यान्न में आत्म निर्भरता व अधिकता से निर्यात के क्षेत्र में भारत अब सातवें स्थान पर आ गया है। जूट और प्याज को छोड़कर सभी कृषि योग्य बीजा के निर्यात पर लगी रोक समाप्त कर दी गई है।
(x) कृषि नियत को परिवहन सहायता: कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए ताजे तथा प्रोसेस्ड फलों, सब्जियों, फूलों पोल्ट्री डेयरी उत्पादनों गेहूं व चावल तथा इनसे बनी वस्तुओं पर परिवहन सहायता प्रदान की जाएगी।
(xi) अन्य देशों के साथ अच्छे सम्बन्ध:- 1- दूसरे देशों के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न किया जाएगा। इसके लिए अफ्रीका और राष्ट्रकुल देशों में भारतीय उत्पादों का बाजार बढ़ती के लिए नए कार्यक्रम बनाए जाएंगे।
रूस के साथ रूपया ऋण भुगतान के अन्तर्गत निर्यातकों के लिए रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता न्यूनतम निर्यात मूल्य व कई वस्तुओं के केवल राज्य व्यापार निगम के माध्यम से किए जाने वाले निर्यात प्रतिबंधों को भी समाप्त कर दिया गया है।
(xii) तकनीकी प्रेरक नई नीति में निर्यात प्रेरक उद्योगों के तकनीकी विकास के लिए कई प्रावधान किए गए हैं जैसे
(क) रसायन तथा दवा उद्योगों के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए दवाइयों के पंजीकरण के लिए दी जाने वाली फीस जाएगी तथा ये उद्योग किसी भी मात्रा में सैम्पलों का निर्यात कर सकेंगे।
(ख) इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर उद्योगों पर सीमा शुल्क नही लगाया जाएगा।
(xiii) विश्वास आधारित नीति- नई नीति में निर्यातकताओं को प्रोत्साहित करने तथा उनके विश्वास को जीतने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि इन्हें -
(क) सैम्पलों के आयात और निर्यात अधिक मात्रा में करने दिया जाएगा।
(ख) चूककर्ता के खिलाफ दण्डनीय ब्याज की दर 24 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत की जाएगी। (ग) निर्यात नीति का परिवर्तन करने के लिए इनका स्टॉक जब्त नहीं किया जाएगा।
(घ) निर्यात आय प्राप्त न होने की दशा में कोई जुर्माना नही लगाया जाएगा।
(xiv) आसान लाइसेंसिंग निर्यात क्षेत्र में नए कारोबारियों को बिना किसी जांच के बैंक गारंटी के आधार पर लाइसेंस मिलेंगे।
(xv) आसान प्रक्रिया- कारोबार लागत को कम करने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया गया तथा कम्प्यूटरीकरण किया गया।
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