भारत की सम्मिलित विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति, 2012 - Combined Foreign Direct Investment Policy of India, 2012

भारत की सम्मिलित विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति, 2012 - Combined Foreign Direct Investment Policy of India, 2012


औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग ने सम्मिलित विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति जारी की है। यह नीति 10 अप्रैल 2012 को लागू की गई है। सम्मिलित नीति में सरकार द्वारा पहले से जारी की गई सभी नीतियों / प्रेस नोटो / नियमों / पत्रों को शामिल किया गया है। इस नीति में सरकार द्वारा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित अप्रैल 9, 2012 तक जारी की गई सभी विज्ञप्तियों को शामिल किया गया है। नई विदेशी प्रत्यक्ष नीति का मुख्य उद्देश्य सरल, स्पष्ट, पारदर्शी संयुक्त नीति द्वारा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देना है तथा प्रावधानों व औपचारिकताओं को कम करना है। वर्तमान नीति विदेशी निवेशकों के लिए हितकारी है, क्योंकि अब निवेशकों को केवल एक ही नीति को समझना होगा। इस नीति के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित है:


(क) भारत में निवेश का मूल


(i) पाकिस्तान के नागरिकों को छोड़कर व पाकिस्तान में समामेलित इकाइयों को छोड़कर अन्य किसी भी देश के नागरिक / समामेलित इकाइया भारत की विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति के प्रावधानों के अनुसार निवेश कर सकती है।


(ii) प्रवासी निगमित इकाइया यदि भारत में सरकारी रूट से निवेश करती है, तब इन्हें अपने निवेश से पहले भारतीय सरकार से पूर्वानुमति लेनी होगी। यदि ये इकाइयां स्वचालित रूट से निवेश करती है तो इन्हें रिजर्व बैंक से पूर्व अनुमति लेनी होगी।


(iii) विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय कंपनियों की पूजी में निवेश कर सकते हैं। लेकिन एक


व्यक्तिगत विदेशी संस्थागत निवेशक की अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत तथा सभी विदेशी निवेशकों की संयुक्त अधिकतम सीमा 24 प्रतिशत होगी।


(iv) एक योग्य विदेशी निवेशक को छोड़कर किसी भारतीय कंपनी के समता अंशों में अधिकतम 5 प्रतिशत निवेश कर सकता है।


(v) विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक के प्रावधानों के अनुसार भारतीय जोखिम पूंजी इकाइयों में निवेश कर सकते हैं।


(ख) निवेश संयंत्रों के प्रकार


(i) भारतीय कंपनिया विदेशी निवेशकों को समता अंश पूर्ण परिवर्तनशील ऋणपत्र,

पूर्ण परिवर्तनशील अधिमान अश जारी कर सकती है। विदेशी निवेशकों से निवेश राशि प्राप्त करने के 180 दिनों के अंतर्गत पूंजी संयत्र जारी करने होंगे।


(ii) भारतीय कंपनियां विदेशी पूंजी बाजारों में विदेशी मुद्रा परिवर्तनशील बॉण्ड, अमेरिकन जमा प्राप्तियां, विश्व जमा प्राप्तियां जारी कर सकती है।


(ग) निवासी इकाइयों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की पात्रता 


(i) भारतीय कंपनियों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश


(ii) साझेदार फर्मों की पूजी में व एकल स्वामित्व इकाइयों की पूजी में निवेश। लेकिन यह निवेश


कृषि बागानों, भूमि सम्पदा या प्रिंट मीडिया में नहीं होना चाहिए।


(iii) जोखिम पूजी कोष में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 


(iv) ट्रस्टों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश


(घ) भारतीय कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की गणना


प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का तात्पर्य अप्रवासी व्यक्तियों द्वारा भारतीय कंपनियों में निवेश से है। दूसरी तरफ यदि एक ऐसी भारतीय कंपनी जिसकी पूजी में विदेशी निवेश है,

किसी अन्य भरतीय कंपनी में निवेश करती है तो इसे अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहते हैं।


12 फरवरी, 2009 को सरकार ने भारतीय कंपनियों में विदेशी पूंजी समता निवेश की गणना से संबंधित दिशा निर्देश जारी किए है। इन नए दिशा-निर्देशों से भारतीय कंपनियों में विदेशी पूंजी के अंतरप्रवाह का क्षेत्र बढ़ा है। इससे उन सभी कंपनियों को लाभ होगा, जिनमें विदेशी निवेश निर्धारित सीमा तक पहुंच चुके हैं। नए नियमों के आधार पर, यदि निवेश करने वाली कंपनी में अधिकतर अंश भारतीयों के पास हो या कंपनी का नियंत्रण भारतीयों के पास हो व यदि यह कंपनी किसी अन्य कंपनी में निवेश करती है तो इस नए निवेश को पूर्णतया भारतीय माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कंपनी के जिसमें विदेशी निवेश 50 प्रतिशत से कम है वह कंपनी ख कंपनी में मान लो 26 प्रतिशत निवेश करती है तो यह सारा 26 प्रतिशत अप्रत्यक्ष विदेशी प्रत्यक्ष निवेश माना जाएगा। इन नए नियमों से पहले आनुपातिक निवेश को अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश माना जाता था।


यदि ऐसा निवेश उन क्षेत्रों में किया जा रहा हो, जिनमें विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई हो, तब इस निवेश की स्वीकृति सरकार तथा विदेशी संवर्धन बोर्ड से भी लेनी होगी विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा किए गए निवेश तथा विदेशी मुद्रा परिवर्तनशील बॉण्डों में किए गए निवेश को विदेशी निवेश की गणना में शामिल किया जाएगा। 


(ङ) विदेशी निवेश का प्रवेश स्त्रोत - भारत में विदेशी निवेश के दो रास्ते हैं (i) प्रत्यक्ष रूट (ii) सरकारी रूट प्रत्यक्ष रूट में विदेशी निवेशकों को निवेश के लिए सरकार या रिजर्व बैंक से किसी प्रकार की कोई अनुमति लेनी पड़ती।

सरकारी रूट में विदेशी निवेशको को सरकार के विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ती है। सरकार से अनुमति लेने के लिए, अब विदेशी निवेशक आनलाइन भी आवेदन दे सकते हैं।


(च) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवेश पर शर्तों व अधिकतम सीमा संबंधी नीति भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर प्रतिबंध


निम्न क्षेत्रों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रतिबंधित है-


(i) फुटकर व्यापार


(ii) परमाणु ऊर्जा


(iii) लॉटरी व्यवसाय


(iv) जुआ, शर्तें कसीनों


(v) चिट फंड व निधि कंपनिया ।


(vi) भूमि संपदा व्यवसाय


(vii) ऐसी क्रियाएं / क्षेत्र जो निजी क्षेत्र द्वारा निवेश के लिए वर्जित है, अर्थात अणु ऊर्जा तथा रेलवे।