स्वीकृति - Acceptance
स्वीकृति - Acceptance
भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 2 (b) के अनुसार, "जब वह व्यक्ति जिसके लिए प्रस्ताव किया गया है उस पर अपनी सहमति प्रकट कर देता है, तो यह कहा जाता है कि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है।"
स्वीकृति का मतलब किसी व्यक्ति को दिये गए प्रस्ताव की सहमति है। प्रस्ताव का तब तक कोई अर्थ नहीं होता जब तक उसकी सहमति न मिल जाय। प्रस्ताव की स्वीकृति हो जाने पर वह वचन का रूप धारण कर लेती है । प्रस्ताव की स्वीकृति मिल जाने पर वह एक ठहराव बन जाता है तठे ठहराव यदि राजनियमों द्वारा प्रवर्तनीय हो तो वह एक अनुबंध कहलाता है। अतः किसी भी अनुबंध के लिए प्रस्ताव की स्वीकृति होना अनिवार्य होता है।
स्वीकृति कौन दे सकता है?
किसी भी प्रस्ताव की स्वीकृति वही दे सकता है जिस व्यक्ति को प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्ताव की स्वीकृति उसके प्रकृत्ति पर भी निर्भर करता है। प्रस्ताव की स्वीकृति निम्नलिखित दशाओं में भिन्न हो सकती है:
i. सामान्य प्रस्ताव की दशा में जो प्रस्ताव जन साधारण के समक्ष रखा जाता है वह सामान्य अथवा साधारण प्रस्ताव कहलाता है। सामान्य प्रस्ताव को कोई भी व्यक्ति स्वीकार कर सकता है।
ii. विशिष्ट प्रस्ताव की दशा में विशिष्ट प्रस्ताव एक ऐसा प्रस्ताव है जो किसी व्यक्ति विशेष को दिया जाता है। ऐसे प्रस्ताव को वह व्यक्ति स्वयं ही स्वीकार कर सकता है जिसे प्रस्ताव दिया गया है।
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