भारतीय नियोजन आयोग के अनुसार- According to the Planning Commission of India
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गरीबी रेखा निर्धारित करने का ढंग
निर्धनता रेखा आय वितरण अथवा निजी उपभोग व्यय स्तर के आधार पर भी निर्धारित की जा सकती है परंतु आमतौर पर निजी उपभोग व्यय को ऐसा मापने के लिए प्रयोग में लाया जाता हैं। इसे निम्न ढंग से निर्धारित किया जाता है:
(i) रहने के लिए निम्न पौष्टिक स्तर निर्धारित करो।।
(ii) न्यूनतम कैलोरिज प्राप्त करने के लिए खरीदी जाने वाली वस्तुओं की लागत की गणना करो।
(iii) न्यूनतम कैलोरिज प्राप्त करने के लिए प्रति व्यक्ति, उपभोग व्यय निर्धारित करो
(iv) ऐसा उपभोग व्यय गरीबी रेखा कहलाता है।
अन्य लोगों के अनुसार, "वह व्यक्ति जो ग्रामीण क्षेत्र में 229 रूपये तथा 264 रूपये शहरी क्षेत्र में (1993-94 की कीमतों पर) खर्च करते हैं गरीबी रेखा पर आते है। इसके नीचे व्यय करने वाले लोग गरीब कहलाते है।"
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं आमतौर पर एक डॉलर तथा दो डालर प्रतिदिन के आधार बना कर गरीबी रेखा की परिभाषा देते है। जिनकी आय 2 डालर प्रतिदिन से कम है वह गरीब व्यक्ति है तथा जिनकी आय एक डालर प्रतिदिन से भी कम है वह अति गरीब है। " दादा भाई नौरोजी ने निर्धनता रेखा की परिभाषा जेल में रहने की लागत स्वीकार की है। लोगों को अपने दैनिक जीवन मे कम से कम यह सुविधाएं अवश्य मिलनी चाहिए जो एक कैदी को जेल में मिलती है। व्यय के इस स्तर से कम निर्धनता का शाप होता है।
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