विज्ञापन एजेन्सी , प्रमुख कार्य - Advertising agency, major work

विज्ञापन एजेन्सी , प्रमुख कार्य - Advertising agency, major work


विज्ञापन एजेन्सी उन पेशेवर लोगों की संस्था होती है जो अपने विशिष्ट ज्ञान चातुर्य एवं अनुभव पर उत्पादकों तथा व्यापारियों की वस्तुओं का प्रभावपूर्ण विज्ञापन करती है।


विज्ञापन एजेन्सी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है


(i) उत्पाद तथा उपभोक्ताओं के संबंध में अनुसंधान करना 


(ii) माग पूर्ति प्रतिस्पर्धा आदि की जानकारी करना


(iii) विज्ञापन माध्यम के चयन का परामर्श देना


(iv) विज्ञापन माध्यमों का प्रचार करना


(v) विज्ञापन प्रतिलिपि बनाना


(vi) वस्तु डिजायन व्यापार चिन्ह तथा लेबल तय करना


(vii) समाचार पत्रो एवं नगर के मुख्य स्थानों पर विज्ञापन के लिए स्थान सुरक्षित करना


(viii) रेडियो, टेलीवीजन के लिए विज्ञापन तैयार करना


(ix) विज्ञापन परिणामो का मल्यांकन करना


(x) विज्ञापन फिल्मों के लिए संवाद, नारे तैयार करना 


(xi) कलात्मक भित्ति विज्ञापनों को निर्माण करना


(xii) विक्रय सदन में सहायता करना


(xiii) जन-संपर्क में सहायता प्रदान करना


(xiv) व्यापक विज्ञापन योजनाएं बनाना तथा उपभोक्ता तक पहुंचने के लिए प्रभावपूर्ण क्रियान्वयन करना


(xv) ग्राहकों का अध्ययन करना तथा उसके अनुसार विज्ञापन प्रसारण में परिवर्तन करना 


(xvi) विज्ञापन के लिए नित्य नवीन एवं आकर्षक प्रणालियों के आविष्कार के लिए अनुसंधान करना।


आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विज्ञापन की महत्ता आवश्यक है, जो इन एजेन्सियों के माध्यम से संभव बन पाती है, क्योंकि ये संस्थाएं विज्ञापन विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करने के लिए संगठित होती है इन एजेन्सियों को पारिश्रामिक देने की अनेक विधिया है जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है -


(i) कमीशन विधि यह कमीशन विज्ञापन एजेन्सियों को विज्ञापन माध्यम द्वारा दिया जाता है विज्ञापन एजेन्सी अपने बल पर एक निश्चित प्रतिशत धन राशि काटकर बाकी रकम माध्यम को दे देती है। विज्ञापक से वह पूरा वसूल करती है।


(ii) कमीशन तथा लागत - इस विधि में एजन्सी को माध्यम से कमीशन तो मिलता ही है साथ ही वह विज्ञापन प्रति के बनाने का व्यय भी ग्राहक से वसूल करता है।


(iii) कमीशन एवं शुल्क इस विधि में कमीशन तो विज्ञापन माध्यम से प्राप्त होता है किन्तु ग्राहक से अपनी सेवाओं के प्रतिफल के बदले एजेन्सी कुछ शुल्क वसूल कर सकती है। शुल्क की मात्रा पूर्व निर्धारित होती है।


भारत में सर्वप्रथम विज्ञापन एजेन्सी 1905 में बी दत्ताराम एंड कंपनी के नाम से स्थापित हुई थी, तब से इनकी संस्था में निरंतर वृद्धि हो रही है। वर्तमान में भारत में लगभग 250 विज्ञापन एजेन्सियां काम कर रही है। जिनमें से प्रमुख इस प्रकार है-


(i) हिन्दुस्तान थॉम्पसन एसोसिएटस लिमिटिड, मुम्बई


(ii) मार्केटिंग एडवरटाइजिंग एसोसिएटस प्रा. लि. मुम्बई


(iii) चैत्र लियो युनेट लि. मुम्बई


(iv) कान्टैक्ट एडवरटाइजिंग (इंडिया) लि. मुम्बई


(v) एफ.सी.बी. उल्का एडवरटाइजिंग लि. मुम्बई।


भारत में ज्यों-ज्यों औद्योगिक विकास होता जा रहा है.

शहरीकरण की प्रवृत्ति बढती जा रही है. शिक्षा एवं सेवा क्षेत्र का प्रसार निरंतर बढ़ता जा रहा है त्यो त्यो विज्ञापन एजेन्सी की संख्या में वृद्धि होती जा रही है। इनकी सेवाओं का भी विस्तार होता जा रहा है। 


(ग) कंपनी के अन्दर एवं बाहर उपर्युक्त दोनों के अलावा एक तीसरी अवस्था यह भी हो सकती है कि कंपनी बाहरी एजेन्सी की तथा अपने पास - विज्ञापन विभाग खोलकर दोनों की सेवाएं प्राप्त कर सकती है कम्पनी के पास एक अच्छा विज्ञापन विभाग होने पर भी बाहा एजेन्सियों का प्रयोग निम्न कारणो से करना पड़ता है -


(i) कंपनी के पास समान्यतः अपने विशेषज्ञ नही होते हैं जितने कि एक सुदृढ़ विज्ञापन कंपनी के पास होते है।


(ii) एजेन्सी की सहायता से विज्ञापन लागत कम आती है क्योंकि एजेन्सी अपने स्टाफ की लागत अनेक विज्ञापनों पर फैल सकती है। 


(iii) एजेन्सी के पास विभिन्न उत्पादों एवं ग्राहको के जो अनुभव होती है उनसे कंपनी लाभान्वित होती रहती है। 


(iv) विज्ञापन विभाग की अपेक्षा विज्ञापन एजेन्सी को प्रभावी कार्य करके दिखाने की अधिक चिंता रहती है। 


(v) एजेन्सी की सेवाओं का प्रयोग करके कंपनी द्वारा बाहा दृष्टिकोण को समझा जा सकता है ताकि बाहा व आंतरिक दृष्टिकोणों की तुलना की जा सके।