विज्ञापन अनुसंधान की तकनीक - advertising research techniques

विज्ञापन अनुसंधान की तकनीक - advertising research techniques


(क) विज्ञापन करने से पूर्व विज्ञापन अनुसंधान इसमें मुख्यतः निम्न विधियों को सम्मिलित किया जाता है


(i) जांच सृजियां इस युक्ति से एक ही विज्ञापन की दो या दो से अधिक प्रत्तियों की तुलना की जाती है। इसमें किसी विज्ञापन से संबंधित सभी संभावित बिन्दुओं की एक सूची बना ली जाती है। तत्पश्चात विज्ञापन की वैक्लपिक प्रतिया तैयार करके जांच सूची की सहायता से प्रत्येक जांच सूची का मूल्याकन किया जाता है। जिस प्रति में जांच सूची के अधिकतम बिन्दु शामिल होते है, उसको चुन लिया जाता है। यदि जांच सूची से किसी विज्ञापन की प्रभावशीलता का पता लगाया जा सकता है, परन्तु इससे यह भी ज्ञात हो जाता है कि कोई महत्वपूर्ण बिन्दु विज्ञापन में शामिल होने से रह तो नहीं गया है।


(ii) उपभोक्ता समितियां इसे सम्मति अनुसंधान या सम्मति परीक्षण भी कहते है। इसके अंतर्गत देव निदर्शन प्रणाली द्वारा वर्तमान तथा सम्मावित: - ग्राहकों का एक आदर्श पैनल बनाया जाता है जिसमें प्रायः 8 से 10 तक सदस्य होते है (सामानयतः पैनल का आकार वस्तु या सेवा की प्रकृति विज्ञापन का उद्देश्य उपभोक्ताओं की प्रकृति, विज्ञापनकर्ता के साधन आदि घटकों पर निर्भर होता है इस पैनल का विज्ञापन की प्रतिया भेजी जाती हैं एवं उसके बारे में सम्मति मांगी जाती हैं। पैनल के सदस्य विशेष न होकर सामान्य समावित क्रेता के स्वरुप होते हैं। अत उनकी टिप्पणियां व प्रतिक्रिया के आधार पर प्रभावी विज्ञापन का चयन हो जाता है। इसके अंतर्गत निम्न रूप में सम्मति प्राप्त की जा सकती है


(अ) योग्यता क्रम परीक्षण


(ब) तुलनात्मक युगल परीक्षण


योग्यता क्रम परीक्षण में उपभोक्ताओं को विज्ञापन की अनेक प्रस्तावित प्रतियां भेजकर यह अनुरोध किया जाता है कि ये योग्यता क्रम में उन प्रतियों को वर्णित कर प्रतिक्रिया व्यक्त करे।

इस योग्यता के विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि कौनसा विज्ञापन सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध होगा। इसके विपरीत, तुलनात्मक युगल परीक्षण के अंतर्गत विज्ञापन प्रतियों के जोड़े भेज जाते है एवं सर्वोत्तम जोड़े का चुनाव करने के लिए कहा जाता है। विभिन्न जोड़े के बारे में प्राप्त सूचनाओं एवं प्रतिक्रियाओं के आधार पर सर्वोत्तम जोड़े का चुनाव करने के लिए कहा जाता है।


उपभोक्ता समिति के अंतर्गत एक अन्य प्रारूप संगोष्ठी द्वारा परीक्षण है। इसमें संभावित उपभोक्ताओं का संगोष्ठी बुलाकर उनसे विचार-विमर्श करके विज्ञापन प्रति के बारे में सम्मति जानी जाती है। इस पद्धति में विवेकपूर्ण सम्मति का पता लगाना आसान रहता है क्योंकि आपसी विचार-विमर्श के जरिये भ्रम एवं आशंकाओं का निवारण संभव हो जाता है।


उपभोक्ता समिति पद्धति का सबसे प्रमुख लाभ यह है कि इसमें एक बहुत कमजोर विज्ञापन को एक सुदृढ़ विज्ञापन से पृथक किया जा सकता है।


द्वितीय, यह विधि बहुत लोचपूर्ण है तथा न्यूनतम विधि द्वारा शीघ्रता से सम्पन्न की जा सकती है।