विज्ञापन अनुसंधान का समय एवं तकनीक - Advertising Research Timings and Techniques

विज्ञापन अनुसंधान का समय एवं तकनीक - Advertising Research Timings and Techniques


विज्ञापन अनुसंधान में 'समय' तत्व महत्वपूर्ण है जो बताता है कि अनुसंधान का कार्य किस समय या किस अवधि में किया जाना चाहिए। डॉज फल्स्टन तथा रिंक का मत है कि विज्ञापन अनुसंधान के वर्गीकरण में निम्नलिखित दो घटकों का प्रयोग किया जा सकता है: प्रथम अध्ययन किया जाने वाला चर है। इसमें विज्ञापन की सम्प्रेपण योग्यता या सृजित करने में इसकी प्रभावशीलता सम्मति है। द्वितीय घटक अनुसधान पद्धतिकरण से संबंधित है।


एडमंड फैसन के अनुसार विज्ञापन अनुसंधान का कार्य विज्ञापन विकास, प्रयोग एवं मूल्यांकन के किसी भी स्तर पर किया जा सकता है।

सम्भवत उन अवस्थाओं को निम्न क्रम में वर्गीकृत किया जा सकता है।


(i) विज्ञापन व्यूहरचना अनुसंधान


(ii) अवधारणा परीक्षण


(iii) रफ उत्पादन पूर्ण परीक्षण


(iv) माध्यम मूल्यांकन


(v) विज्ञापन पश्चात् परीक्षण 


(vi) कार्यक्रम मूल्यांकन


फैसन के अनुसार विज्ञापन अनुसंधान में प्रथम तीन अवस्थाएं विज्ञापन करने से पूर्व संचालित की जाती है।

इनका लक्ष्य इस बात पर प्रकाश डालना होता है कि क्या कहा या कैसे प्रदर्शित किया जाना चाहिए विज्ञापन से पूर्व अनुसंधान विचारों के प्रस्तुतिकरण में, जो रोचक एवं स्पष्ट होगे, प्रतिलिपि लेखकों एवं संचालकों को मदद करने हैं। विज्ञापन करते समय अनुसंधान का लक्ष्य यह जानना है कि विज्ञापन कार्य योजनानुसार हो रहा है या नहीं। यदि उसमें कुछ विचलन या अंतर हो गया है, तो इसके कारण ज्ञात किये जाते है और वास्तविक परिणामों की अनुमानित परिणामों जाती है। विज्ञापन के बाद अनुसंधान द्वारा इस प्रश्न का उत्तर ज्ञात किया जाता है कि हमने कितना अच्छा किया, बजाय इसके कि हमें क्या करना चाहिए? विज्ञापन से पूर्व अनुसंधान सम्भवतः गुणात्मक होता है जिसमें छोटे निदर्श आधार पर गहन परीक्षण किया जाता है। इसके विपरीत, विज्ञापन के बाद अनुसंधान परिणात्मक होता है जिसके लिए बड़े निदर्श तथा सांख्यिकीय विश्लेषण की आवश्यता होती है।