नियुक्ति , परिभाषा - appointment, definition
नियुक्ति , परिभाषा - appointment, definition
संगठन में समय-समय पर पद रिक्त होते जाते है। इन रिक्त पदों को भरने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। संगठन द्वारा की गई प्रक्रिया के दौरान आवश्यकतानुसार योग्य व्यक्ति को पद पर नियुक्त किया जाता है। संगठनात्मक ढाँचे में पदों को भरने तथा भरे पदों को बनाए रखने के लिए भर्ती, प्रशिक्षण, चयन, जनशक्ति, विकास, हस्तातरण, पदोन्नति आदि कार्य की आवश्यकता होती है।
नए कर्मचारी को कार्य सौपना आसान कार्य लगता है, किंतु ऐसा नहीं है। संगठन नियोक्ता उम्मीदवारों के लिए आवेदन हेतु सबसे पहले विज्ञापन देता है। विज्ञापन के अंदर पद विवरण और कृत्य विशिष्टता की सपूर्ण जानकारी रहती है जब उपयोगिता के अनुसार उम्मीदवार का चयन किया जाता है।
तब सामान्यतः लोग समझते हैं कि उनका चयन विज्ञापन के अनुसार किया जाएगा किंतु यह प्रक्रिया जितनी आसान लगती है, उतनी आसान नहीं है। नियुक्ति में कई समस्याए हैं, जैसे- सरकार का दवाब, महिलाओं को आगे बढ़ने का दबाव आदि । भर्ती करने के लिए दबाव बढ़ रहा है।
संगठन के पास अनेक कार्य होते हैं किंतु युवा के पास केवल एक ही कार्य होता है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया द्वारा कार्य किया जाता है। आज के युग में आवेदक को किसी एक कार्य के लिए नियुक्त नहीं किया जाता है, बल्कि उसे अन्य दूसरे कार्य लेने पर विचार किया जाता है। जब कोई व्यक्ति एक कार्य में असफल होता है तो उसे अन्य कार्य के लिए भेजा जाता है यह नियोक्ता के कार्य होते हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि नियुक्ति संगठन द्वारा की गई प्रक्रिया है। मतलब भूमिकाओं तथा पदों के इच्छानुसार ढाँचे को निर्मित करने से नजदीक से संबंधित स्थापित होना नियुक्ति को संगठन प्रक्रिया के एक तत्व के रूप में मानते हैं। लेकिन कुछ लेखकों का कहना है नियुक्ति को कई कारणों से अलग-अलग मानना बेहतर होगा क्योंकि नियुक्ति को कई कारणों से अलग अलग माना जाता है। दूसरा नियोक्ता को अलग मानने से चयन आकलन आदि में मानवीय तत्व पर ज्यादा जोर देने में सुविधा होती है। तीसरा नियुक्ति के क्षेत्र में ज्ञान तथा अनुभव की एक महत्वपूर्ण बॉडी विकसित हुई है। चौथा प्रबंधक इस तथ्य की अवहेलना कर देते हैं कि नियुक्ति उनकी जिम्मेदारी है न कि संववर्गीय विभाग की । अतः नियुक्ति को प्रबंधकीय प्रक्रिया के जरूरी तत्व के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रबंधकीय और संगठनात्मक रूप से देखे तो कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से देखना चाहिए।
क्योंकि सभी व्यक्ति की सोच, संवेदना अलग-अलग होती है सभी की रुचि कार्यक्षमता, व्यक्ति भिन्नता, आदि अलग-अलग होते हैं। इसलिए व्यक्तिगत भिन्नता को देखने का आदर्श तरीका उसकी प्रोफाइल को हर व्यक्तिगत मापदंडों से मिलना चाहिए। अगर एक बार यह प्रोफाइल बन जाती है तो यूनिक प्रोफाइल द्वारा हर व्यक्ति और उनके कार्यों को आसानी से मिलाया जा सकता है। अगर व्यक्तियों की संख्या काम की संख्या से ज्यादा हो तो कार्य के लिए अधिक योग्य व्यक्ति का चयन कर उनकी नियुक्ति करना चाहिए और अगर इसके विपरीत काम की संख्या ज्यादा है और लोग कम है तो कम योग्यता वाले व्यक्ति की नियुक्ति करनी होती है।
परिभाषा
नियुक्ति की कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाएं निम्नलिखित है:
पिगर्स और मेसर्स के शब्दों में "नियुक्ति उस कार्य के बारे में ज्ञात करना है,
जहाँ स्वीकृत व्यक्ति को प्रदस्य करना तथा कार्यभार देना है। यह दूसरा मेल है कि निरीक्षक कार्य की आवश्यकता के संबंध के बारे में क्या करने की सोचता हैं, यह इस बात का मेल है कि वह क्या प्रस्ताव देता हैं (तनाव, कार्य, स्थिति आदि) वेतन पत्रक के रूप में दूसरों से मित्रता पदोन्नति की संभावनाए आदि।"
कूल्स तथा ओडोनेल के अनुसार नियुक्ति (स्टाफिंग ) में सगठन डिजाइन किए गए पदों को भरने हेतु उचित तथा प्रभावी चयन, आकलन तथा सेविवर्गीय विकास द्वारा संगठन के ढाँचे को पूर्ण करना शामिल है।"
थियो हेमेन - "स्टाफिंग का संबंध संगठन के उन सभी सदस्यों की नियुक्ति तथा वृद्धि विकास से होता है, जिनका कार्य अन्य व्यक्तियों के प्रयत्नों के द्वारा कार्य को करवाना है।"
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