विनियोग क्रिया - appropriation action

विनियोग क्रिया - appropriation action


अतः विनियोग क्रियाओं में वृद्धि कीन्स के अनुसार अल्पकाल में उपभोग क्रिया स्थिर रहती है। अतः पूँजी कारी विनियोग सरकार के साधनों पर निर्भर करता हैसर द्वारा ही रोजगार में वृद्धि संभव है 


की सीमान्त उत्पादकता इसको अधिक प्रभावित नहीं कर सकती है। निजी विनियोग को प्रोत्साहित करने के लिए निम्न उपाय किये जा सकते हैं :


1. कंपनी टैक्स में कमी द्वारा कंपनी टैक्स में कमी होने से कंपनी की लाभ उपार्जन क्षमता बढ़ जाती है तथा पूँजी की सीमान्त उत्पादकता में वृद्धि होती है जिससे विनियोगों को प्रोत्साहन मिलता है


2. ब्याज दरों को नीची निर्धारित करके ब्याज दर में कमी करने से पूँजी की सीमान्त उत्पादकता - बढ़ जाती है जिससे विनियोग क्रिया में वृद्धि होती है।


3. मूल्य समर्थन र्तियों की घोषणा द्वारा वस्तुओं में मूल्य कम होने पर लाभ कम होते हैं, अतः सरकार को मूल्य समर्थक नीति द्वारा वस्तुओं के गिरते हुए मूल्यों को रोकने चाहिए । इससे विनियोग क्रिया में वृद्धि होती है


4. शोध में अधिक रुचि लेना अनुसंधान एवं नवप्रवर्तक के कार्यों इन कार्यों में अधिक रुचि लेने से भावी लाभ संभावनाएँ तथा विनियोग की प्रेरणा बढ़ जाती है । 


5. सरकार द्वारा सहायता एवं अनुदान सरकार द्वारा सहायता एवं अनुदान में वृद्धि करने से विनियोग डर नाती है।


6. सरकार द्वारा एकाधिकार प्रवृत्तियों पर अंकुश लगा देना एकाधिकारी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगा देने से विनियोग की मात्र में वृद्धि होती है।


उपर्युक्त समग्र पूर्ति सूची का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि-


1. रोजगार के स्तर में वृद्धि के साथ समग्र पूर्ति में भी वृद्धि होती है तथा रोजगार में कमी आने पर समग्र पूर्ति में भी कमी आती है।


2. समग्र पूर्ति अनुसूची यह बताती है कि उत्पादक को कम से कम कितना धन प्राप्त करना चाहिए की उसका श्रमिकों को रोजगार देना लाभप्रद बना रहे


3. पूर्ण रोजगार बिंदु के पश्चात् समस्त पूर्ती कीमत तो बढ़ती ही है लेकिन रोजगार में कोई वृद्धि नहीं होती है उपर्युक्त सारणी में समग्र पूर्ति जब करोड़ रुपये 35 करोड़ रुपयों से बढ़कर 28 करोड़ ही रहता है उसमें कोई वृद 30 होती है तो रोजगार धि नहीं होती है ।