भुगतानों का विनियोग - appropriation of payments

भुगतानों का विनियोग - appropriation of payments


कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी एक पक्षकार पर दुसरे पक्षकार के कई प्रकार के ऋण शेष हों और वह भुगतान करता है जो सभी ऋणों से निवृत्ति के लिए अपर्याप्त है, तब यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि वह भुगतान किस ऋण से निवृत्ति के लिए लागू होगा।


भुगतानों के विनियोजन से संबंधित विवरण भारतीय अनुबंध अधिनियम की धाराओं 59 61 में है, जो इस प्रकार है- 


1. विनियोग के लिए स्पष्ट तथा गर्भित निर्देश की दशा में यदि विनियोग के लिए स्पष्ट तथा गर्भित दिशा निर्देश हो तथा ऋणी ऐसी परिस्थितियों में भुगतान करता है जिसमें यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किसी विशेष ऋण के लिए है तो भुगतान स्वीकार किये जाने पर उसका उसी के अनुसार विनियोजन होना चाहिए।


ii. निर्देशन दिये जाने पर भुगतान का विनियोजन- यदि ऋणी ने न तो कोई निर्देश दिया हो और न ऐसी परिस्थितियाँ ही हो जिनमें यह अनुमान लगाया जा सके कि भुगतान किस ऋण के चुकता करने के लिए हैं, तो ऐसी परिस्थिति में ऋणदाता अपनी इच्छानुसार उसे किसी भी वैध ऋण के संबंध में प्रयोग कर सकता है।


iii. किसी भी पक्षकार द्वारा नियोजन न किये जाने की दशा में यदि पक्षकार भुगतान का नियोजन करने में असमर्थ रहते हैं, तो भुगतान का प्रयोग समयक्रमानुसार किया जायेगा, चाहे यह प्रचलित राजनियम के अंतर्गत अवधि-वर्जित हो अथवा नहीं।


iv. यदि मूलधन तथा व्याज दोनों बकाया हों- यदि ऋणी धनराशि का भुगतान करते समय ऋणदाता को यह नहीं बताता है कि उसके द्वारा दी गई धन राशि का नियोजन मूलधन के लिए है, अथवा ब्याज के लिए, तो उसके द्वारा दी गई धनराशि का नियोजन सबसे पहले ब्याज के भुगतान के लिए किया जायेगा ।