मानव संसाधन प्रबंधन का क्षेत्र - area of human resource management
मानव संसाधन प्रबंधन का क्षेत्र - area of human resource management
मानव संसाधनों के किसी संगठन में नियुक्ति से लेकर उनके उस संगठन को छोड़ने तक की अर्थात् उनके कार्यकारी जीवन की वस्तुतः सभी प्रमुख गतिविधियाँ मानव संसाधन प्रबंधन के अध्ययन की विषय वस्तु हैं। मानव संसाधन प्रबंधन की अवधारणा मानवीय पक्ष के व्यवहारवादी दृष्टिकोण पर आधारित है तथा मानव संसाधनों की परिवर्तनशील प्रकृति सर्वविदित है। अतः इस परिप्रेक्ष्य में मानव संसाधन प्रबंधन का विषय-क्षेत्र और भी अधिक व्यापाक हो जाता है तथा इसके अंतर्गत किसी भी गतिविधि अथवा प्रक्रिया को मानव संसाधनों से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। संगठनात्मक, यहाँ तक की स्वचालित यंत्रों एवं प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन में भी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ती है। सक्षम एंव अभिप्रेरित मानव संसाधन, संगठन के किसी भी क्रिया-कलाप पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। भारतीय कार्मिक प्रबंधन संस्था (Indian Institute of Personnel Management) ने मानव संसाधन प्रबंधन की विषय-व -वस्तु/ क्षेत्र को निम्नलिखित श्रेणियों के अंतर्गत परिभाषित किया है:
(अ) कार्मिक पक्ष (Personnel Aspect)- यह पक्ष मानव संसाधनों के नियोजन, भर्ती, चयन, स्थापन, पदोन्नति, स्थानान्तरण, प्रशिक्षण एवं विकास, पदच्युति, छंटनी, पारितोषिक/ पारिश्रमिक प्रशासन आदि से संबंधित है।
(आ) कल्याण पक्ष (Welfare Aspect )- यह पक्ष मानव संसाधनों / कर्मचारियों के कार्य करने की परिस्थितियों तथा सुविधाओं से संबंधित है। उदाहरण के लिए, कर्मचारियों की शिक्षा, उनके लिए भोजनालय, विश्रामालय, घर, मनोरंजन, चिकित्सकीय सहयोग, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, यातायात सुविधाएं आदि व्यवस्थाओं से सम्बंधित है।
(इ) औद्योगिक संबंध पक्ष (Industrial Relations Aspect)- इसके अंतर्गत कर्मचारी/ मजदूर /श्रमसंघो एवं प्रबंधन के बीच संबंध, संयुक्त वार्ता (joint consultation),
सामूहिक सौदेबाजी (collective bargaining), अनुशासनात्मक कार्यवाही (disciplinary action), अन्याय / असंतुष्टि / परिवेदना की पहचान एवं निवारण ( grievance identification and handling/ settlement), औद्योगिक विवाद एवं समाधान (industrial disputes and settlement) आदि मुददों पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
अतः मानव संसाधन प्रबंधन के व्यापक विषय क्षेत्र को भारतीय कार्मिक प्रबंधन संस्था (IIPM) ने मुख्यतः उपरोक्त तीन श्रेणियों में विभाजित किया है, किन्तु अध्ययन की सुविधा के दृष्टिकोण से इन तीन मुख्य श्रेणियों की विषय-वस्तु का विशिष्ट एवं पृथक रूप से सरलीकरण निम्नलिखित बिंदुओं के अंतगर्त किया जा सकता है।
1. कार्य विश्लेषण (Job Analysis)- इसके अंतर्गत संगठन के विभिन्न कार्यों/ पदों से सम्बंधित दायिवों, कार्यों, योग्यताओं, अनुभव आदि का उल्लेख किया जाता है।
2. मानव संसाधन नियोजन ( HR Planning)- इसके अंतर्गत संगठन में कर्मचारियों की मांग एवं आपूर्ति से संबंधित अध्ययन, विश्लेषण एवं निर्धारण, विशिष्ट तकनीकों के आधार पर किया जाता है।
3. भर्ती एवं चयन (Recruitment and Selection ) - इसके अंतर्गत चयन के लिए कर्मचारियों की तलाश करना तथा संगठन में आवेदन करने हेतु उन्हें अभिप्रेरित करने का कार्य किया जाता है जिसके आधार पर संगठन में सर्वाधिक उपयुक्त पात्रों का अंतिम चयन होता है।
4. प्रशिक्षण एवं विकास (Training and Development)- इसके अंतर्गत कर्मचारियों को उनके कार्य निष्पादन से संबंधित ज्ञान एवं कौशलों की शिक्षा प्रदान की जाती है, जिससे उनका निष्पादन और बेहतर हो सके तथा साथ ही साथ उनकी क्षमताओं की पहचान करके विशिष्ट शिक्षा एवं ज्ञान के माध्यम से उन्हें भविष्य में बेहतर निष्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
5. निष्पादन मूल्यांकन एवं संभावना मूल्यांकन ( Performance Appraisal and Potential Appraisal)- इसके अंतर्गत किसी विशिष्ट कार्य अवधि में कर्मचारियों के निष्पादन एवं उसके परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है तथा साथ ही साथ भविष्य में किसी पद, कार्य संबंधी दायित्वों का निर्वहन करने के लिए उचित क्षमताओं एवं कौशलों का भी आकलन किया जाता है।
6. कार्य मूल्यांकन (Job evaluation)- इसके अंतर्गत संगठन के विभिन्न कार्यों/ पदों की उपयोगिता एवं मूल्य का विश्लेषण किया जाता है।
7. कर्मचारियों का स्थानांतरण (Employee Transfer)
8. कर्मचारियों की पदोन्न्ति (Employee Promotion )
9. कर्मचारी वियोजन (Employee Separation)
10. मजदूरी भत्ता एवं वेतन प्रशासन (Wage and Salary Administration)
11. कर्मचारी अंकेक्षण (HR Audit) - विभिन्न प्रकार के कर्मचारियों के कौशलों, शिक्षा, योग्यता, आयु. अनुभव, पद, क्षमता आदि से संबंधित सूचनाओं तथा उनका अन्य प्रक्रियाओं के लिए उपयोग एवं रख रखाव का ब्यौरा इसके अंतर्गत किया जाता है।
12. परिवेदना प्रबंधन (Grievance Management)- इसके अंतर्गत कर्मचारियों की संगठन कार्य से संबंधित किसी भी प्रकार की असंतुष्टि, अन्याय अथवा परिवेदना की पहचान तथा उसका निवारण / समाधान किया जाता है।
13. अनुशासनात्मक कार्यवाही - ( Disciplinary Action ) इसके अंतर्गतकर्मचारियों को संगठनात्मक अनुशासन का महत्व समझाया जाता है तथा उनके अमर्यादित, अनापेक्षित एवं अनुशासनहीन व्यवहार के लिए कार्यवाही के प्रावधानों का निर्धारण किया जाता है।
14. अभिप्रेरणा एवं संप्रेषण - ( Motivation and Communication) कर्मचारियों में संगठन के प्रति सर्मपण एवं दायित्व की भावना का प्रत्यारोपण,
उन्हें अभिप्रेरित करके किया जाता है तथा संगठनात्मक प्रभावशीलता हेतु उनके संप्रेषण कौशलों का विकास किया जाता है।
15. औद्योगिक संबंध (Industrial Relations)- इसके अंतर्गत नियोक्ताओं, प्रबंधन तथा कर्मचारियों के संबंधों तथा उन संबंधो को नियामक बनाने हेतु सरकारराष्ट्र / की भूमिका का अध्ययन किया जाता है, जिसका उददेश्य इन विभिन्न पक्षों के संबंधो को बेहतर एंव उत्पादक बनाना तथा औद्योगिक शांति की स्थापना करना है।
16. औद्योगिक विवाद: बचाव तथा निपटारा (Industrial Disputes: Prevention & Settlement)- रोजगार संबंधी विभिन्न पक्षों के बीच उत्पन्न विवादों एवं उनके कारणों का विश्लेष्ण तथा साथ ही साथ उनसे बचाव तथा समाधान के उपायों का अध्ययन इस बिन्दू के अंतर्गत किया जाता है।
17. अभिलेखन (Record keeping)- कर्मचारियों तथा उनके कार्यों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाओं का ब्यौरा तैयार करना।
18. कर्मचारी कल्याण (loyee Welfare Emp )- कर्मचारी जिन परिस्थितियों में संगठन के अंतर्गत कार्य करते हैं उन्हें बेहतर सुरक्षित स्वस्थ एवं सुविधापूर्ण बनाना, आवश्यक दैनिक एवं मौलिक संसाधनों को सुलभ बनाना आदि कार्य कर्मचारी कल्याण के क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
19. सहभागिता प्रबंधन (Participative Management)- कर्मचारियों की प्रबंधन में सहभागीता / भागीदारी सुनिश्चित करना।
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