प्रशिक्षण के क्षेत्र - areas of training

प्रशिक्षण के क्षेत्र - areas of training


संगठन अपने कर्मचारियों को निम्नलिखित क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करता है:


• संगठन की नीतियाँ और प्रक्रियाएं


• विशिष्ट कौशल


• मानव संबंध


• समस्या को सुलझाना


• प्रबंधकीय एवं पर्यवेक्षी कौशल


• अपरेंटिस प्रशिक्षण


1) संगठन की नीतियाँ और प्रक्रियाएं


प्रशिक्षण के इस क्षेत्र में नए कर्मचारियों को संगठन के नियमों, प्रथाओं, प्रक्रियाओं, परंपरा, प्रबंधन, संगठन संरचना, पर्यावरण, उत्पाद, सेवाएं आदि से परिचित कराया जाता है।


यह परिचय नए कर्मचारी को समायोजित करने में सक्षम बनाता है। खुद बदलती परिस्थितियों के साथ संबंध में जानकारी कंपनी के संगठन के नियम और नीतियों की जानकारी संगठन के उत्पादों / सेवाओं के सन्दर्भ में कर्मचारी में सकारात्मक अभिवृत्ति एवं अनुकूल व्यवहार उत्पान करने के साथ साथ उसमें संगठन के वर्तमान कर्मचारियों के लिए सम्मान की भावना भी उत्पान करती है। संगठन अपने विकास कार्यक्रमों, उत्पादों / सेवाओं की गुणवत्ता तथा कर्मचारियों द्वारा आवश्यक कौशल आदि के बारे में भी कर्मचारी को प्राथमिक जानकारी प्रदान करता है। यह जानकारियाँ कर्मचारियों को संगठन के विकास और वृद्धि में उनके योगदान से परिचित कराती हैं।


2) विशिष्ट कौशल में प्रशिक्षण:


प्रशिक्षण के इस क्षेत्र में कर्मचारी को नौकरी पर और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए सक्षम बनाया जाता है। प्रशिक्षक कर्मचारी को वास्तविक कार्य/ नौकरी करने के लिए आवश्यक विभिन्न कौशलों के सन्दर्भ में प्रशिक्षित करता है। उदाहरण के लिए, बैंक में क्लर्क को अंकगणितीय गणनाओं की सही तरीके से प्रविष्टियां करने के कौशल, आंकड़ों, प्रविष्टियों की त्वरित तुलना आदि में प्रशिक्षित होना चाहिए।


3) मानवीय संबंधों में प्रशिक्षण:


मानवीय संबंध में प्रशिक्षण संगठनों में अधिक महत्व रखता है क्योंकि कर्मचारियों को न केवल अन्य कर्मचारियों के साथ ही मानवीय सम्बन्ध बनाए रखने हैं बल्कि संगठन के उपभोक्ताओं के साथ भी। कर्मचारियों को स्व- अधिगम, अंतर्वैयक्तिक कौशल क्षमता, समूह गतिशीलता, अभिवृत्ति, प्रत्यक्षीकरण,

नेतृत्व शैली, अभिप्रेरणा, परिवेदना / असंतुष्टि निवारण, अनुशासनात्मक प्रक्रिया आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता होती है। यह प्रशिक्षण कर्मचारियों को बेहतर समूह कार्य करने के लिए सक्षम बनाता है, जिससे संगठन की दक्षता एवं उत्पादकता बढ़ जाती है।


4) समस्या समाधान में प्रशिक्षण:


संगठन के विभिन्न स्तरों पर समान गतिविधियों का सामना करने वाले कर्मचारियों के लिए अधिकांश संगठनात्मक समस्याएं आम हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रबंधकों की समस्याओं के कुछ सामान मूल कारण हो सकते हैं। अतः, प्रबंधन सामान्य समस्याओं पर चर्चा करने के लिए सभी प्रबंधकीय कर्मियों को एक साथ बुला सकता है जिससे की प्रभावी समाधान सामने आ सकें।

यह न केवल समस्याओं को सुलझाने में सहायता करता है प्रशिक्षक को इस तरह की बैठकें आयोजित करनी चाहिए तथा प्रशिक्षुओं को ऐसी बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


5) प्रबंधकीय और पर्यवेक्षी प्रशिक्षण:


कुछ अवसरों पर गैर-प्रबंधक को भी कभी-कभी नियोजन, निर्णयन, आयोजन, अंतर्वैयाक्तिक संबंधों को बनाए रखने, निर्देशन और नियंत्रण जैसे प्रबंधकीय और पर्यवेक्षी कार्य करने पड़ते हैं। इसलिए, प्रबंधन को कर्मचारी को प्रबंधकीय और पर्यवेक्षी कौशल में भी प्रशिक्षित करना की आवश्यकता है।


6) अपरेंटिस प्रशिक्षण:


अपरेंटिस अधिनियम, 1961 के अनुसार विशिष्ट उद्योगों की औद्योगिक इकाइयों को विशिष्ट व्यापारों में प्रशिक्षित बेरोजगारों / प्रशिक्षुओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान में प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता है जिससे उनके रोजगार के अवसरों में सुधार हो सके या वह अपना उद्योग शुरू करने के लिए सक्षम बन सकें। इस तरह के प्रशिक्षण आमतौर पर एक वर्ष से चार वर्ष तक की अवधि के होते हैं। यह प्रशिक्षण आम तौर पर लघु उद्योगों / व्यापार, शिल्पकारी आदि जैसे क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान और कौशल प्रदान करने के लिए दिया जाता है।