अंतरराष्ट्रीय बाजारों का आंकलन, मूल्यांकन एवं चयन - Assessment, evaluation and selection of international markets
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का आंकलन, मूल्यांकन एवं चयन - Assessment, evaluation and selection of international markets
वैश्विक बाजार का क्षेत्र बहुत विशाल है। वैश्विक व्यावसायिक इकाई को यह निर्णय लेना होता है कि उसे किस देश में अपने उत्पाद बेचने के लिए प्रवेश करना चाहिए तथा किस देश में अपनी उत्पादन इकाई स्थापित करनी चाहिए। सीमित साधनों, व्यापार संबंधी बाधाओं, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर प्रतिबंधों, राजनीतिक जोखिम, कानून व्यवस्था आदि समस्याओं के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए सभी देशों के बाजारों में प्रवेश करना संभव नहीं होता। यदि किसी देश टैरिफ व गैर टैरिफ बाधाएं अत्यधिक है या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के अंतप्रवाह पर प्रतिबंध लगाए गए हैं या किसी देश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण राजनीतिक जोखिम अधिक है या विपणन संबंधी घटकों के प्रतिकूल होने के कारण व्यावसायिक प्रवेश लाभकारी नहीं है तो बहुराष्ट्रीय कंपनी को ऐसे देश में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
कई बार कुछ देशों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की मनाही होती है, तो ऐसे देश में निवेश माध्यम द्वारा प्रवेश लेना बिल्कुल असंभव है।
इसके अलावा, यह भी हो सकता है कि बहुराष्ट्रीय कंपनी के पास विभिन्न संसाधन, जैसे वित्तीय संसाधन मानवीय संसाधन प्रबंधकीय संसाधन, मुख्य तकनीकी कौशल इतनी अधिक मात्रा में न हो कि सभी देशों में प्रवेश लिया जा सके। ऐसी स्थिति में बहुराष्ट्रीय कंपनी को ऐसे देशों का चयन करना होगा जहां ये प्रवेश ले पाएँ। आज बहुत सी बहुराष्ट्रीय कंपनियां 150 से भी अधिक देशों में कार्यरत है। इतना विशाल आकार बढ़ती में वैश्विक कंपनियों को बहुत अधिक समय लगा होगा। इन्होने धीरे-धीरे ही विभिन्न देशों में प्रवेश लिया होगा। बहुराष्ट्रीय कंपनिया विभिन्न देशों में प्रवेश से पहले उनका मूल्यांकन करती है। इस मूल्यांकन के आधार पर विभिन्न देशों को श्रेणीबद्ध किया जाता है, अर्थात कम सूची बनायी जाती है। सबसे पहले उस में प्रवेश लिया जाता है जिसका कम सूची में सर्वोच्च स्थान पर है फिर उसके बाद दूसर, तीसरे चौथे कम वाले देश में प्रवेश लिया जाता है।
1 देश मूल्यांकन व चयन में चरण
(क) अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक उद्देश्यों को परिभाषित करना:
अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक इकाई के वैश्विक व्यवसाय संबंधी विभिन्न उद्देश्य हो सकते है ये उद्देश्य देश के मूल्यांकन व चयन को प्रभावित करते हैं, जैसे
(i) व्यावसायिक इकाई का उद्देश्य यदि अपने अतिरिक्त उत्पादन को बेचना है तो उस देश का चयन किया जाना चाहिए जहां टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाएं
न्यूनतम है तथा जहां उत्पाद की पर्याप्त मांग भी है।
(ii) यदि व्यावसायिक इकाई का उद्देश्य नियमित रूप से बहुत विशाल मात्रा में उत्पादों को निर्यात करना है तो मांग, टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं के अलावा अन्य घटको जैसे- आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक स्थिरता प्रतिस्पर्धा का स्तर, सांस्कृतिक घटकों आदि को भी ध्यान में रखा जाता है.
(iii) यदि वैश्विक व्यवसायिक इकाई का उद्देश्य उत्पादन कियाओं के लिए विदेश में आधार स्थापित करना है तो देश के मूल्यांकन व चयन में अलग तरह के घटकों का अध्ययन किया जाएगा, जैसे- श्रम लागत, कच्चे माल की उपलब्धता, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अंतप्रवाह पर प्रतिबंध, अधोसंरचना संबंधी सुविधाएं, कर प्रोत्साहन, राजनीतिक दृष्टिकोण आदि को ध्यान में रखा जाएगा। इस तरह वैश्विक व्यावसायिक इकाई के उद्देश्य देश के मूल्यांकन व चयन को प्रभावित करते हैं।
(ख) मूल्यांकन के लिए घटकों / प्रमापों का चयन करना
वैश्विक व्यावसायिक उद्देश्यों को परिभाषित करने के बाद देश के मूल्यांकन व चयन के लिए घटको / मापों का चयन किया जाता है। ये घटक दो प्रकार के हो सकते हैं
(1) बाजार से संबंधित घटक
(ii) उद्योग से संबंधित घटक
बाजार संबंधी घटक समष्टि / सामान्य प्रकृति के होते हैं अर्थात ये घटक संपूर्ण देश में एक जैसे होते हैं। इन्हें सामान्य घटक भी कहते हैं। इसमें आर्थिक दशाएं आर्थिक नीतियाँ आर्थिक अधिनियम, राजनीतिक घटक, अधोसंरचनात्मक सुविधाएं सांस्कृतिक घटक उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता आदि को शामिल किया जाता है उद्योग संबंधी घटक भी सामान्य प्रकृति के होते हैं तथा सभी उद्योगों के लिए ये घटक एक जैसे होते हैं। इसमें कच्चे माल की उपलब्धता, प्रतिस्पर्धा का स्तर, माँग, सरकारी कानून, कर प्रोत्साहन, सांस्कृतिक घटकों आदि को शामिल किया जाता है।
(ग) प्रारंभिक छानबीन
प्रारंभिक छानबीन में विभिन्न प्रमापों / घटकों के आधार पर कुछ देशों का परित्याग कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य विस्तृत मूल्यांकन के लिए देशों को कम करना है तथा ऐसे देशों का पूर्ण रूप से परित्याग करना है जो एक बाड़ के प्रवेश के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है। प्रारंभिक छटनी के लिए द्वितीयक आंकड़ों का प्रयोग किया जाता है, जैसे- विश्व बैंक द्वारा प्रत्येक सदस्य देश को प्रकाशित आंकड़े। ये आंकड़े मुख्य सांख्यिकी आकडे जसे - जनसंख्या संबंधी आँकड़े सकल घरेलू उत्पाद प्रति व्यक्ति आय विकास दर संबंधी आकड़े आदि हो सकते है ये घटक विभिन्न देशों की प्रारंभिक छानबीन में सहायक होते हैं, जैसे विलासतापूर्ण उत्पाद प्रीमियम कार के बाद के विपणन हेतु एक ऐसे देश में प्रवेश बिल्कुल भी उचित नहीं होगा जहा प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है या जहां जीवन स्तर बहुत निम्न है। इसी तरह यदि किसी देश में जनसंख्या का आकार बहुत कम है, तो उपभोक्ता उत्पादों की मांग बहुत कम होगी अतः उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी को ऐसे देश में प्रवेश नहीं लेना चाहिए क्योंकि यहां उसे अधिक बाजार आकार नहीं मिलेगा।
(घ) चयन किए गए बाजारों का विस्तृत मूल्यांकन:
प्रारंभिक छान-बीन द्वारा देशों की सूची को छोटा करने के बाद चुने गए देशों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है विस्तृत मूल्याकन में मूल्यांकन मेट्रिक्स तैयार किया जाता है जिससे इन देशों में बाजार संबंधी घटकों व उद्योग विशेष संबंधी घटकों के बारे में सूचनाएं एकत्रित की जाती है संक्षिप्त सूची के प्रत्येक देश के बाजार के घटकों को अंक दिए जाते है। इसके पश्चात् विभिन्न घटकों को उनके महत्व के आधार पर भार दिया जाता है। प्रत्येक देश के लिए भारित मूल्य निकालने के लिए अंको को भार से गुणा करके गुणांक का जोड़ निकाला जाता है।
(ङ) अंतिम चयन
प्रत्येक देश के भारित मूल्य के आधार पर विस्तृत मूल्यांकन के लिए चुने गए देशों की कम सूची बनायी जाती है जिस देश का भारित मूल्य सर्वाधिक होता है, उसे पहला कम, दूसरे सर्वाधिक भारित मूल्य वाले देश को दूसरा कम और इसी तरह अगले कम दिए जाते है। इस कम सूची में से ऊपर देश चुन लिए जाते हैं।
भविष्य में व्यवसाय के प्रसार के लिए भी इस सूची का प्रयोग किया जाता है।
2 देश मूल्यांकन व चयन में प्रयोग किए जाने वाले घटक
विभिन्न देशों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में विभिन्न मापों का प्रयोग किया जाता है। इन घटकों को तीन वर्गों में बाटा जाता है.
(i) व्यावसायिक इकाई संबंधी घटक,
(ii) उद्योग संबंधी घटक
(iii) बाजार संबंधी घटक
इन घटकों का विस्तृत विश्लेषण निम्नलिखित है-
(i) व्यावसायिक इकाई संबंधी घटक
इनका आशय व्यावसायिक इकाई के घटकों से है। इन घटकों को व्यवसाय का आंतरिक वातावरण कहते हैं।
इसमें मुख्यत वित्तीय संसाधन, भौतिक व मानवीय संसाधन, व्यवसाय का उद्देश्य प्रबंधकीय नीतिया, कार्य दशाएं संस्थागत छवि अनुसंधान व विकास संबंधी क्षमता, उच्च प्रबंध का दृष्टिकोण आदि शामिल है। यदि व्यावसायिक इकाई के पास पर्याप्त मात्रा में वित्तीय व अन्य संसाधन उपलब्ध है तो व्यावसायिक इकाई अपने व्यवसाय को बहुत से देशों में फैला सकती है परंतु यदि व्यावसायिक इकाई के पास संसाधन सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है तो प्रवेश को केवल पड़ोसी देशों तक ही सीमित रखा जाएगा। इसी तरह व्यावसायिक इकाई के उद्देश्य भी देश के चयन को प्रभावित करते है, जैसे-यदि व्यावसायिक इकाई का उद्देश्य अपने अतिरिक्त उत्पादन को बेचना है, तो विदेशों में टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं, निर्यात-आयात नीति व मांग आकार को ध्यान में रखा जाता है परंतु यदि निर्यात, नियमित रूप में अत्यधिक मात्रा में किया जाना हो तो टैरिफ, गैर टैरिफ बाचाओं, मांग-आकार, निर्यात-आयात नीति के अलावा अन्य घटकों को भी ध्यान में रखा जाता है. जैसे आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक स्थिरता,
कानून व्यवस्था मुद्रा स्फीति, सांस्कृतिक घटकों आदि का भी देश मूल्यांकन व चयन प्रक्रिया में अध्ययन किया जाता है। यदि वैश्विक इकाई अन्य देशों में उत्पादन केंद्र स्थापित करना चाहती है तो देश मूल्यांकन व चयन प्रक्रिया में मुख्यतः कच्चे माल की उपलब्धता श्रम लागत, अधोसरचना सुविधाओं की उपलब्धता, कर प्रोत्साहन विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक स्थिरता, आदि को ध्यान में रखा आएगा।
(ii) उद्योग संबंधी घटक
ये घटक संपूर्ण उद्योग पर लागू होते हैं। उद्योग संबंधी मुख्य घटक निम्नलिखित हैं।
(क) कच्चे माल की उपलब्धता यदि बहुराष्ट्रीय कंपनी विदेश में उत्पादन इकाई स्थापित करने पर विचार कर रही है, तो यह विदेशों में कच्चे माल की पूर्ति व अन्य लागतों व उपलब्धता का विश्लेषण करेगी ताकि विदेश में निर्माणी इकाई स्थापित करने पर इसे आगते कम कीमत पर व उच्च क्वालिटी में उपलब्ध हो सके।
(ख) श्रम की उपलब्धता व श्रम लागतः यदि श्रम आगत उत्पादन लागत के मुख्य तत्वों में से एक है तो मेजबान देश का चयन करने से पहले वहां आवश्यक कौशल वाले श्रम की उपलब्धता व लागत का विश्लेपण किया जाना चाहिए। इसके अलावा विपणन व लेखांकन कार्यों के लिए भी श्रम की आवश्यकता पड़ती है।
(ग) प्रतिस्पर्धा का स्तर प्रतिस्पर्धा का स्तर विपणन क्षेत्र में विद्यमान प्रतिस्पर्धा इकाइयों की संख्या पर निर्भर करता है। ऐसी व्यावसायिक इकाई जो हमारे
उत्पाद से मिलता-जुलता उत्पाद या इसका निकट प्रतिस्थापित उत्पाद बेचती है, उसे प्रतिस्पर्धी इकाई कहते है। यदि विदेशी बाजार में प्रतियोगी इकाइयों की संख्या बहुत ऊँची है जैसे- पहा गला काट प्रतिस्पर्धा है तो ऐसे देश में प्रवेश नहीं करना चाहिए।
(घ) मांग का आकार किसी देश में मांग का आकार विभिन्न तत्वों पर निर्भर करता है, जैसे- जनसंख्या का आकार, शहरी व ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात, आयस्तर जीवन स्तर आर्थिक विकास दर सांस्कृतिक घटक आदि किसी देश में मांग आकार अधिक होने पर उस देश का चयन किया जाना चाहिए। बहुत सी बहुराष्ट्रीय कंपनियां, चीन व भारत में अपनी सहायक कंपनियां स्थापित करती है, क्योंकि यहां जनसंख्या का आकार अधिक होने के कारण मांग का आकार अधिक है।
(ख) सरकारी नीति व नियमन: किसी देश की सरकार का विदेशी निवेश के प्रति दृष्टिकोण भी देश के मूल्यांकन व चयन को प्रभावित करता है जैसे- कुछ देशों में सरकार विदेशी कंपनियों के आगमन को आकर्षित करती है। इसके लिए यह विभिन्न प्रोत्साहन अनुदान, उदार अधिनियम, कम प्रावधान, कम प्रशासनिक औपचारिकताएं आदि सुविधाएं प्रदान करती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रवेश के लिए उस देश का चयन करना चाहिए जहां की सरकार का दृष्टिकोण उदार हो ।
(च) सांस्कृतिक घटक विभिन्न देशों में सांस्कृतिक आयाम भिन्न-भिन्न होते हैं। किसी देश का चयन करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि मूल कंपनी का उत्पाद मेजबान देश की संस्कृति से मेल खाता हो जिसे वहां के लोग आसानी से स्वीकार कर हो, जैसे- डिब्बा बंद भोजन, यद्यपि विकसित देशों में बहुत प्रचलित है, परंतु विकासशील देशों के लोग इसे पसंद नहीं करते। इसी तरह हिंदुओं में गाय का मीट खाना उनकी संस्कृति में प्रतिबंधित है। अतः किसी देश का चयन करने से पहले वहाँ के सांस्कृतिक घटकों का अध्ययन करके यह पता लगा लेना चाहिए कि उत्पाद वहाँ की संस्कृति के अनुरूप हैं या नहीं।
(iii) बाजार से जुड़े घटक
इन घटकों को सामान्य घटक या समष्टि चातावरणीय घटक भी कहते है ये घटक पूरी अर्थव्यवस्था पर लागू होते हैं। देश मूल्यांकन व चयन प्रक्रिया में इन घटकों का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है विपणन संबंधी मुख्य घटक निम्नलिखित है:
(क) आर्थिक दशाएं किसी देश की आर्थिक दशाए वहां के उपभोग-स्तर तथा कय-शक्ति को प्रभावित करती है इनमें राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति आय आय-वितरण, विकास दर व्यापार चक की अवस्था, पूजी निर्माण की दर मुद्रा स्फीति दर आदि शामिल हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मेजबान देश की आर्थिक दशाए इसके प्रवेश के लिए अनुकूल हैं।
(ख) आर्थिक नीतियाँ आर्थिक नीतियां सरकार व व्यवसाय के मध्य संबंध स्थापित करती है ये नीतिया बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रवेश के अनुकूल या प्रतिकूल हो सकती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को निम्न मुख्य आर्थिक नीतियों का विश्लेषण करना चाहिए
(i) निर्यात-आयात नीति
(ii) विदेश निवेश नीति
(iii) औद्योगिक एवं लाइसेंसिंग नीति
(iv) मौद्रिक नीति
(v) राजकोषीय नीति
(ग) आर्थिक अधिनियम किसी देश की सरकार व्यवसाय को नियमित व नियंत्रित करने के लिए विभिन्न आर्थिक अधिनियम पारित करती है, जैसे- भारत सरकार ने कंपनी अधिनियम, विदेशी विनिमय प्रबंध अधिनियम उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम सेवी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा अधिनियम आदि पारित किए हैं जो विलयन एवं अधिग्रहण को नियमित करते हैं। यदि ये आर्थिक अधिनियम बहुत सख्त एवं जटिल हैं, इसके कारण दस्तावेजी औपचारिकताएं अत्यधिक है तो बहुराष्ट्रीय कंपनी को ऐसे देश में प्रवेश नहीं लेना चाहिए।
(घ) राजनीतिक घटक स्थिर, गतिशील व अनुकूल राजनीतिक वातावरण की व्यावसायिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। बहुराष्ट्रीय कंपनी को देश मूल्यांकन व चयन के समय किसी देश के राजनीतिक वातावरण का विश्लेषण अवश्य करना चाहिए।
मेजबान देश में राजनीतिक स्थिरता होने पर बहुराष्ट्रीय कंपनिया व्यवसाय संबंधी दीर्घकालीन योजनाएं बना सकती है यदि किसी देश में राजनीतिक स्थिरता है, तो सत्ताधारी सरकार बार-बार बदलती रहती है, इससे सरकारी नीतियों में बार-बार बदलाव आते रहते हैं। इससे अनिश्चितता का वातावरण बना रहता है जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश के रास्ते में बाधा है। यदि किसी देश के अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध अच्छे नहीं है तो यह अधिक देशीय जोखिम व रातनीतिक जोखिम की ओर संकेत करता है।
(ङ) अधोसंरचना अधोसंरचना में ऊर्जा सृजन, परिवहन, संचार, शिपिंग, एयरपोर्ट समुद्री बंदरगाह, बैंकिंग, बीमा आदि सुविधाएं शामिल है। अच्छी क्वालिटी की अधोसंरचना सुविधाओं में अभाव में व्यावसायिक इकाइयां सुगमता से व्यावसायिक कियाएं नहीं कर सकती किसी देश में प्रवेश से पहले बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अधोसंरचना संबंधी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।
(च) सांस्कृतिक घटक संस्कृति भोजन आदतो पहनाया शैली, कार्यशैली, मूल्य नीति शास्त्र आदि को प्रभावित करती है। संस्कृति किसी उत्पाद के प्रति दृष्टिकोण व स्वीकृति को प्रभावित करती है। यह उत्पाद की छवि को भी निर्धारित करती है बहुराष्ट्रीय कंपनी को देश के मूल्यांकन व चयन के समय वहां के सांस्कृतिक वातावरण का विश्लेषण कर लेना चाहिए और यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि कंपनी का उत्पाद मेजबान देश की संस्कृति से मेल खाता है।
(छ) विपणन केंद्र बनने की क्षमता यदि किसी देश में विपणन केंद्र बनने की क्षमता है तो बहुराष्ट्रीय कंपनी को ऐसे देश में प्रवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए यदि किसी देश में कच्चे माल की उपलब्धता है विकसित बदरगाह है, उच्च कौशल वाले कर्मचारी व श्रमिक उपलब्ध है, तो उस देश में विपणन केंद्र बनने की क्षमता होती है ऐसे स्थान पर उत्पादन केंद्र स्थापित करके बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने उत्पाद यहीं बनाकर यहीं बेच सकती हैं तथा यहा से अन्य देशों को निर्यात भी कर सकती है, जैसे बहुत सी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने चीन में अपने उत्पादन केंद्र स्थापित किए हैं क्योंकि चीन से दक्षिणी देशा पूर्वी देशों व एशियाई देशों को उत्पाद निर्यात करना आसान है इसी तरह दक्षिण अफ्रीका सपूर्ण अफ्रीका महाद्वीप को उत्पाद निर्यात करने के लिए अच्छा केंद्र है। अतः बहुराष्ट्रीय कंपनिया ऐसे देश में प्रवेश को प्राथमिकता देती है, जिनमें विपणन केंद्र बनने की क्षमता है।
वार्तालाप में शामिल हों