वैश्वीकरण के मार्ग में बाधाएं - Barriers to globalization

वैश्वीकरण के मार्ग में बाधाएं - Barriers to globalization


(क) अफसरशाही संबंधी बाधाए


व्यावसायिक इकाईयों को अफसरशाड़ी सबंधी बहुत-सी बाधाओं जैसे- लबी व जटिल प्रक्रियाओं, अत्यधिक दस्तावेजो का सामना करना पड़ता है। बहुत से विदेशी निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था में अत्यधिक प्रशासनिक बाधाओं के कारण निवेश करने में हिचकिचाते हैं।


(ख) अस्थायी सरकारी नीति


कुछ देशों में सत्ताधारी सरकार में अत्यधिक परिवर्तन आते रहते है। इसके फलस्वरूप सरकार की आर्थिक नीतिया स्थायी नहीं रहती है। निरंतर बदलती आर्थिक नीतियों के कारण दीर्घकालीन विदेशी निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश करने में हिचकिचाते हैं।

इसके अलावा सरकार के कार्यकरण में पारदर्शिता का अभाव है जिससे विदेशी निवेशकों के दिमाग में शकाए उत्पन्न होती है।


(ग) पिछड़ी तकनीक


विकासशील देशों के उद्योगों में तकनीक का स्तर विकसित देशों की तुलना में बहुत निम्न है। इन देशों में टेक्नोलॉजी के संबंध में अनुसंधान व विकास बहुत कमजोर है। पिछड़ी तकनीक के कारण इन देशों के उत्पादों की क्वालिटी बहुत घटिया है घटिया उत्पादों के कारण इन देशों की कंपनियों अपने व्यवसाय को अन्य देशों मे फैला नहीं पाती।


(घ) पिछड़ी अधोसंरचना


विकासशील देशों में आधारभूत सुविधाएँ विकसित देशों की तुलना में बहुत पिछड़ी हुई है

पिछडी अधोसंरचना के कारण इन देशों में निवेश करने से हिचकिचाती है। पिछड़ी आधारभूत सुविधाएं इन देशों की कंपनियों के अन्य देशों में फैलाव के रास्ते में भी बाधा है, जैसे भारत में पर्याप्त पोर्ट सुविधाओं का अभाव निर्यात आयात के व्यापार के रास्ते में बहुत बड़ी बाधा है।


(ङ) लघु आकार की व्यावसायिक इकाइयां


विकासशील देशों में अधिकतर व्यावसायिक इकाईयाँ परिवार स्वामित्व पर आधारित होती है। उनकी व्यावसायिक कियाऐं स्थानीय या प्रादेशिक स्तर तक सीमित होती है वे लघु आकार के कारण अपनी व्यावसायिक कियाओं को अन्य देशों तक फैला नहीं सकती।


(च) वैश्विक दृष्टिकोण का अभाव:


विकासशील देशों में बहुत कम उपकर्मियों का वैश्विक दृष्टिकोण होता है। अधिकतर उपकमियों का दृष्टिकोण बहुत संकीर्ण होता है। ये अपने व्यवसाय को


(छ) बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धाः


वैश्विक स्तर पर फैला कर अधिक जोखिम नहीं उठाना चाहते तथा अपने व्यवसाय को स्थानीय व अधिकतम राष्ट्रीय स्तर तक फैलाते हैं।

विकासशील देशों के उत्पादों को वैश्विक बाजार में अन्य देशों के उत्पादों से बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। बढ़ती विदेशी प्रतिस्पर्धा के कारण इन देशों के निर्यातको के लिए अपने उत्पाद बेचना बहुत ही कठिन हो जाता है।


(ज) विकसित देशों द्वारा लगाई टैरिफ व गैर-टैरिफ,


विकसित देशों ने विकासशील देशों से होने वाले आयातों पर विभिन्न टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाएं लगा दी हैं, जैसे- सीमा शुल्क, परिणामात्मक प्रतिबंध पैकेजिंग संबंधी सख्त प्रावधान आदि। इससे विकासशील देशों के निर्यातकों के लिए विकसित देशों को अपने उत्पाद निर्यात करना बहुत मुश्किल हो गया है।