पंजीयन न कराने का प्रभाव , लाभ - Benefits of not registering

पंजीयन न कराने का प्रभाव , लाभ - Benefits of not registering


फर्म का पंजीयन न कराने से निम्नलिखित असुविधाएँ अथवा अयोग्यताएँ होती है:


1. कोई भी साझेदार अन्य साझेदारों के प्रति वाद प्रस्तुत नहीं कर सकता - जब तक फर्म का पंजीयन न हुआ हो और वाद प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति का नाम फर्मों के रजिस्टर में साझेदार के रूप में न लिखा हो तब तक वह व्यक्ति या उसका प्रतिनिधि फर्म के अन्य साझेदारों के प्रति वाद प्रस्तुत नहीं कर सकता है।


2. फर्म भी किसी साझेदार के विरूद्ध वाद प्रस्तुत नहीं कर सकती - जब तक फर्म का पंजीयन न हुआ हो तब तक फर्म किसी भी साझेदार के विरूद्ध वाद प्रस्तुत नहीं कर सकती ।


3. कोई भी साझेदार फर्म के विरूद्ध बाद प्रस्तुत नही कर सकता जब तक फर्म का पंजीयन न हुआ हो तब तक कोई भी साझेदार फर्म के विरूद्ध वाद प्रस्तुत नहीं कर सकता


4. फर्म अन्य पक्षकारों के विरूद्ध वाद प्रस्तुत नहीं कर सकती यदि फर्म का पंजीयन नहीं कराया गया है तो फर्म किसी अन्य पक्षकार के विरूद वाद प्रस्तुत नहीं कर सकता है।


5. अन्य पक्षकार फर्म के विरूद्ध वाद प्रस्तुत कर सकते है- फर्म के पंजीयन न होने से अन्य पक्षकारो के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। अतः वे फर्म के विरूद्ध वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।


पंजीयन के लाभ


फर्म के पंजीयन हो जाने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:


1. फर्म को लाभ - फर्म का पंजीयन हो जाने से फर्म अदालत में किस अन्य पक्ष के विरूद वाद प्रस्तुत कर सकती है तथा उसका कोई साझेदार भी ऐसा कर सकता है। प्रस्तुत पंजीयन न होने से फर्म को या उसके साझेदारों को यह सुविधा नहीं रहती है।


2. साझेदारों को लाभ फर्म का पंजीयन हो जाने से एक अथवा अधिक साझेदार अपने अधिकार के लिए न्यायालय में फर्म के विरूद्ध अथवा आपस में एक-दूसरे के विरूद्ध या किसी अन्य पक्ष के विरूद्ध प्रस्तुत कर सकते हैं।


3. ऋणदाताओं को लाभ फर्म का पंजीयन होने से फर्म के ऋणदाताओंका हित सुरक्षित रहता है। कोई भी साझेदार जिसका नाम रजिस्टर ऑफ फर्म्स में लिखा हुआ है, यह कहकर अपने उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हो सकता है कि वह अब साझेदार नहीं है। ऋणदाता किसी भी साझेदार के प्रति जिसका नाम उस रजिस्टर में लिखा हुआ हैं, वाद प्रस्तुत करके अपना धन वसूल कर सकता है।


4. प्रवेश करनेवाले साझेदार को लाभ साझेदारी फर्म में प्रवेश करनेवाला साझेदार रजिस्टर्ड फर्म में अपने अधिकारों के लिए लड़ सकता है किंतु फर्म का पंजीयन न होने पर उसे दूसरे साझेदारोंकी ईमानदारी पर निर्भर रहना पड़ता है।


5. पृथक होने वाले साझेदार को लाभ - पृथक होनेवाला साझेदार अपने अलग होने की सूचना फर्म के रजिस्ट्रार को सार्वजनिक सूचना देकर अलग होने की तिथि से फर्म के किसी कार्य के लिए उत्तरदायी नहीं होता।


अतः व्यावसायिक गतिविधियों को सफलतापूर्वक चलाने के लिए प्रत्येक फर्म के लिए यह परम आवश्यक है कि वह अपना पंजीयन करा ले।