ब्रांड पहचान के प्रयोजन - Brand Identity Purposes

ब्रांड पहचान के प्रयोजन - Brand Identity Purposes


उत्पादक अपनी एक पहचान व्यापार में बनता है तो उसके पीछे उत्पादक के साथ उपभोक्ता के खास प्रयोजन होते है जो निम्नलिखित तरीके से विस्तृत किये है-


१. उत्पादक प्रति प्रयोजन :- उत्पादक अपने उत्पको को ब्राण्ड में प्रस्थापित करके अपने अलग अलग प्रयोजन सार्थ करता है, जिसमे उत्पादक अपने उत्पाद या सेवावो को उपभोक्ता में मानस में स्थिर करता है साथ ही अपने उत्पाद को भीड़ भरी बाजार में अलग रूप में स्थापित करता है, एक उत्पादक जब कोई ब्राण्ड पहचान बनता है तो अलग अलग रूप में जैसे एक व्यक्ति, एक संगठन, या एक प्रतिक के रूप में दर्शाता है जिसका सीधा फायदा संघठनो के लक्ष्यों को बढ़ावा देने के साथ उसका लक्ष पाने में होता है


२. उपभोक्ता प्रति प्रयोजन :- उपभोक्ता जब कीई ब्राण्ड से नाता जोड़ता है तो उपभोक्ता अपनी जरुरतो को अपने पसंद के हिसाब से पूरा होते देखता है, ब्रांडिंग पहचान से उपभोता अपने अपने प्रयोजन सार्थ करता है, जिसमे एक वस्तु या सेवाए उपभोक के उपभोक्ता ब्राण्ड या सीधे सगठन नाता जोड़ कर गुणवत्ता, प्रदर्शन, मात्रा, स्थायित्व, अदि के बारे में भावनात्मक समाधान का लाभ लेता है। 


३. ब्राण्ड प्रति प्रयोजन :- ब्राण्ड खुद की पहचान बनाने के बाद खुद के प्रयोजन सार्थ करता है, ब्राण्ड पहचान रूप में अपना व्यतिव्य, संगती दुसरे से भेदभाव, जागरूकता, खुद की निष्ठा बाजार में प्रस्थापित करता है ।