ब्रांड की पहचान - brand identity
ब्रांड की पहचान - brand identity
आज व्यापार में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के कारण लाखो उत्पादन बाजार में अपनी अपनी जगह मजबूत करके खड़े है, उस कारण उपभोक्ता अपनी पसंदिता सेवा या वस्तु बाजार में पहचानता है। ब्राण्ड की पहचान उपभोक्ता के मानस में कंपनी के मौलिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है। यह ब्रांड निर्माण के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। विपणन विशेषज्ञ अपने रचनात्मक डिजाइन, तकनीकों के माध्यम से उपभोक्ता के मानस में प्रभावी अद्वितीय और पहचान योग्य ब्रांड पहचान पैदा करते हैं।
ब्राण्ड पहचान की अलग अलग परिभाषा दी गई है जो निन्मलिखित है ।
"A unique set of brand associations that the brand strategist aspires to create or maintain. These associations represent what the brand stands for and imply a promise to customers from organization members."
( Aaker, २००२ ६८)
' ब्राण्ड पहचान ब्रांड संघों की एक अनोखी रणनीति है जो ब्राण्ड को प्रस्तापित " करके या बनाए रखने की आकांक्षा है। ब्राण्ड संघटनो को उपभोक्ता के प्रति एक वादे का प्रतिनिधित्व करते हैं। ". (Aaker, २००२ ६८ )
साथ ही ब्रांड की पहचान कार्यात्मक, भावनात्मक, या स्वयं अर्थपूर्ण लाभ से जुड़े एक मूल्य प्रस्ताव उत्पन्न करके ब्रांड और ग्राहक के बीच एक संबंध स्थापित करने में मदद करता है।
ये ब्राण्ड पहचान ही है जो उपभोक्ता को अपने ब्राण्ड को प्रति एक समता बनाने में विख्यात है, ब्राण्ड पहचान को ब्राण्ड व्यवस्तापन का मूल मन गया। उदाहरन हेतु आप फेयर एंड लवली को ले सकते है जैसे फेयर एंड लवली यह उत्पाद केवल गोरे पण के लिए बना है, और इसके इस्तेमाल से आप के चहरे पे एक निखार आता है, जब कभी भी उपभोक्ता ऐसें उत्पाद के लिए सोचेगा तो उसे फेयर एंड लवली उत्पाद का नाम उसके मानस में आयेगा क्योकि उस तरह की ब्राण्ड पहचान उपभोक्ता में मानस में बनी है और ये पहचान उसे अपने ब्राण्ड खरीत दरी को बढ़ावा देते है ।
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