पूंजी बाजार , आयात निर्यात व्यापार का विकास - Capital market, development of import-export business
पूंजी बाजार , आयात निर्यात व्यापार का विकास - Capital market, development of import-export business
पूंजी बाजार भारतीय वित्तीय प्रणाली का सर्वाधिक महत्वपूर्ण खंड है। यह कंपनियों को उपलब्ध एक ऐसा बाजार है जो उनकी दीर्घावधिक निधियों की जरूरतों को पूरा करता है। यह निधियां उधार लेने और उधार देने की सभी सुविधाओं और संस्थागत व्यवस्थाओं से संबंधित है। अन्य शब्दों में यह दीर्घावधि निवेश करने के प्रयोजनों के लिए मुद्रा पूंजी जुटाने के कार्य से जुड़ा है।
आयात निर्यात व्यापार का विकास
आयात का अर्थ है भारत के बाहर माल भारत में लाना। दूसरे शब्दों में इसका संबंध ऐसे माल से है जो विदेशी उत्पादको द्वारा विदेशों में उत्पादित होते है। भारत में निर्यात और आयात का विनियमन व्यापार अधिनियम 1992 द्वारा होता है
जो आयात और निर्यात अधिनियम 1947 को प्रतिस्थापित किया है और भारत सरकार को इसे नियंत्रित करने की बहुत अधिक शक्ति दी है। अधिनियम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है:
• इसने केंद्र सरकार को आयात को सुकर बनाने द्वारा और भारत से निर्यात बढ़ाकर और इससे संबंधित सभी मामलो या आकस्मिक घटनाओं द्वारा विदेशी व्यापार के विकास और विनियमन के लिए प्रावधान करने की शक्ति दी है।
• केंद्र सरकार निर्यात और आयात को निषेध, प्रतिबंध और विनियमित कर सकती है सभी और विशिष्ट मामलों में तथा उनमें छूटे दे सकती है।
• यह केंद्र सरकार को निर्यात और आयत नीति तैयार करने और इसकी घोषणा करने के लिए प्राधिकृत किया है और शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उनमें समय-समय पर संशोधन करने के लिए प्राधिकृत करने के लिए प्राधिकृत किया है।
• यह अधिनियम के प्रयोजन के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा विदेशी व्यापार महानिदेशक की नियुक्ति की व्यवस्था करता है।
• यह केंद्रीय सरकार को निर्यात और आयात नीति तैयार करने एवं नीति क्रियान्वित करने में केंद्र सरकार को परामर्श देगा।
• अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक आयातक और निर्यातक को आयातक निर्यातक कोड नंबर विदेशी व्यापार महानिदेशक से या इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी से प्राप्त करना है।
• महानिदेशक या इसके लिए प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी अधिनियम के अनुसार माल के निर्यात या आयात के लिए जारी लाइसेंस को निलंबित या रद्द कर सकता है। परंतु व लाइसेंसधारक को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद ऐसा करता है।
• विदेशी व्यापार अधिनियम के अतिरिक्त कुछ अन्य कानून हैं जो माल के निर्यात और आयात को नियंत्रित करते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल है -
• चाय अधिनियम, 1953
• कॉफी अधिनियम, 1953
• रबड़ अधिनियम, 1947
• समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1972
• दुश्मन की संपत्तित अधिनियम, 1968
• निर्यात (गुणवता और निरीक्षण) अधिनियम, 1963
• तबाकू बोर्ड अधिनियम, 1975
मुद्रा स्फीति एक गणितीय आकलन पर आधारित अर्थशास्त्रीय अवधारणा हैं जिससे बाजार में मुद्रा का प्रसार व वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि या कमी की गणना की जाती है। उदाहरण के लिए 1990 100 रू. में जितना सामान आता था अगर 2000 में उसे खरीदने के लिए 200 रू. व्यय करने पड़े है तो माना जाएगा कि मुद्रा स्फीति 100 प्रतिशत बढ़ गई। चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी और मुद्रा की कीमत में कमी को वैज्ञानिक ढंग से सूचीबद्ध करना मुद्रा स्फीति का काम होता है इससे ब्याज दरें भी तय होती है।
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