करियर नियोजन की प्रक्रिया - career planning process
करियर नियोजन की प्रक्रिया - career planning process
करियर नियोजन प्रक्रिया के चरण निम्नलिखित है।
1. करियर नियोजन प्रक्रिया के प्रथम चरण में कर्मचारी की व्यक्तिगत कार्य दक्षता का अध्ययन करता है। उनकी कमियों का विश्लेषण कर उन्हें दूर करने का प्रयास करता हैं, उन्हें मार्गदर्शित करना उनकी अभिरुचि जानना और प्रेरित करने का कार्य करता है।
2. करियर नियोजन प्रक्रिया के दूसरे चरण में व्यक्ति (कर्मचारी) के संगठन के अंदर और बाहर करियर विकास के अवसर के लिए मार्गदर्शन करना होता है, ताकि कर्मचारी का काम के प्रति मनोबल बढ़े ।
3. करियर नियोजन प्रक्रिया के तीसरे चरण में संगठन द्वारा व्यक्ति की कुशलता, ज्ञान, योग्यता, व्यक्तिगत दक्षता,
अभिरुचि, अनुभव और प्रशिक्षण की जानकारी रखना आवश्यक होता है। संगठन को व्यक्ति की जरूरतों का विश्लेषण करना चाहिए, ताकि व्यक्ति को समझने और उनकी कार्य दक्षता बढ़ाने में आसानी हो सके और व्यक्ति का संगठन के प्रति भरोसा बना रहे।
4. करियर नियोजन प्रक्रिया का चौथा चरण लक्ष्य निमार्ण है। संगठन में व्यवसाय के निर्माण के आरंभ से लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं, इन लक्ष्यों की रूपरेखा बनाई जाती है और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य किया जाता है। अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरा प्रयत्न किया जाता है। यह लक्ष्य कभी दीर्घकालीन होते हैं तो कभी अल्पकालीन हो सकते हैं।
5. करियर नियोजन का पाँचवा चरण संगठन को अपनी योजनाओं को कार्यवान रूप देना होता है और योजना को विकसित करना है, ताकि समय के साथ चल सके और नई नई चुनौतियों का सामना अच्छे ढंग से कर सके। प्रतिस्पर्धा में अपने आपको उभार सके और परिवर्तन को अपना सके।
6. करियर नियोजन का छठवाँ चरण यह होता है कि व्यक्ति अपनी योजना का निर्माण करे और क्रियान्वयन करने के लिए संसाधन जुटाए तथा लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर होने के लिए रास्ते में आने वाली कठिनाईयों को समझ कर संतुलन बना सके और साथ ही सावधानी भी बरते।
7. करियर नियोजन के सातवें चरण में संगठन और कर्मचारियों की लगातार बदलती आवश्यकता अनुसार निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। कर्मचारियों की करियर गतिविधियों का रिकार्ड रखना चाहिए और समय पर गणना की जानी चाहिए।
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