छोटे पैमाने के जीवित रहने के कारण - Causes of Survival of Small Scale Industries
छोटे पैमाने के जीवित रहने के कारण - Causes of Survival of Small Scale Industries
औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात् बड़े उद्योगों का निरन्तर विस्तार हुआ है, क्योंकि बड़े उद्योगों की स्थापना के अनेक लाभ है फिर भी छोटे पैमाने के उद्योग जीवित हैं तथा फल-फूल रहे हैं। यह तथ्य हमें यह बताता है कि छोटे उद्योगों में कुछ ऐसी विशेषताएँ तथा गुण है जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में तो सदैव ही छोटे उद्यागों का ही वर्चस्व रहेगा। अब हम उन परिस्थितियों का उल्लेख करेंगे जो छोटे उद्योगों में जीवित रखने तथा बढ़ने में सहायक हैं।
(1) एक व्यवसाय विशेष की प्रकृति निम्न व्यवसाय की प्रकृति ही ऐसी है जिनमें केवल लघु उद्योग ही सफल हो सकते हैं, जैसे
(a) ग्राहकों की व्यक्तिगत रूचि को सन्तुष्ट करना ।
(b) कलात्मक प्रकृति का उत्पादन करने वाले उद्योग।
(c) ऐसे उद्योग जहाँ स्वचालित मशीनों की सम्भावनाएँ कम हो।
(d) मरम्मत का कार्य ।
(2) सरकार द्वारा प्रोत्साहन छोटे उद्योग समाजवादी सिद्धान्तों के अनुकुल हैं, छोटे उद्योगों द्वारा आर्थिक सत्ता का विकेन्द्रीयकरण होता है और धन का समान वितरण सम्भव है।
छोटे उद्योगों से निम्न लाभ होने के कारण सरकार छोटे उद्योगों को सहायता एवं प्रोत्साहन देती है-
i. कारखाना प्रणाली के दोष समाप्त हो जाते हैं।
ii. वर्ग संघर्श की सम्भावना समाप्त
Iii. आय एवं धन का समान वितरण सम्भव ।
iv. प्रदेश का सन्तुलित आर्थिक विकास सम्भव
V. रोजगार के अधिक अवसर।
vi. क्षेत्रीय विशमता न्यूनतम
vii. विकेन्द्रीयकरण सुविधाजनक।
viii. उत्पादन एवं विनियोग की समयावधि कम होती है।
(3) प्रबन्ध सुविधाजनक - छोटे उद्योगों का प्रबन्ध सुविधाजनक है, क्योंकि
(a) स्वामी एवं श्रमिक में निकट का सम्बन्ध
(b) विभिन्न क्रियाओं में सहज समन्वय
(c) शीघ्र निर्णय सम्भव ।
(d) सूक्ष्म निरीक्षण सम्भव ।
(e) अपव्यय की सम्भावना नहीं।
(4) मानव शक्ति का सदुपयोग सम्भव - लघु उद्योगों में अधिकांश क्रियायें मानव द्वारा ही संचालित होती है, अतः अधिक मानव शक्ति का प्रयोग हो सकता है भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ बेरोजगारी बहुत अधिक है, लघु उद्योग द्वारा रोजगार सम्भव है।
(5) सीमित माँग वाली वस्तुओं के निर्माण के लिए उपयुक्त ऐसी वस्तुएँ जिनकी माँग बहुत कम होती है अथवा माँग में परिवर्तन आता रहता है, उनके निर्माण के लिए लघु उद्योग ही श्रेष्ठहै।
(6) स्वाभिमानी एवं स्वतन्त्रता - प्रेमी कर्मचारियों के लिए उपयुक्त बड़े उद्योगों में समस्त क्रियायें यन्त्रवत् होती हैं, अतः स्वाभिमानी एवं स्वतंत्रता प्रेमी कर्मचारी कार्य नहीं कर सकते हैं। ऐसे श्रमिक अपना स्वयं का लघु उद्योग स्थापित कर सकते हैं।
(7) उद्योग में लोच बनी रहती है-लघु उद्योग में लोच का गुण होता है, अतः माँग के अनुसार उत्पादन में परिवर्तन करके लोच को बनाये रखा जा सकता है जिससे संस्था के व्यापारिक उतार-चढ़ाव से अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
(8) ग्राहकों से व्यक्तिगत सम्पर्क सम्भव-लघु उद्योग के स्वामी ही विक्रय का प्रबन्ध करते हैं तथा ग्राहक से प्रत्यक्ष व्यक्तिगत सम्पर्क में रहते है
जिससे उनकी माँग के उनुरूप उत्पादन आसानी से किया जा सकता है।
(9) शीघ्र निण्रय सम्भव - लघु उद्योग में स्वामी ही प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत रहता है अतः वह परिस्थितियों के अनुरूप तुरन्त निर्णय ले सकता है जिससे उसके निर्णय सत्यता के अधिक अनुकुल होते हैं और परिणाम यह होता है कि संस्था अपने लाभ को सरलता से अधिकतम कर सकती है।
(10) छोटी-छोटी कुशल मशीनों का आविश्कार सम्भव - लघु उद्योगों में छोटी-छोटी तथा कुशल मशीन जो मानव श्रम एवं कठिन कार्यों को आसान बना सकती है।
अससे वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति का लाभ जन सामान्य तक आसानी से पहुँच सकता है।
(11) यातायात लागत में बचत सम्भव-लघु उद्योग बाजार के निकट स्थापित होते हैं तथा सम्पूर्ण देश में फैले होते हैं अतः संस्था की यातायात लागत कम आती है। लघु उद्योगों में कच्चे माल के कय तथा निर्मित माल के विक्रय की व्यवस्था आस-पास के क्षेत्र में ही हो जाती है।
(12) शीघ्र नश्ट होने वाली वस्तुओं के उत्पादन के लिए उपयुक्त - शीघ्र नश्ट होने वाली वस्तुओं का उत्पादन लघु उद्योगों द्वारा ही सम्भव है क्योंकि उनका शीघ्र विक्रय भी सम्भव है अन्यथा उनके गुणधर्म में कमी आ सकती है।
B. बड़े पैमाने पर उत्पादन
(Large Scale Production)
वर्तमान समय में उत्पादन बड़े-बड़े कल-कारखानों द्वारा किया जाता है। जहाँ हतारों सुसंगठित श्रमिक बड़ी-बड़ी मशीनों द्वारा, देश-विदेश से प्राप्त कच्चे माल का बहुत बड़ी मात्रा में प्रयोग करके उत्पादन करते हैं। उत्पादन के इसी स्वरूप को वृहद् या बड़े पैमाने का उत्पादन कहा जाता है। बड़े पैमाने के उत्पादन में आधुनिकतम स्वचालित मशीनों का प्रयोग होता है, अधिक मात्रा में उत्पादन किया जाता है श्रम विभाजन की वैज्ञानिक विधि का प्रयोग किया जाता है। जब किसी इकाई में उत्पादन के सभी साधनों का बड़े पैमाने पर प्रयोग होता हैं, बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है तथा बड़ी मात्रा में विक्रय होता है तो इसे ही बड़े पैमाने का उत्पादन कहते हैं।
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