वस्तु - विक्रय अनुबंध के लक्षण - Characteristics of the Merchandise Agreement

वस्तु - विक्रय अनुबंध के लक्षण - Characteristics of the Merchandise Agreement


एक वस्तु विक्रय अनुबंध में निम्नलिखित लक्षण होते हैं


1. क्रेता तथा विक्रेता का होना :- वस्तु-विक्रय अनुबंध के लिए दो पक्षकारों का होना आवश्यक है। इनमें एक क्रेता तथा दूसरा विक्रेता होना चाहिए। बिना इन दोनों के विक्रय अनुबंध का निर्माण नहीं हो सकता।


2. माल का होना : वस्तु-विक्रय अधिनियम की धारा ( 7 ) में माल को परिभाषित किया गया है। विक्रय अनुबंध में माल का विशेष महत्व है, क्योंकि माल के बिना अनुबंध नहीं हो सकता है। माल का आशय चल सम्पत्ति से है।


3. मूल्य का होना :- माल का विक्रय सदैव मूल्य के बदले में होना चाहिए मूल्य का अभिप्राय प्रतिफल से है

और वह सदैव मुद्रा के रूप में ही होना चाहिए। यदि मुद्रा के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु के रूप में प्रतिफल चुकाया जाये, तो इसे विक्रय नहीं वरन् वस्तु विनियम कहेंगे।


4. स्वामित्व का हस्तांतरण : वस्तु विक्रय के अनुबंध में स्वामित्व का हस्तांतरण एक निश्चित प्रक्रिया द्वारा होना आवश्यक है। जिसने माल बेचा है, उसे मूल्य के बदले खरीददार के उस माल का मालिकाना हक भी प्रदान करना चाहिए। माल के स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए, की भौतिक सुपुर्दगी आवश्यक नहीं होती है।


5. चल संपत्ति :- माल के विक्रय में सदैव चल संपत्ति का ही विक्रय होता है, अतएव इस अधिनियम के अंतर्गत अचल संपत्ति का विक्रय नहीं किया जा सकता है।


6. वैध अनुबंध के गुण :- विक्रय का अनुबंध एक अनुबंध होने के कारण ऐसी सभी लक्षणों की शर्त पूरी करता है जो एक वैध अनुबंध के होते हैं।


7. शर्त-सहित अथवा शर्त-रहित: वस्तु-विक्रय अनुबंध शर्त-रहित अथवा शर्त सहित दोनों में से किसी भी प्रकार का हो सकता है।


8. स्पष्ट अथवा गर्भित :- वस्तु-विक्रय अनुबंध स्पष्ट अथवा गर्भित हो सकता है। स्पष्टतः अनुबंध मौखिक अथवा लिखित हो सकता है। इस प्रकार इनमें से किसी एक या अन्य लक्षण के अभाव में विक्रय का अनुबंध पूर्ण नहीं हो सकता है। अतः एक वैध वस्तु-विक्रय अनुबंध के लिए इन सभी तत्वों का होना आवश्यक होता है।