आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार एक तुलना - A comparison of internal and international trade

आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार एक तुलना - A comparison of internal and international trade


(i) विशिष्टीकरण आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार का आधार विशिष्टीकरण है जो श्रम विभाजन का परिणाम है एक देश में जब एक राज्य किसी वस्तु के उत्पादन में विशिष्टीकरण पा जाता है तो देश में अन्य राज्य उस वस्तु का उत्पादन न करके उसी राज्य से उस वस्तु को खरीद लेते हैं। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र तथा गुजरात ने कपड़े तथा चीनी में और पंजाब ने होजरी में विशिष्टीकरण प्राप्त कर लिया है। इन प्रदेशों से कपड़ा चीनी. तथा होजरी अन्य प्रदेशों में जाती है। इसी प्रकार विभिन्न देश जब किसी वस्तु के उत्पादन में विशिष्टीकरण प्राप्त कर लेते हैं तो वहाँ से वह वस्तु अन्य देशा में जाने लगती है। उदाहरण के लिए, बांग्लादेश ने पटसन की वस्तुओं में तथा अमेरिका में मशीनों में विशिष्टीकरण प्राप्त कर लिया है। इसलिए अमेरिका मशीनों का तथा बांग्लादेश पटसन की वस्तुओं का निर्यात करता है।


(ii) लागत आतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों का उद्देश्य कम लागत पर वस्तुओं का उत्पादन करना है। एक देश में जिस स्थान पर कुछ वस्तुओं की उत्पादन लागत कम होती है वहाँ से वे वस्तुएँ दूसरे स्थान पर जाती है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में चावल और मछली की उत्पादन लागत तुलनात्मक रूप से कम है। इसलिए आन्ध्र प्रदेश इन दोनों वस्तुओं का उत्पादन करता है और देश के अन्य भागों में भेजता है। इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार में जिस देश में वस्तु की उत्पादन लागत कम होती है अन्य देश वहां से उस वस्तु का आयात करते हैं। इस प्रकार आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों का ही उद्देश्य कम मूल्य पर अधिकतम उत्पादन करना है। 


(iii) विनिमय दोनों प्रकार के व्यापारों का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का परस्पर लेन-देन का विनिमय करना है। विनिमय का उद्देश्य उन वस्तुओं के बदले में जो किसी स्थान पर अधिक मात्रा में पाई जाती है

उन वस्तुओं को प्राप्त करना है, जो उस स्थान पर कम मात्रा में होती है या बिल्कुल नही होती। इसलिए यह कहा जाता है कि आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों का ही उद्देश्य विनिमय है। 


(iv) लाभ आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों में ही उत्पादक का उद्देश्य लाभ कमाना होता है आंतरिक व्यापार में एक उत्पादक अपनी वस्तुओं को 2 वहां बेचना चाहता है जहा से अधिक लाभ प्राप्त हो सके। इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी एक देश का उत्पादक उन देशों में अपनी वस्तु का निर्यात करेगा जहां पर वस्तुए अधिक महंगी हो जिससे उसे अधिक लाभ प्राप्त हो सके।


(v) पारस्परिक सहयोग आंतरिक व्यापार में व्यापारियों का एक राज्य से दूसरे राज्य में आना-जाना होता रहता है,

इस प्रकार उनमें घनिष्ठ संबंध स्थापित हो जाते हैं जिससे सहयोग की भावना उत्पन्न हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी आर्थिक संबंध स्थापित होने के पश्चात् विभिन्न देशों में सामाजिक तथा राजनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ जाता है।


(vi) ऐच्छिक सौदे: दोनों प्रकार के व्यापार में होने वाले सौदे लोगों की इच्छा पर निर्भर करते हैं। किसी देश की सरकार आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संबंध में देश के लोगों को किसी वस्तु विशेष को खरीदने या बेचने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।


(vii) उपभोक्ता की प्रमुत्ता आतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार दोनों में ही उत्पादक, उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए वस्तुओं का निर्माण करते हैं। उपभोक्ता जिन वस्तुओं को अधिक पसन्द करते हैं उन्हीं वस्तुओं में आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार अधिक होता है। उपर्युक्त समानता के बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते है कि आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई मौलिक अंतर नहीं है। इसलिए ओहलिन के अनुसार, "अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक विशिष्ट रूप मात्र है।"