वैश्वीकरण के विकास के घटक - components of globalization

वैश्वीकरण के विकास के घटक - components of globalization


(क) उदारीकरण:


उदारीकरण से तात्पर्य व्यावसायिक इकाईयों पर लगे अनावश्यक प्रतिबंधों व नियंत्रणों को सरकार द्वारा कम करने से है। इसके अंतर्गत कार्यविधियों को सरल बनाया जाता है तथा प्रशासनिक बाधाओं को कम किया जाता है। इसमें औद्योगिक लाइसेंसिंग, उत्पादों पर कीमत नियंत्रण आयात लाइसेस, विदेशी गुदा नियंत्रण आदि को उदार बनाया जाता है। इसमें बड़े व्यावसायिक घरानों पर लगे प्रतिबंधों को कम किया जाता है विदेशी व्यापार पर लगे टैरिफ व गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर किया जाता है, विदेशी निवेश के अंतप्रवाह व बाहरी प्रवाह पर लगे प्रतिबंधों को कम किया जाता है। इसी तरह विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित उदार नीति से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश को बढ़ावा मिलता है। इन सबसे वैश्वीकरण को बढ़ावा मिलता है।


(ख) बहुपक्षीय व्यापार समझौते


पहले विदेशी व्यापार द्विपक्षीय व्यापार समझौतो द्वारा किया जाता था।

ये व्यापार समझौते दो देशों के मध्य होते थे पस्तु अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं. जैसे - विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुदा कोप युकटाड आदि के विकास से बहुपक्षीय व्यापार समझौते बहुत से देशों के मध्य किए जाते हैं। इससे विभिन्न देशों की परस्पर निर्भरता बढ़ गई है तथा वे एक दूसरे के बहुत पास आ गए है। बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के बिना वैश्वीकरण समय ही नहीं था। वर्ष 2012 में 155 देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य थे। डब्लयू टी ओ के मंच पर हुए बहुपक्षीय व्यापार समझौते एक साथ 155 देशों पर लागू होते हैं।


(ग) बहुपक्षीय निवेश समझौता:


बहुपक्षीय निवेश समझौते में विश्व के कई देश विदेशी निवेश के अंतरप्रवाह व बाहरी प्रवाह पर लगे प्रतिबंधों को हटाते हैं। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को विभिन्न देशों में अपना व्यवसाय फैलाने का अवसर मिलता है ट्रिम्स, विश्व व्यापार संगठन के मंच पर बहुपक्षीय निवेश समझौते का एक उदाहरण है।

इन साधनों के अभाव में व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर फैलाया नहीं जा सकता।


(घ) पर्याप्त साधन:


व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर फैलाने के लिए यह अति आवश्यक है कि व्यावसायिक इकाई के पास पर्याप्त मात्रा में वित्तीय साधन प्रबंधकीय साधन, तकनीकी विशिष्टता, उद्यमी योग्यताएं कुशल मानवीय संसाधन आदि हो इन साधनों के अभाव में व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर फैलाया नहीं जा सकता। जिस व्यावसायिक इकाई की उत्पादन लागत, उत्पाद की क्वालिटी विपणन कौशलता, ब्राण्ड छवि आदि अन्य व्यावसायिक इकाईयों की तुलना में अधिक


(ङ) तुलनात्मक लाभ:


बेहतर है, ऐसी व्यावसायिक इकाई के लिए अपनी व्यावसायिक कियाओं को वैश्विक पर स्तर ले जाने की संभावना तुलनात्मक रूप से अधिक होती है।

यह तुलनात्मक श्रेष्ठता उच्च क्वालिटी के कच्चे माल की पर्याप्त पूर्ति, सस्ते व कुशल श्रम की पर्याप्त उपलब्धता, तकनीकी श्रेष्ठता आदि के कारण हो सकती है जैसे भारत में रत्नाभूषण उद्योग के लिए योग्य श्रमिक लागत उपलब्ध है, जिससे रत्नाभूषण बनाने की उत्पादन लागत कम पड़ती है। इससे भारत का रत्नाभूषण उद्योग विश्व स्तर पर उभर पाया है।


(च) परिवहन में सुधार:


पिछले कुछ वर्षों में परिवहन टेक्नोलॉजी में बहुत सुधार हुआ है। हवाई परिवहन व्यवस्था में सुधार व बंदरगाहों के विकास से अब उत्पादों को बहुत दूर स्थानों तक कम दरों पर ले जाना बहुत सरल हो गया है कन्टेनर ट्रांसपोर्टेशन विकास से विदेशी व्यापार बहुत बढ़ गया है। इससे विभिन्न देशों के बाजारों का एकीकरण हो गया है।


(छ) सूचना व संचार तकनीक में सुधार


पिछले कुछ वर्षों में सूचना व संचार तकनीक में बहुत सुधार हुआ है। दूरसंचार, इंटरनेट कंप्यूटरों आदि के विकास से विभिन्न देशों में सूचनाओं का आदान-प्रदान बहुत सरल हो गया है। अब मोबाइल फोन, फैक्स, ई-मेल आदि बहुत प्रचलित हो गए है। इनके परिणामस्वरूप व्यवसाय की विभिन्न कियाओं को विभिन्न देशों में करवाना बहुत सरल हो गया है। इससे वैश्वीकरण को बढ़ावा मिला है।


(ज) अन्य देशों का अनुभव:


पिछले दो या तीन दशको में केंद्रीय नियोजित अर्थव्यवस्थाएं जैसे रूस, पूर्वी यूरोप पूर्वी जर्मनी आदि आर्थिक मंच पर असफल हुई है। ये देश वैश्वीकरण की प्रक्रिया को अपनाने में इच्छुक नहीं थे। इसके विपरीत, कुछ विकासशील देशों, जैसे- कोरिया, थाईलैंड, हागकाग,

सिंगापुर आदि ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को अपना कर आर्थिक सफलतायों की ऊँचाइयों को छू लिया है। चीन ने वैश्वीकरण के रास्ते को अपना कर आर्थिक विकास की ऊँची दर प्राप्त कर ली है। वैश्वीकरण के कारण इन देशों को सफलता से प्रेरित होकर भारत व अन्य विकासशील देशों ने भी वैश्वीकरण को अपना लिया है।


(झ) निगमित संगठनों का विकास:


निगमित संगठनों के विकास से वैश्वीकरण को बढ़ावा मिला है। विदेशी निवेशक कंपनियों के अंश खरीद कर सरलता से अपनी निवेश राशि अन्य देशों में निवेश कर सकते हैं। प्रतिभूति बाजार से अशों को खरीद कर व बेचकर विदेशी निवेशक निवेश की राशि को बढ़ा या घटा सकते हैं।


(ञ) उच्च क्वालिटी की आधारभूत सुविधाएं


वैश्वीकरण के लिए उच्च क्वालिटी की आधारभूत सुविधाओं का होना बहुत अनिवार्य है। आधारभूत सुविधाओं में ऊर्जा की पर्याप्त पूर्ति, यातायात सुविधाएँ बंदरगाह संबंधी सुविधाएँ, वेयरहाउसिंग, बँकिंग, संचार, सुदृढ पूजी बाजार आदि संबंधी सुविधाएँ शामिल हैं। यदि किसी देश में अच्छी क्वालिटी की आधारभूत सुविधाए उपलब्ध है तो इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उस देश की ओर अपना व्यवसाय फैलाने के लिए आकर्षित होती है।


(ट) विश्व स्तर पर स्वीकृत मुद्रा


वैश्वीकरण के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत मुद्रा का होना बहुत अनिवार्य है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतानों में सहायता मिलती है तथा अंतरराष्ट्रीय तरलता बढ़ती है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोप ने पांच देशों की करेसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतानों के लिए मंजूरी दी है। ये पांच करोसिया इस प्रकार है: अमेरिकन डॉलर, ब्रिटिश पौंड, फास का फेंक, जर्मन का डयूच मार्क और जापान का येन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोप ने अंतरराष्ट्रीय भुगतानों में सुविधा य तरलता को बढ़ती के लिए विशेष आहरण अधिकार भी जारी किए हैं।


(ठ) वैश्विक दृष्टिकोण व सोच


व्यावसायिक इकाइयों की सोच व दृष्टिकोण वैश्विक स्तर का होना चाहिए व्यावसायिक इकाईयों के प्रवर्तकों में व्यवसाय को विश्व स्तर पर फैलाने की तीव्र इच्छा, जोखिम उठाने की क्षमता, सकारात्मक सोच, व्यापक दृष्टिकोण होना चाहिए। उन्हें वैश्वीकरण की रणनीतियों का ज्ञान होना चाहिए तथा उन्हें इसके लिए भरसक प्रयत्न करने चाहिए।