अंतरराष्ट्रीय वातावरण के घटक या प्रकार - Components or types of international environment

अंतरराष्ट्रीय वातावरण के घटक या प्रकार - Components or types of international environment


(क) आर्थिक वातावरण


अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक वातावरण के एक घटक के रूप में आर्थिक वातावरण में विभिन्न आर्थिक घटकों, जैसे-आर्थिक दशाओं, आर्थिक नीतियों, आर्थिक व्यवस्था, व्यापार चक्र की अवस्था, विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय संगठन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों आदि को शामिल किया जाता है। आर्थिक वातावरण, अंतरराष्ट्रीय वातावरण के अन्य सभी घटकों में से महत्वपूर्ण है। यह बहुत गतिशील होता है और विभिन्न देशों की सरकारी नीतियों व राजनीतिक दशाओं में आए बदलाव के साथ बदलता रहता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगी व्यावसायिक इकाई न केवल अपने घरेलू देश के आर्थिक वातावरण से ही प्रभावित होती है, बल्कि साथ-साथ ऐसे देश के आर्थिक वातावरण से भी प्रभावित होती है जिसके साथ यह इकाई आयात या निर्यात कर रही है। इसके अलावा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संगठन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए व इसका नियमन करने के लिये समय-समय पर विभिन्न नीतिया, नियम व निर्देश निर्धारित करते है।

एक व्यापारिक इकाई को इन नियमों व निर्देशों की भी जानकारी होनी आवश्यक है महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संगठन इस प्रकार है अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, विश्व व्यापार संगठन, अंकटाड आदि। आजकल अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न व्यापारिक समझौते किये जाते है। हाल के कुछ वर्षो में लगभग सभी विकासशील देशों में विदेशी पूजी के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक हुआ है। अर्थात अब ये देश विदेशी पूजी को आकर्षित करने लगे हैं। आजकल विकासशील देशों की बहुत सी कंपनिया अमेरिका, इंग्लैंड, जापान जैसे देशों के पूंजी बाजारों से धन एकत्रित कर रही है। आजकल विश्व व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, यह विभिन्न देशों में सकारात्मक आर्थिक वातावरण का सूचक है। संक्षेप में, आर्थिक वातावरण में निम्न को शामिल किया जा सकता है।


(i) घरेलु देश का आर्थिक वातावरण 


(ii) जिसे देश के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया जाता है, उस देश का आर्थिक वातावरण


(iii) अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा बनाए गए नियम


(iv) अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते


(v) विदेशी निवेश के प्रति दृष्टिकोण (vi) व्यापार चक्र की अवस्था


(vii) विभिन्न देशो की आर्थिक नीतिया आदि । 


(ख) राजनीतिक वातावरण


राजनीतिक वातावरण का व्यवसाय पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक वातावरण के संबंध में राजनीतिक वातावरण में निम्न शामिल है (1) विदेशी निवेश, कोटा, टैरिफ (सीमा शुल्क), एम.एन.सी. की कार्यप्रणाली, मुल्य नियंत्रण, उदारीकरण, वैश्वीकरण, निजिकरण आदि के बारे में सरकार का राजनीतिक दृष्टिकोण 


(2) देश में राजनीतिक स्थिरता ।


एम.एन.सी. के संदर्भ में राजनीतिक वातावरण तीन तरह का हो सकता है-


(i) उस देश का वातावरण जहां एम. एन. सी. कार्यरत है. प्राय: अल्पविकसित देश विदेशी कंपनियों को और विदेशी पूंजी को अविश्वास की नजर से देखते हैं। कई बार अल्पविकसित देश आरोप लगाते है कि एम एन सी विदेशों में प्रत्यावर्तन कर रही है, आदि । परंतु अब बहुत से देशों ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिये बहुत से व्यापारिक प्रोत्साहन व रियायतें देनी शुरू कर दी है।


(ii) उस विदेशी देश का वातावरण जहां MNC का आधार है उस देश का राजनीतिक वातावरण भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रभावित करता है जहाँ MNCs का आधार है। मूल देश की सरकार का MNC के प्रति दृष्टिकोण भी MNCs को प्रभावित करता है। 


(iii) अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक वातावरण: अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक वातावरण बहुत तेजी से बदल रहा है। इसमें होने वाले बदलाव किसी देश की आर्थिक नीतियों को भी प्रभावित करते हैं, जैसे- USSR का विभाजन अमेरिका इराक युद्ध, विश्व व्यापार केंद्र पर हमला, मध्य पूर्वी देशों में राजनीतिक तनाव, विश्व व्यापार संगठन की बदलती नीतियों, आदि ने विभिन्न देशों के घरेलू वातावरण को प्रभावित किया है इन अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है। कुछ प्रभावशाली देशों जैसे USA UK विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों की नीतियों को प्रभावित करते हैं। संक्षेप में, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय घटनाएं राजनीतिक वातावरण को प्रभावित करती है।


(ग) कानूनी वातावरण


अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक वातावरण के संदर्भ में कानूनी वातावरण से अभिप्राय विभिन्न नियमों, नीतियों व कानूनों से है, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों या विदेशी व्यापार को प्रभावित करते हैं।

ये कानून उस देश की सरकार द्वारा बनाये जाते है, जहां MNC कार्यरत है या उस देश की सरकार द्वारा बनाये जा सकते है जहाँ MNC का आधार है या विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा बनाये जा सकते हैं। विदेशी व्यापार को घरेलू देश द्वारा बनाये नियमों से दूसरे देशों द्वारा बनाये नियमों से तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा बनाए गए नियमों से नियमित किया जाता है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे-WTO, UNCTAD, ASEAN, SAARC आदि द्वारा विदेशी व्यापार से संबधित विभिन्न नियम बनाए गए हैं। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित विवादों को निपटाने के लिये कुछ अन्य महत्वपूर्ण संगठन जैसे इंटरनेशनल कोर्ट, संयुक्त राष्ट्र संघ आदि द्वारा नियम बनाए गए है। समय समय पर विदेशी व्यापार को ऐच्छित दिशा में निर्देशित करने के लिये विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक समझौते किए जाते हैं ये समझौते कुछ देशों के मध्य, पडोसी देशों के साथ, विभिन्न विकासशील देशों के बीच या विकसित देशों के बीच हो सकते हैं। इन समझौते में विदेशी व्यापार से संबंधित विभिन्न नियमों पर स्वीकृति या एकरूपता तय की जाती है,

अर्थात व्यापार से संबंधित ऐसी शर्तें जो सभी सदस्य देशों को मान्य हों। इन समझौतों का उद्देश्य विदेशी व्यापार को बढ़ावा व विदेशी व्यापार की रूकावटों को दूर करना है। सदस्य देशों में विदेशी व्यापार से जुडी सभी व्यावसयिक इकाईयों को इन नियमों का पालन करना पडता है। बहुत से विकासशील देशों में विदेशी व्यापार के ऋणात्मक प्रभाव से बचने के लिए व अपने घरेलू उद्यमियों को इस ऋणात्मक प्रभाव से बचाने के लिए कुछ नियम बनाए है जैसे- भारत में विदेशी विनियम प्रबंध अधिनियम भारत में कार्यरत MNCs को नियमित करता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की किस्म, पैकिंग, वातावरण के प्रदूषण, अनुचित व्यापार व्यवहारों को नियमित करने के लिए भी विभिन्न कानून बनाए गये है।


अतः कानूनी वातावरण में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियमित करने के लिये विभिन्न देशों तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा बनाये गये नियमों को शामिल किया जाता है। 


(घ) सामजिक सांस्कृतिक वातावरण


व्यवसाय समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है। व्यवसाय व समाज दोनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। संस्कृति समाज में रह रहे लोगों के सोचने व आपसी व्यवहार के ढंग को प्रभावित करती है। सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण के तत्त्व, जैसे शहरीकरण, पारिवारिक व्यवस्था, धर्म, शिक्षा, आदतें, प्राथमिकताए, भाषा, रीति रिवाज एवं प्रथाएं, व्यावसायिक नीतिशास्त्र, लोगों का विभिन्न व्यवस्थाओं के प्रति दृष्टिकोण आदि, व्यवसाय को प्रभावित करते हैं। ये सामाजिक सांस्कृतिक तत्व विभिन्न देशों में अलग अलग होते हैं।


बहुराष्ट्रीय कंपनियां विभिन्न देशों में व्यवसाय करती है। ये कम्पनियां विभिन्न संस्कृति के लोगों को अपने उत्पाद बेचती है। इन्हें सफलता प्राप्त करने के लिए विभिन्न देशों के सांस्कृतिक व सामाजिक तत्वों का अध्ययन करना पड़ता है, और इसके अनुसार ही अपने उत्पादन, विपणन व विज्ञापन कार्यक्रमों को समायोजित करना पड़ता हैं। इन्हें विभिन्न संस्कृति के लोगों के लिए उत्पाद में कुछ परिवर्तन करने पड़ते है।

जैसे उत्पाद का रंग, पैकिंग, डिजाइन आदि। इसी प्रकार इन्हें विभिन्न देशों के लिए अलग अलग विज्ञापन कार्यक्रम बनाना पड़ता है और विभिन्न देशों के सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर विज्ञापन अपील व विज्ञापन नारों का चयन करना पड़ता है। उदाहरण के लिए भारत में किसी टिकाऊ उत्पाद के विज्ञापन के लिए यह अपील चुनी जा सकती है कि विज्ञापनकर्ता का उत्पाद उपभोक्ता के जीवनसाथी की तरह उसका लंबे समय तक साथ देगा। परंतु यह अपील पश्चिमी देशों में सफल नहीं होगी, क्योंकि वहा वैवाहिक संबंध दीर्घकाल तक नहीं चलते। इसी तरह जूस उत्पाद के विज्ञापन में, भारत में इसे शक्तिवर्धक पेय के रूप में विज्ञापित किया जा सकता है। जबकि अमेरिका में इसे नाश्ते के रूप में विज्ञापित किया जाता है। जब बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कर्मचारियों को विकसित देशों में हस्तांतरित किया जाता है, तो इन्हें सांस्कृतिक झटका लगता है, क्योंकि इन देशों का सांस्कृतिक परिवेश, विकसित देशों की तुलना में बहुत भिन्न होता है। इन कर्मचारियों को अपने आपको इस नए वातावरण में ढालना पड़ता है। इस प्रकार बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को उन सभी देशों के सामाजिक- सांस्कृतिक वातावरण का अध्ययन करना पडता है, जिन स्थानों पर ये व्यवसाय कर रही है। इस जानकारी के बाद ही ये कंपनिया अपने उत्पादों को रणनीतियों को विभिन्न देशो की संस्कृति के अनुसार बना सकती है। 


(ङ) तकनीकी वातावरण


विज्ञान या अन्य व्यवस्थित ज्ञान को व्यावहारिक कार्यों के लिये प्रयोग करने को तकनीक कहते हैं। इसके द्वारा व्यावहारिक कार्य सुव्यवस्थित ढंग से किये जाते है। पिछले 50 वर्षों में तकनीक का बहुत विकास हुआ है। तकनीक के विकास ने बहुत से लोगों के जीवन को बचाया है, मनुष्य के सुख साधनों के लिए बिजली का निर्माण किया हैं, बहूत से कार्यों को मशीनों से सभव बनाया है, तथा मनुष्य के मानसिक कार्यों के लिए कंप्यूटर को खोजा है। तकनीकी ज्ञान में विकास के कारण लोगों की जीवन शैली में परिवर्तन आ गया है। आज का व्यक्ति जिन वस्तुओं का प्रयोग कर रहा है वह पहले उनका प्रयोग नहीं कर रहा था। तकनीकी विकास द्वारा बने कुछ उत्पाद तो समाज के लिये आश्चर्यजनक है, जैसे हृदय शल्य चिकित्सा, किडनी ट्रांसप्लांटेशन, जन्म दर पर नियंत्रण के लिये दवाइयां इत्यादि। तकनीकी ज्ञान की कुछ खोजें संसार के लिये विनाशकारी भी साबित हुई हैं जैसे हाइड्रोजन बम और मिसाइलें बहुत से नये उत्पादों; जैसे -दूर संचार उत्पाद, यातायात, सूचना तकनीक, कंप्यूटर, इंटरनेट ने तो व्यवसाय के प्रबंध को बहुत प्रभावित किया है।


तकनीकी ज्ञान में शोध परिवर्तन व्यावसायिक इकाइयों के लिए समस्या पैदा करती है जो इकाइया तकनीक परिवर्तनों के साथ स्वयं को नहीं ढाल पाती, वह व्यवसाय में ज्यादा देर तक नहीं टिक पाती तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी से प्लांट तथा उत्पाद बहुत शीघ्र ही प्रचलित हो जाते हैं। आज के युग में उत्पादों का जीवन काल बहुत छोटा है। इस कारण केवल वही व्यवसायी अपने व्यापार में विकास कर सकता हैं जो लगातार, नवाचार और अनुसंधान पर ध्यान दे। नवाचार तथा अनुसंधान द्वारा एक व्यवसायी, नये उत्पादो की खोज कर सकता है या अपने वर्तमान उत्पादों की क्वालिटी सुधार सकता है। इससे व्यावसायिक इकाइ अपने बाजार हिस्से में वृद्धि कर सकती है तथा प्रतियोगिता का सामना कर सकती हैं। जापान में तेजी से विकास का कारण वहां के उद्योग द्वारा लगातार नवाचार और अनुसंधान पर जोर देना है। नये उत्पादो तथा उत्पादान के नये तरीकों की रक्षा पेटेन्ट तथा कॉपीराइट से की जा सकती है। इस तरह की पेटेन्ट सुरक्षा से उन उद्योगों को बहुत लाभ होगा जिनमें अधिक नवाचार और अनुसंधान होता है तकनीक के आसान आयात से विकासशील देशों की औद्योगिक कार्यकुशलता में काफी सुधार आता है। अतः व्यावसायिक इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय तकनीक वातावरण में आये परिवर्तनों को विश्लेषित करते रहना चाहिए तथा नई तकनीक को शीघ्रता से अपना लेना चाहिए।


(च) अन्य तत्व - कई बार एक देश में आया संकट विश्व के अन्य देशों को प्रभावित करता है। जैसे 1991 का खाड़ी युद्ध, इराक और अमेरिका के युद्ध। इससे विश्व में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और इसने पूरे विश्व को प्रभावित किया। इस तरह अमेरिका के विश्व व्यापार सेंटर पर हमले ने पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय शांति को प्रभावित किया। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। इसी तरह थाईलैंड में मुद्रा संकट और बैंकों के फेल होने से अन्य देश, जैसे मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपीन्स और कोरिया प्रभावित हुए। सब प्राइम संकट तथा अमेरिका में निवेश बैकों का दिवाला होने से, न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा प्रभाव पडा, बल्कि इससे विश्व भर की अर्थव्यवस्था कुप्रभावित हुई। इस संकट ने वैश्विक वित्तीय संकट का रूप ले लिया। इसी तरह यूरोपियन देशों में आए सार्वजनिक ऋण सकट ने कई देशों की व्यावसायिक इकाइयों को कुप्रभावित किया। ग्रीक, पुर्तगाल, स्पेन, आयरलैंड और इटली इस संकट से अत्यधिक कुप्रभावित हुए थे। इन देशों की साख रेटिंग बहुत गिर गई। इन देशों की सरकारों को राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए ऋण लेने में बहुत कठिनाई हो रही है। इससे वैश्विक निवेशकों के विश्वास को बहुत धक्का लगा है तथा विश्वभर में अनिश्चितता का माहौल बन गया हैं, इससे विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर पर बहुत प्रभाव पड़ा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी एक देश में आए संकट के प्रभाव से बचने के लिए समय पर नीतियों में बदलाव लाना पड़ता है।


अतः यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय वातावरण के बहुत से तत्व व्यवसाय को प्रभावित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय वातावरण में निरंतर परिवर्तन आ रहा हैं बदलते अंतरराष्ट्रीय वातावरण में व्यावसायिक इकाई को, वातावरण के अनुसार समय रहते, अपनी नीतियों में परिवर्तन कर लेना चाहिए।