उपभोक्ता संरक्षण - consumer Protection

उपभोक्ता संरक्षण - consumer Protection


उपभोक्ताओं को कुछ मूलभूत अधिकार प्राप्त है, जैसे- सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चुनाव का अधिकार और उनकी बात सुने जाने का अधिकार। लेकिन क्या उपभोक्ता खरीदारी करते समय इन अधिकारों को याद रखते है ? शायद नहीं। यदि उपभोक्ता इन अधिकारों से परिचित हैं, तो भी विक्रेता प्रायः उनकी स्थिति का लाभ उठाकर उन्हें ऐसी वस्तुओं की आपूर्ति कर देते है जो दोषपूर्ण, हानिकारक और असुरक्षित हैं और जिनसे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है।


यदि एक उपभोक्ता टेलीविजन सेट खरीदता है और उसमें कोई त्रुटि नजर आती है तो वारंटी के दौरान डीलर बिना शुल्क लिये इसे ठीक करता है लेकिन त्रुटि इसके बाद भी बनी रहती है तो अब उपभोक्ता क्या करेगा ?

यदि टेलीविजन सेट की खराबी की वजह से कोई नुकसान होता है तो इसका क्या उपाय है ? उपभोक्ता विक्रेता के पास जा सकता है, हो सकता है कि विक्रेता, उपभोक्ता पर ही दोष मढ़ दे कि उपयोग के दौरान आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई। ऐसे में उपभोक्ता यदि अपने अधिकारों से अवगत नहीं होता है तो उसे हानि की आशंका कहीं ज्यादा होती है।


उपभोक्ता के हित की रक्षा के लिए महसूस किया गया कि वस्तुओं और सेवाओं के विक्रेताओं की मनमानी से आम आदमी को बचाने तथा उसकी मदद के लिए कुछ उपाय आवश्यक है। उपभोक्ता संरक्षण का अर्थ, व्यापार से जुड़ी अनियमितताओं से आम उपभोक्ता के हित की रक्षा के लिए उठाये जाने वाले कदम या आवश्कक उपाय है। हर व्यापारी अधिक से अधिक लाभ कमाना चाहता है और यह अक्सर उपभोक्ताओं के खर्च की कीमत पर ही होता है।