स्वतंत्र सहमति न होने का अनुबंध पर प्रभाव - Contract effect of lack of free consent
स्वतंत्र सहमति न होने का अनुबंध पर प्रभाव - Contract effect of lack of free consent
भारतीय अनुबंध अधिनियम की धाराओं 19, 19(अ) तथा 20 के अनुसार किसी अनुबंध के पक्षकारों की सहमति स्वतंत्र न होने के निम्नलिखित प्रभाव होते हैं:
I. अनुबंध का व्यर्थनीय होना यदि किसी ठहराव की सहमति उत्पीड़न, कपट अथवा मिथ्या वर्णन द्वारा प्राप्त किया जाता है तो पीड़ित पक्षकार की इच्छा पर अनुबंध व्यर्थनीय होता है । किन्तु यदि सहमति मौन द्वारा कपट के रूप में दी गई है जिसकी सच्चाई का पता साधारण प्रयत्नों से लगाया जा सकता था तो अनुबंध व्यर्थनीय न होकर एक मान्य अनुबंध होगा ।
ii. अनुबंध की अभिपुष्टि - पीड़ित पक्षकार चाहे तो ऐसे अनुबंध को मान्यता देकर इसकी अभिपुष्टि कर सकता है।
ऐसी स्थिति में वह दुसरे पक्षकार को अनुबंध की समस्त शर्तों को मानने के लिए बाध्य कर सकता है।
iii. क्षतिपूर्ति का अधिकार कपट की दशा में पीड़ित पक्षकार को क्षतिपूर्ति कराने का अधिकार प्राप्त होता है। यह अधिकार केवल कपट की दशा में प्राप्त होता है।
iv. अनुबंध को निरस्त किया जाना अनुचित प्रभाव की दशा में अनुबंध को पूरी तरह से रद्द - किया जा सकता है, अथवा अनुबंध के अंतर्गत पीड़ित पक्षकार अगर कुछ लाभ प्राप्त कर चुका हो, तो ऐसी दशा में अनुबंध उन शर्तों पर रद्द किया जा सकता है जो न्यायालय की दृष्टि में उचित हो।
V. अनुबंध का व्यर्थ होना - अनुबंध के दोनों पक्षकारों द्वारा तथ्य संबंधी गलती की दशा में अनुबंध पूर्णतया व्यर्थ होता है।
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