प्रतिलिपि परीक्षण - copy test
प्रतिलिपि परीक्षण - copy test
प्रतिलिपि परीक्षण विज्ञापन प्रभावशीलता को जानने की दृष्टि से यह परीक्षण किया जाता है। इसमें केवल विज्ञापन संदेश पर ही ध्यान दिया जाता है. विज्ञापन माध्यम पर नहीं विज्ञापन संदेश में मुख्यतः निम्न बातें सम्मिलित की जाती हैं यह पता लगाना कि किस प्रकार की प्रतिलिपि अत्याधिक प्रभाव उत्पन्न करने वाली हो सकती है (जैसे- खाली स्थान, आकार प्रकार) यह पता लगाना कि सफेद काले संयोगों के स्थान पर रंगों के प्रयोग करने से ध्यानाकर्षण में क्या प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार के अनुसंधान के लिए क्या तरीके काम में लिये जा सकते हैं।
(i) जनसंख्या के एक सैम्पल को अखबार या पत्रिका दिखाकर यह पूछा जाता है कि क्या उन्होंने उसमें कुछ विज्ञापन देखे है तथा उन्हें उसका कौन सा भाग याद है इस प्रकार एक बड़ी संख्या में विज्ञापनों के आकर्षण की तुलना की जा सकती है और उसकी प्रभावशीलता को निश्चित किया जाता है।
(ii) एक माध्यम के द्वारा उसकी पुनरावृत्तियों में एक ही विज्ञापन को विभिन्न स्थितियों में रखा जाता है और यह जानने की कोशिश की जाती है कि इन परिस्थितियों में उसके आकर्षक मूल्य में क्या अंतर हुआ है।
(iii) मुख्य विज्ञापनों को विभिन्न स्थितियों में रखा जा सकता है और कूपन भेजने वालों की छुपी हुई सामग्री या पुस्तिका भेजने के लिए प्रस्ताव किया जाता है और जो उत्तर मिलते है उनकी संख्या से तुलना की जाती है।
(iv) विज्ञापन को प्रकाशित करने से पहले जनसंख्या के एक सैम्पल को दिखाया जाता है ताकि यह ज्ञात हो सके कि कितने लोग उस विज्ञापन के लिए ऐसी प्रतिक्रिया करते है जो उससे अपेक्षित है।
क्या विज्ञापन संदेश की प्रभावशीलता को जाना जा सकता है विज्ञापन संदेश की प्रभावशीलता को ज्ञात करना बहुत कठिन है। यद्यपि विज्ञापन के क्षेत्र में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा काफी ध्यान दिया गया है फिर भी इसके लगभग नाप के लिए कोई निश्चित आधार या विधि ज्ञात नहीं की जा सकी है। यह सब विपणन प्रक्रिया की जटिलताएं हैं। आज भी निम्न प्रश्नों के उत्तर में कोई सामान्य सहमति नहीं हो पायी है कि इनका उत्तर प्राप्त करने के सर्वश्रेष्ठ विधिया कौन सी है
(1) उत्पादन या वस्तु के विषय में क्या कहा जाये?
(ii) जो अपील करना है या जो कुछ कहना है, उसको किन चित्रो या शब्दों में कहा जाये?
(iii) कौन से विज्ञापन माध्यम को चुना जाये?
इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि उपर्युक्त प्रश्नों का सर्वश्रेष्ठ उत्तर ज्ञात करने के लिए एक निश्चित विधि विकसित की जा सकती है। विज्ञापनों का चयन करने के लिए अभिप्रेरण अनुसंधान को प्रयुक्त किया जा सकता है, क्योंकि अपील अनुमान के आधार पर नहीं होनी चाहिए। अभिप्रेरण अनुसंधान के माध्यम से यह मालूम हो सकता है कि किसी उपभोक्ता के दिमाग में किसी उत्पाद की क्या तस्वीर है या क्या प्रभाव है और विभिन्न जनसंख्या वर्गों में उसके प्रभाव की तुलनात्मक तीव्रता कितनी है।
प्रतिलिपि परीक्षण यह निश्चित करने के ढंग से की जाती हैं कि चुनी हुई अपीलों को किस प्रकार प्रस्तुत किया जाये ताकि उनका प्रभाव अत्यधिक हो सके। यह जांच दो प्रकार से हो सकती है पहले और बाद में यदि उद्देश्य यह हो कि विज्ञापन को प्रकाशित करने से पहले उसमे सुधार किये जाय तो ऐसा जांच को जारी करने से पहले की जांच कहते हैं।
एक विज्ञापन को जारी करने से पहले कुछ जांच हो सकती है-
(i) उपभोक्ता ज्यूरी
(ii) रेटिंग स्केल्स
(iii) विज्ञापन प्रभाव
(iv) मनोवैज्ञानिक परीक्षण
(v) कल्पित जांच।
इसी प्रकार बाद में की जाने वाली जांच में-
(i) पुन स्मरण
(ii) पहचान तथा
(iii) कल्पित विक्रय जांच
विज्ञापन माध्यम के चुनाव में इस बात को महत्व दिया जाता है कि विज्ञापन संदेश को संभावित केताओं या उपभोक्ताओं को कितनी कुशलता व प्रभावशीलता के साथ पहुंचाया जा सकता है इसके लिए यह आवश्यक है कि यह ज्ञात किया जाये कि एक माध्यम के द्वारा कितनी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा जा सकता है और इन लोगों की विशेषताएं क्या है? प्रेस के माध्यम का चुनाव करने के लिए पाठकों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है।
रेडियो तथा टेलीवीजन प्रोग्राम के लिए टेलीफोन कॉल, ऑडोमीटर तथा डायरी का प्रयोग किया जाता है। यदि एक से अधिक माध्यमों का उपयोग किया जाता है तो दोहरेपन की समस्या उतपन्न होती है इससे संख्यात्मक दृष्टि से तो जानकारी हो सकती है, परन्तु गुणात्मक दृष्टि से विभिन्न माध्यमों के प्रभाव को नहीं देखा जा सकता है। फिर भी माध्यमों के चुनाव में इसका उपयोग किया जाता है ताकि चयन को सीमित किया जा सके।
पैकिंग परीक्षण- एक नये उत्पाद को बाजार में लाने के लिए और पुराने उत्पाद को बदलने के लिए पैकेज का बहुत महत्व होता है। एक अध्ययन से यह स्पष्ट हो गया है कि विज्ञापन से प्रभावित होकर किसी भी वस्तु को खरीदने वाले क्रेताओं में से लगभग 33 प्रतिशत क्रेता अनाकर्षक पैकेज की अवस्था में अन्य अच्छे पैकेज वाले उत्पादों को खरीदने के लिए प्रेरित हो जाते है
उपभोक्ता पैकेज की अवस्था में लगभग 1/3 समावित क्रेताओं से व्यवसायी को हाथ धोना पड़ता है। अतः आकर्षक पैकेज आधुनिक समय की अनिवार्यता बन गया है। अतः पैकेज के अंतिम स्वरुप या डिजायन को निश्चित करने से पहले उसकी जांच कर लेनी चाहिए। इस जांच से निम्न संकेत प्राप्त हो सकते हैं।
(i) पैकेज का स्वरुप- इसका सबसे अधिक स्वीकार्य ढंग जैसे खोलना, टिकाऊपन और बाद में काम आने की स्थिति आदि ।
(ii) पैकेज का आकार संदेश या साइज़ जिसमें कई आकार हो सकते है. यदि एक से अधिक आकारों की आवश्यकता अनुभव की जाये।
(iii) पैकेज का रंग - पैकेज का रंग कैसा हो या रंगो का सम्मिश्रण किस प्रकार का हो जो ग्राहको के लिए अधिक आकर्षक हो।
(iv) पैकेज पर विज्ञापन - संदेश क्या हो? इसकी लिखावट, बनावट व्यवस्था, व्याख्या आदि किस प्रकार की हो।
(v) पैकेज पर दिये गये निर्देश - वस्तु को काम में लेने के बारे में निर्देश किस प्रकार के हो? क्या वे प्रयोग करने वालों के यथाशीघ्र समझ में आने वाले हों और ये प्रत्येक अवस्था में ठीक ढंग से प्रयुक्त किये जा सकते हो? कहीं उनको गलत ढंग से ग्रहण करने की संभावना तो नहीं है?
(vi) नये उत्पाद के साथ ब्राण्ड का नाम - नये पैकेज पर किस प्रकार लिखा जाये? जा सकता है। क्या यह सही ढंग से लिखा गया है और सरलता से याद किया पैकेज की जांच के लिए इन तरीकों को काम में लाया जा सकता है।
संभावित ग्राहकों के एक मिले-जुले वर्ग को पैकेज के विभिन्न आकार-प्रकारों में वस्तु को रखकर दिया जाता है
और उनकी प्रतिक्रियाएं नोट कर ली जाती है। जांच के लिये चुने गये नगरों में या क्षेत्रों में खुदरा व्यापारी उत्पाद को विभिन्न प्रकार के पैकेजों में बेचते हैं। कुछ समय बाद किस प्रकार के पैकेजों वस्तु की मात्रा अधिक हो, उसकी अधिक बिक्री हो उसकी जानकारी ली जाती है और यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि किस पैकेज में वस्तु की बिक्री अधिक होने की संभावना है।
इस प्रकार विपणन अनुसंधान से उत्पाद निर्णय में बहुत सहायता मिलती है लेकिन तकनीक अनुसंधान और विपणन अनुसंधान में सही संतुलन बनाये रखना आवश्यक है। नये उत्पाद को विकसित करने के लिए उस उत्पाद के लिए क्षेत्र का ध्यान करना पड़ेगा उत्पाद को निश्चित करना पड़ेगा, उसका निर्माण करना पड़ेगा उत्पाद की विक्रय जांच करनी होगी और उत्पाद के बाजार में आने के पश्चात लगातार उसकी जांच होती रहेगी। उत्पाद के गुणों या विशेषताओं का निर्धारण करने के लिए अनुसंधान के माध्यम से यह जाना जा सकता है कि महत्वपूर्ण गुण क्या हो सकते हैं और उनमें से प्रत्येक का पारस्परिक सापेक्ष महत्व कितना है?
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