साख निर्माण की सीमाएँ - credit building limits
साख निर्माण की सीमाएँ - credit building limits
बैंक असीमित मात्रा में साख का निर्माण नहीं कर सकते। उनके साख निर्माण की शक्ति की बहुत सी सीमाएँ है जिनका विवरण निम्नलिखित है:
(i) नकद आरक्षित अनुपात: बैंक, साख का कम निर्माण कर सकेंगे या अधिक, यह नकद आरक्षित अनुपात पर निर्भर करता है। यदि बैंक अपने पास नकद कोष में अधिक राशि रखना चाहते है तो कम साख का निर्माण होगा और नकद आरक्षित अनुपात में उल्टा संबंध है। यदि नकद आरक्षित अनुपात अधिक है तो कम साख का निर्माण होगा और यदि नकद आरक्षित अनुपात कम है तो अधिक साख का निर्माण होगा।
(ii) प्राथमिक जमाओं की मात्रा बैंक द्वारा साख का निर्माण प्राथमिक जमाओं की मात्रा पर भी निर्भर करता है। इन दोनों में सीधा संबंध पाया जाता है। यदि प्राथमिक जमाओ की मात्रा अधिक है तो नकद कोष अनुपात के स्थिर रहने पर, साख निर्माण होगा और इसके विपरीत प्राथमिक जमाओ की मात्रा के कम होने से साख का निर्माण कम होगा।
(iii) लोगों की बैंकिग संबंधी आदतें बैंकों के साख निर्माण की शक्ति लोगों की बैंक संबंधी आदतों पर भी निर्भर करती है। यदि किसी देश में जनता लेन-देन तथा व्यापार संबंधी भुगतान चिकों द्वारा करती है तो लोगों को अपना कम रुपया नकदी के रूप में रखना पड़ता है।
इसके फलस्वरूप बैंकों के नकद कोष बढ़ जाते है और बैंकों की साख निर्माण की शक्ति भी बढ़ जाती है। अधिकतर विकसित देशों में बैंकों की साख निर्माण की शक्ति अधिक होती है, क्योंकि वहाँ पर लोग सब प्रकार के लेन-देन चैकों के द्वारा करते है। परंतु अल्पविकसित देशों में बैंकों की साख निर्माण की शक्ति कम होती है, क्योंकि वहाँ के लोग अधिकतर लेन-देन चैको द्वारा नही करते। लेन-देन अधिकतर नकदी में किया जाता है। इससे नकदी की माँग अधिक रहती है और बैंकों की नकद जमा कम होती है। इससे बैंकों की साख निर्माण की शक्ति भी कम हो जाती है।
(iv) केंद्रीय बैंकों की साख संबंधित नीति- व्यापारिक बैंकों की साख निर्माण शक्ति किसी देश के केंद्रीय बैंक की साख नीति पर भी निर्भर करती है।
यदि केंद्रीय बैंक साख के विस्तार की नीति अपनाता है तो व्यापारिक बैंकों की साख निर्माण की शक्ति अधिक होगी और इसके विपरीत यदि केंद्रीय बैंक साख के संकुचन की नीति अपनाता है तो बैंकों की साख निर्माण की शक्ति कम होगी।
(v) अन्य बैंकों की साख नीति एक बैंक की साख निर्माण की शक्ति दूसरे बैंकों द्वारा अपनाई गई नीति पर भी निर्भर करती है। यदि सब बैंक परस्पर सहयोग से काम करते हैं तो अधिक साख का निर्माण होगा। यदि किसी अर्थव्यवस्था में एक बैंक साख का निर्माण करता है परंतु दूसरे बैंक उतने ऋण नहीं देते जितने कि अपने अतिरिक्त कोष के आधार पर दे सकते हैं तो साख निर्माण की कुल मात्रा कम हो जायेगी।
(vi) चलन में रिसाव :- साख निर्माण की प्रक्रिया में से होने वाले रिसाव पर निर्भर करती है। यदि जमाओं के सृजन की प्रक्रिया के किसी चरण में कोई चैक प्राप्त करने वाला व्यक्ति वह रकम बैंक में जमा कराने की बजाए उसे निकाल की चलन में खर्च कर देता है या इसे बैंकिंग व्यवस्था से बाहर कहीं और जमा कर देता है तो साख के सृजन की मात्रा कम हो जायेगी। उदाहरण के लिए, हमारे उदाहरण में रु. 1,000 के प्राथमिक जमा के आधार पर कुल जमा बढ़कर रु. 10,000 हो जाती है। यदि बैंकों से रु. 100 निकाल कर चलन में डाल दिए जाए और रिजर्व कोषों में केवल रु 900 ही बैंकिंग प्रणाली में रहें तो कुल जमा बढ़ कर केवल रु 9,000 के ही हो सकेगे।
(vii) प्रतिभूतियों का स्वरूप या अच्छे उधार लेने वाले बैंकों की साख निर्माण की शक्ति प्रतिभूतियों के स्वरूप पर भी निर्भर करती है।
यदि उधार लेने वाले व्यक्ति विश्वास योग्य है अर्थात् वे बैंकों को ऋण के बदले में अच्छी प्रतिभूतियों की जमानत दे सकते हैं तो बैंक अधिक साख का निर्माण कर सकेंगे। इसके विपरीत यदि प्रतिभूतियाँ जोखिमपूर्ण है तो बैंक कम साख का सृजन करेंगे। क्राउथर ने इस संबंध में ठीक कहा है कि, बैंक हवा में से साख का सृजन नहीं करता, वह संपत्ति के अन्य रूपों में परिवर्तित करता है। बैंकरों की शक्ति इतनी अधिक नहीं है कि वे व्यर्थ के पदार्थों को कीमती पदार्थों मे परिवर्तन कर सकें। लेकिन वे स्थिर संपत्ति को मुद्रा या तरल संपत्ति में परिवर्तित कर सकते हैं। बैंक प्रतिभूति को अपनी परिसंपत्ति के रूप में लेता है तथा उसके बदले में अपनी मुद्रा दे देता है। संक्षेप में, बैंकों की साख सृजन की सीमा इस बात पर निर्भर करती है कि बैंक से ऋण चाहने वाले व्यक्ति किस प्रकार की प्रतिभूतिया देने की स्थिति में है।
(viii) व्यापारिक तथा औद्योगिक स्थिति:- बैंकों की साख निर्माण की शक्ति देश की व्यापारिक तथा औद्योगिक स्थिति पर भी निर्भर करती है। मंदी के दिनों में व्यापार तथा उद्योगपतियों द्वारा की माँग कम होने पर बैंक अधिक साख का निर्माण नहीं कर पाते। तेजी की स्थिति में बैंक अधिक साख का निर्माण कर सकते है।
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