साख निर्माण की सीमाएँ - credit building limits
साख निर्माण की सीमाएँ - credit building limits
यह समझ लेना आवश्यक है कि बैंक मुद्रा के निर्माण की उपर्युक्त प्रक्रिया केवल एक आदर्श स्थिति को व्यक्त करती है। प्रारंभिक जमा के आधार पर साख अथवा व्युत्पन्न जमा का अनुमानित मात्रा में निर्माण मुख्य रूप से निम्नलिखित चार मान्यताओं के अंतर्गत ही संभव होता है-
1. बैंक पर लिखे गए चैकों का भुगतान जमाकर्ताओं के खातों में चैक की रकम जमा करके होता है, नकदी के रूप में नहीं।
2. बैंकों द्वारा केंद्रीय बैंक को न्यूनतम वैध आरक्षित अनुपात का भुगतान करने के अलावा बैंकों को नकदी रखने की आवश्यकता नहीं होती है।
3. जनता बैंको से बैंकों की अधिकतम ऋण देने की शक्ति तक ऋण लेने को तैयार है।
4. बैक अपनी अधिकतम ऋण देने की शक्ति तक जनता को ऋण देने के लिए तैयार है।
व्यावहारिक रूप से उपर्युक्त मान्यताएँ अवास्तविक है। सभी लोग अपने चैकों को बैंक में जमा नहीं करते, इसलिए नकद भुगतान करने के लिए बैंकों को अपने पास कुछ नकदी अवश्य रखनी पड़ती है। यह भी आवश्यक नहीं कि जनता द्वारा बैंक ऋणों की माँग इतनी ही हो जितनी कि बैंक की अधिकतम उधार देने की शक्ति है। ऋण की माँग अनेक बातों से प्रभावित होती है तथा मंदी काल में तो माँग बहुत कम होती है। यह भी आवश्यक नहीं कि बैंक सदा अपनी अधिकतम ऋण देने की शक्ति के बराबर ही ऋण देगा। बैंक को लाभ के साथ-साथ ऋणों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होता है। इन कठिनाईयों के कारण पूर्णतया स्वतंत्र रहने पर भी बैंक अनियंत्रित मात्रा में साख का निर्माण नहीं कर पाता। साख निर्माण की अपनी कुछ सीमाएँ हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित है:
(1) देश में विधिग्राह्म मुद्रा की कुल मात्रा:- बैंकों के पास आने वाली प्रारंभिक जमा की मात्रा देश में विधिग्राह्म मुद्रा की कुल मात्रा पर निर्भर करती है। मुद्रा की मात्रा अधिक होने पर बैंकों की जमाराशियाँ बढ़ती हैं जिनके आधार पर अधिक साख का निर्माण संभव होता है। मुद्रा स्फीति के दिनों में बैंकों की जमा तथा कोष बढ़ जाते हैं तथा उनके दिए हुए ऋणों की मात्रा भी बढ़ती है। इसके विपरीत, मुद्रा संकुचन की स्थिति में बैंकों की नकद अथवा प्रारंभिक जमा मे कमी होती है, जिससे बैंकों की साख निर्माण की शक्ति कम होती है।
( 2 ) लोगों की नकदी रखने की आदत- बैंकों की साख निर्माण की शक्ति इस बात पर भी निर्भर करती है कि लोग अपने पास नकद मुद्रा रखना चाहते है अथवा भुगतान करने के लिए चैक का प्रयोग करते हैं।
यदि लोग अपने पास नकदी रखना अधिक पसंद करते हैं तो जैसे ही बैंक द्वारा ऋण दिया जायेगा, ऋणी बैंक से नकद रकम ले लेगा। बैंकों के नकद कोष कम हो जाने पर उनकी साख निर्माण की शक्ति भी घट जाएगी। इसके विपरीत, बैंकिंग की आदत अधिक होने पर चैकों का अधिक प्रयोग होगा तथा बैंकों की साख निर्माण की शक्ति भी अधिक होगी।
(3) बैंको के नकद कोष - कुल जमाराशियों का न्यूनतम अनुपात जो बैंकों द्वारा नकद कोष के रूप में रखा जाता है, बैंकों की साख निर्माण की शक्ति को प्रभावित करता है। कुछ देशों में इस प्रकार का अनुपात केंद्रीय बैंक अथवा सरकार द्वारा निश्चित कर दिया जाता है। कुल जमा के अनुपात में नकद कोषों की मात्रा कम रहने पर बैंक अधिक साख का निर्माण कर सकते हैं।
इसके विपरीत, न्यूनतम कोषों का अनुपात अधिक होने पर बैंकों की साख निर्माण की शक्ति काफी सीमित होती है।
बैंकों के नकद कोषों का अनुपात मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करता है - बैंकों पर कानूनी प्रतिबंध, जनता द्वारा नकदी की माँग तथा बैंको की स्थिति ।
(4) बैंकों के केंद्रीय बैंक के पास रक्षित कोष-प्रत्येक बैंक को केंद्रीय बैंक के पास अपनी चालू तथा निश्चितकालीन जमाओं अथवा माँग तथा काल दायित्वों का कुछ भाग रक्षित कोष के रूप में रखना पड़ता है। कुल जमाराशियों के अनुपात में रक्षित कोष की मात्रा जितनी अधिक होगी, बैंकों की साख निर्माण की शक्ति उतनी ही अधिक सीमित होगी।
(5) केंद्रीय बैंक की साख संबंधी नीति: प्रत्येक देश में केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों की साख निर्माण की सीमा निर्धारण करने के लिए न्यूनतम वैध आरक्षित अनुपातों में परिवर्तनों के अतिरिक्त बैक दर तथा खुले बाजार की क्रियाओं आदि से संबंधित नीति में समय-समय पर परिवर्तन करके बैंकों द्वारा साख निर्माण को प्रभावित करता है।
केंद्रीय बैंक की नीति का उद्देश्य साख के विस्तार का नियंत्रण करना होने पर, बैंक साख निर्माण की मात्रा को सीमित रखने पर विवश हो जाते है ।
(6) अन्य बैंकों की साख निर्माण संबंधी नीति- बहु बैंक बैंकिंग प्रणाली में साख निर्माण के संबंध में प्रत्येक बैंक को अन्य बैंक की साख निर्माण नीति को ध्यान में रखना पड़ता है। एक बैंक विशेष द्वार अन्य बैंक की तुलना में अधिक निर्माण करने की उसकी नकदी शीघ्र ही समाप्त हो जायेगी, क्योंकि इस बैंक के ऋणियों द्वारा दिए गए चैक जब अन्य बैंकों के पास पहुँचेंगे तो इस बैंक को नकदी देकर भुगतान करना पड़ेगा। अन्य बैंकों की तुलना में साख निर्माण कम होने पर इस बैंक के नकद कोष में वृद्धि होगी तथा यह साख का विस्तार करेगा। इस प्रकार कोई एक बैंक अन्य बैंकों से भिन्न नीति अपनाकर अपनी बरबादी का उपाय स्वयं ही कर लेता है। सफल संचालन के लिए कोई भी बैंक साख निर्माण के कार्य में अन्य बैंकों के आगे या पीछे अधिक समय तक नही रह सकता।
(7) प्रारंभिक जमाओं की मात्रा - लोगों द्वारा बैंकों में अधिक नकद जमा कराने पर बैंक की प्रारंभिक जमाओं में वृद्धि होगी, क्योंकि बैंकों द्वारा साख निर्माण की आधारशिला उनकी नकद जमा ही है। केन्स का विचार पूर्णतया सही है कि बैंकों द्वारा साख निर्माण उनकी प्रारम्भिक जमा की मात्रा पर निर्भर करता है।
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