राष्ट्रीय आय का अलोचना - Criticism of National Income
राष्ट्रीय आय का अलोचना - Criticism of National Income
मार्शल की परिभाषा की निम्न आधारों पर आलोचना की गयी है, (i) देश में उत्पादित की जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की संख्या इतनी अधिक होती है कि राष्ट्रीय उत्पादन की गणना करना असम्भव नहीं तो कठिन अवश्य हो जाता है। (ii) इस परिभाषा का दूसरा दाष दोहरी गणना (double counting) की आशंका का बना रहना है। उदाहरण के लिये 'कपास' के उत्पादन को कृषि उत्पादन में सम्मिलित करने के साथ साथ सूती वस्त्रा उद्योग के उत्पादन में भी सम्मिलित कर लेने पर एक वस्तु की दो बार गणना हो जाती है। पपपद्ध बहुत सी वस्तुओं के उत्पादन की मूल्य गणना करने से रह जाना है क्योंकि उनका काफी बड़ा भाग उत्पादकों द्वारा स्वयं उपभोग कर लिया जाता है जैसे किसान द्वारा अपनी फसल का कुछ भाग अपने निजी उपभोग में लाना स्वाभाविक है कि जब बाजार में बिक्री के लिये उत्पादित माल कम आयेगा तो राष्ट्रीय उत्पादन भी कम आंका जायेगा।
प्रो0 पीगू (Pigou) के मतानुसार, "राष्ट्रीय लाभांश किसी समाज की भौतिक आय का वह भाग है जिसमें विदेशों से प्राप्त आय भी सम्मिलित होती है और जिसे मुद्रा के रूप में मापा जा सकता है।" पीगू की परिभाषा मार्शल की परिभाषा की तुलना में दो बातों में श्रेष्ठ है। प्रथम पीगू के अनुसार राष्ट्रीय आय में विदेशों से प्राप्त आय को भी सम्मिलित किया जाना चाहिये जबकि मार्शल ने इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। दूसरा, वस्तुओं सेवाओं के उत्पादन का केवल वहीं भाग राष्ट्रीय आय में सम्मिलित किया जा सकता है जिसे मुद्रा के रूप में मापा जा सके। अतः उत्पादन का वह भाग जिसका मौद्रिक मूल्य नहीं होता, राष्ट्रीय आय में सम्मिलित नहीं किया जा सकता। उदाहरणार्थ एक गृहिणी द्वारा घर में किये गये घरेलू सेवा कार्य का मूल्य, राष्ट्रीय आय में सम्मिलित नहीं किया जायेगा।
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