सीमा शुल्क - Custom duty
सीमा शुल्क - Custom duty
सीमा शुल्क एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है जो भारत में आयतित तथा भारत से निर्यातित माल पर लगाया जाता है। भारत में आयात अथवा भारत से निर्यात वाले माल पर लगाया जाता है। माल के आयात अर्थ है भारत से बाहर के किसी स्थान से माल को भारत में लाना। इसमें भारत में भारत से लगे राज्यक्षेत्रीय सागरखंड भी शामिल है जिनका विस्तार भारतीय तट से समुद्र में 12 समुद्री मील की दूरी तक है। माल के निर्यात का अर्थ है माल को भारत से बाहर किसी स्थान पर ले जाना ।
1. मूलभूत शुल्क:- यह मानक दर पर हो सकता है या फिर कुछ अन्य देशों से अधिमानी पर हो सकता है।
2. अतिरिक्त सीमा शुल्क वैसा ही समान भारत में उत्पादित या विनिर्मित होने पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क के समान अतिरिक्त शुल्क को सामान्यत सीबीडी कहा जाता है। यह तभी देय होता है जब आयतित वस्तु इस प्रकार की हो कि यदि यह भारत में उत्पादित होती तो उत्पादन की प्रक्रिया केंद्रीय सीमा शुल्क अधिनियम, 1944 के तहत विनिर्माण मानी जाती।
3. टू काउंटरवेलिंग डयूटी अथवा अतिरिक्त सीमा शुल्क यह समान भारतीय माल को, उनकी निविष्टियों पर ऊंचे उत्पाद शुल्क की वजह से होनी वाली हानि को समायोजित करने के लिए लगाया जाता है।
यह इसलिए लगाया जाता है, ताकि स्वदेशी माल, जिस पर विभिन्न आंतरिक करों का बोझ रहता है को बराबरी का मौका मिल सके।
4. डपिंग रोधी शुल्क / रक्षोपय शुल्क:- विनिर्दिष्ट माल के आयात के लिए, जिसका उद्देश्य, घरेलू उद्योग को अनुचित हानि से बचाना है। 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाइयों तथा एफटीजेड एवं एसईजेड की इकाइयों द्वारा आयातित माल पर यह लागू नहीं होगा। माल के निर्यात पर डंपिंग रोधी शुल्क, ड्रॉबैक के स्पेशल ब्रांड रेट के जरिए ही छूट योग्य है ।
5. शिक्षा उप कर कुल सीमा शुल्क के प्रतिशत के रूप में निर्धारित दर पर लगाया जाता है। यदि माल पूरी तरह शुल्क मुक्त होता है अथवा शून्य शुल्क प्रभार योग्य होता है अथवा निर्धारित प्रक्रिया जैसे ब्रांड के अंतर्गत स्वीकृति के तहत शुल्क के भुगतान के बिना मंजूर कर दिया जाता है तो उप कर नहीं लगेगा।
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