ग्राहक मूल्य प्रस्ताव - customer value proposition
ग्राहक मूल्य प्रस्ताव - customer value proposition
विभाजन ग्राहकों के समूह को पहचानने को संदर्भित करता है जो समान मूल्य प्रस्तावों की चाहत रखते है। ग्राहक मूल्य प्रस्ताव उत्पादों और सेवा विशेषताओं का एक अद्वितीय मिश्रण है। गाहक संबंध प्रस्ताव वर्णित करते हैं कि कैसे एक संगठन दूसरे प्रतिस्पर्धाओं से अपने को आकर्षक बना उपभोक्ताओं के साथ संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करते है। ये मौलिक प्रस्ताव एक कंपनी को अपने ग्राहकों के प्रयोजनों में सुधार करने में सक्षम बनाते हैं। विभाजीकरण प्रत्येक खंड के आंतरिक प्रावधानों को अच्छे तरीक से क्रियान्वित करने योग्य बनाते हैं क्योंकि ऐसे विशिष्ट मौलिक प्रस्ताव ग्राहक के लिए ही बनाए जाते हैं। इन विशिष्ट आंतरिक प्रयोजनों के समूह प्रत्येक खंड में सेवारत रहने के लिए ही अपेक्षित होते है। अगर किसी सामान्य संगठन को सभी खड़ो को संचित करना है तो ऐसे खड़ों में उत्पन्न होने वाली माग विरोधात्मक प्रकृति की होगी।
अंतः विभाजीकरण क्रियाए भी उसी अवस्था में प्रभावशाली होती है जब वे एक दूसरे से भिन्न हो इस कारण संगठनों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं होता सिवाय इसके कि विभिन्न खड़ों में सफलता पाने के लिए भिन्न संगठनों को स्थापित करने की आवश्यकता पड़ती है।
बहुत कम उत्पाद या सेवाए अकित बाजार में ग्राहकों को संतुष्ट करने के योग्य होती है। प्रत्येक उपभोक्ता समान उत्पाद खरीदने की इच्छा नहीं रखता। कुछ देशों में, जैसे- भारत ऐसा व्यवहार करता है जैसे वह एक सामान बाजार अथवा उपभोक्ता की आवश्यकताओं को दशकों से पूर्ति करते आ रहे हो कुछ वर्ष पूर्व तक एम्बैसेडर और फीयट कारें और उसके पश्चात मारुति 800 ही भारतीय सड़कों पर टैक्सी के असाधारण बाजार खंड में चलती थीं, लेकिन अब मर्सीडीज बेंज ने भी इस बाजार खड में अपनी प्रभुत्त्वा बना ली है। यह साकेतिक है कि विपणनकर्ता लम्बी अवधि तक इस बाजार खंड को नजरअंदाज करते आए हैं। अधिकतर विकसित देशों में इस तरह का विकास अन्य उत्पादों या सेवा क्षेत्रों में भी हुआ है।
वास्तव में इन देशों से संबंधित पिछड़ेपन होने का यह एक सत्यापित कारक रहा है जिस कारण विभाजन क्रियाओं का सही रूप में लागू नहीं किया जा सका है।
विपणनता से इन विमाजीकरण उन्मुक्तता के कारण कुछ खडों में उच्च क्वालिटी के उत्पादों का पदार्पण संभव हुआ है जो उपभोक्ताओं के अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं। दूसरी ओर, अन्य खंड उपभोक्ता को उन उत्पादों की आपूर्ति अपेक्षाकृत मात्रा वैसे नहीं कर पाये हैं जैसी होनी चाहिए थी। कोई भी उपभोक्ता इस प्रकार की आपूर्ति से संतुष्ट नहीं है। कंपनियां पैसों का अनावश्यक खर्च उठाती हैं और बाजार के आर्थिक स्थिति का सही मूल्यांकन करने में असफल रहती है जिसके विपरीत परिणामों के कारण कंपनिया उलझन में पड़ जाती है। बाजार की आर्थिक स्थिति कसी भी हो, समाज में विभिन्नता उन खड़ों का स्पष्ट विमाजीकरण में हमेशा असफल होती है और इस प्रकार की स्थितिया ज्यादातर विकासशील देशों में ही पायी जाती है। किसी भी विपणनकर्ता के लिए बाजार विभाजीकरण को प्रारम्भ करने से पहले उस की आवश्यकतों का सही या कहिए उत्कृष्ट मूल्यांकन करना अति आवश्यक होता है।
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