समंकों का विश्लेषण प्रक्रिया - data analysis process
समंकों का विश्लेषण प्रक्रिया - data analysis process
जैसा कि उपर स्पष्ट किया जा चुका है कि विश्लेषण संगृहित समको के आशय को निर्धारित करने की प्रक्रिया है। समकों का सारणीयन करने में कई तथ्य सामने आते हैं। समस्या पर इनके प्रभाव को जानने के लिए यह आवश्यक है कि एक तथ्य को दूसरे तथ्य के साथ संबंधित किया जाए। यह कार्य कई चरणों में पूरा किया जाता है।
(i) समको की जांच विश्लेषण का प्रथम चरण पूर्व वर्गीकृत की जांच करना तथा उपयोगिता की दृष्टि से समकों का चुनाव करना है समको की जांच करते समय निम्न नियमों का ध्यान रखना चाहिए
(क) संगतता अधिकांश सगृहित समक समस्या से संबंधित होने चाहिए। यद्यपि अधिकाश सर्वेक्षणों का परिणाम आनुषंगिक सूचनाओं में ही होता है, जो प्रायः गुणात्मक या मानात्मक रूप में ही होती है लोगों की प्रतिक्रियाओं,
प्राथमिकताओं तथा सलाहों की भविष्यवाणी करना बिल्कुल संभव नहीं होता है। इस सम्पूर्ण सामग्री की समस्या से संगतता के अनुसार सावधानीपूर्वक जांच की जाती है तथा उसी के अनुसार उन्हें चयनित या रद्द किया जाता होता है।
(ख) वैधता अन्वेशक को इस बात से आश्वस्त हो जाना चाहिए कि सर्वे द्वारा प्रदत्त आंकड़ों एवं सूचना वैध हैं। ज्ञात तथ्यों से विपरीत निष्कर्ष होने पर सर्वे की वैधता पर प्रश्न चिह लग जाता है। उदाहरण के लिए सर्वे द्वारा प्रकट वस्तुओं का उपयोग द्वारा अधिकाधिक आकड़ो से मापा जा सकता है। इसी प्रकार एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्ष आवश्यक रूप से किसी दूसरे क्षेत्र के लिए वैध नहीं हो सकते।
(ग) व्यवहारिकता जहां तक किसी विशिष्ट अध्ययन का प्रश्न है, समंकों का व्यवहारिक होना आवश्यक है। एक स्पष्ट और निश्चित निष्कर्षो वाले प्रतिवेदन तैयार करने के लिए यह आवश्यक है कि ऐसे समकों का ध्यान नहीं रखा जाए।
जिनकी व्यवहारिक महत्ता कम हो सहायता के लिए निम्नलिखित तीन नियमों को ध्यान में रखना उपयोगी है-
• आकडे समक अध्ययन के उद्देश्य से उपयुक्त हो
• आकड़े सही प्रस्तुतिकरण में सक्षम हो, तथा
• आंकड़े को समझने की शक्ति होनी चाहिए।
(ii) विश्लेषण की अवस्था में द्वितीय महत्वपूर्ण चरण अंतिम प्रतिवेदन के लिए एक अस्थायी रुपरेखा बनाने से संबंधित है। ऐसी रुपरेखा का उद्देश्य मस्तिष्क को सर्वेक्षण की जा रही समस्या के प्रत्येक पहलू पर केन्द्रित करना है। इस रुपरेखा में प्रत्येक संभावित तथ्य का समावेश आवश्यक है।
(iii) एक बार जब ऐसी रुपरेखा तैयार कर ली जाए, तो फिर सामग्री का संगठन प्रारंभ करना संभव हो जाता है।
वार्तालाप में शामिल हों