थोक मूल्य सूचकांक की कमियाँ , महंगाई दर- Deficiencies of Wholesale Price Index, Inflation

थोक मूल्य सूचकांक की कमियाँ , महंगाई दर- Deficiencies of Wholesale Price Index, Inflation


अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, कनाडा, सिंगापुर, चीन जैसे देशों में महगाई की दर खुदरा मूल्य सूचकांक के आधार पर तय की जाती है। इस सूचकांक में आम उपभोक्ता जो सामान्यतय सेवा खरीदते है उसकी कीमतें शामिल होती है। इसलिए अर्थशास्त्रियों के एक तबके का कहना है कि भारत को भी इसी आधार पर महगाई दर की गणना करनी चाहिए जो आम लोगों के लिहाज से ज्यादा सटीक होगी।


भारत में खुदरा मूल्य सूचकांक औद्योगिक कामगारों,

शहरी मजदूरों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण मजदूरों के लिए अलग-अलग निकाली जाती है लेकिन ये आँकडा हमेशा लगभग एक साल पुराना होता है। 


महंगाई दर


गणित के हिसाब से थोक या खुदरा मूल्य सूचकांक में निश्चित अंतराल पर होने वाले बदलाव को जब हम प्रतिशत के रूप में निकालते है तो उसे ही महंगाई दर या मुद्रा स्फीति कहते हैं।