ब्राण्ड पहचान की परिभाषा और संकल्पना - Definition and Concept of Brand Identity
ब्राण्ड पहचान की परिभाषा और संकल्पना - Definition and Concept of Brand Identity
ब्राण्ड पहचान ये ब्राण्ड विस्तापन का मूल मन गया है । ब्राण्ड यह उत्पादक की अचल सम्पति है जिसके अलग अलग कडिया होती है, विपणन विशेषज्ञ ब्राण्ड विस्तापन में ब्राण्ड पहचान को अग्र स्थान देते है और उसकी परिभाषा करते है जो निम्नलिखित शब्दों में दी गई है।
१) " ब्राण्ड पहचान ब्रांड संघों की एक अनोखी रणनीति है जो ब्राण्ड को प्रस्तापित करके या बनाए रखने की आकांक्षा है। ब्राण्ड संघटनो को उपभोक्ता के प्रति एक वादे का प्रतिनिधित्व करते हैं। (Aaker, २००२: ६८)
२) " ब्राण्ड पहचान ये ब्राण्ड के मूल्यों जैसे की ब्राण्ड की काया, ब्राण्ड का व्यक्तित्व, ब्राण्ड की संस्कृति, ब्राण्ड के रिश्ते, प्रतिबिंब, आत्म छवि का मिश्रण है" ........ ( जीन नोएल कप्फेरेर १९९७ )
3) ब्राण्ड पहचान ये ब्राण्ड के विजन, हितधारक प्रबंधन, ग्राहकलक्ष्य निर्धारण, स्थिति या भेदभाव, ब्रांडघटकों, संचार रणनीति है।.. Balakrishnan २००९) '
4) ब्राण्ड पहचान ये ब्राण्ड का लाभ, मिशन, दृष्टि, मूल्यों, विशिष्ठ वरीयताओं, व्यक्तित्व, अनुभवात्मक वादा, भावनात्मक मूल्य, कार्यात्मक मूल्य, हितधारकों अदि का मिश्रित है.... Konecnik Ruzzier और de Chernatony २०१३
५) ' ब्राण्ड पहचान ये ब्राण्ड का संचार, डिजाइन, संस्कृति (मान, दर्शन, मिशन, सिद्धांतों, देश के मूल, दिशा निर्देशों, इतिहास, संस्थापक, उपसंस्कृति), व्यवहार, संरचना, उद्योग पहचान, रणनीति है" ...... Melewar १९९३.
ब्रांडिंग पहचान अलग अलग रूप में देखने के बाद हम लोग जो विपणन शेत्र में जो रणनीति सभी कंपनिया अपनाती है
उसपे ध्यान देने के अनुसार Aaker Model को समाते हुए ब्रांडिंग पहचान के विशेषताये एव उसके अलग अलग नीतिया जानेगे | ब्रांडिंग पहचान हेतू Aaker ने खुच खूबियों को पकड़ा है जो निम्मलिखित है -
१ उत्पाद के रूप में ब्रांड |
२ संगठन के रूप में ब्रांड |
३ व्यक्ति के रूप में ब्रांड |
४ प्रतीक के रूप में ब्रांड |
1. उत्पाद के रूप में ब्रॉड :- चार दृष्टिकोण के पहले ब्राण्ड को एक उत्पाद के रूप में देखा गया है।
साथ ही इस परिप्रेक्ष्य में छह श्रेणियाँ होते हैं जैसे की उत्पाद की गुंजाइश, उत्पाद विशेषताओं, उत्पाद का गुणवत्ता / मूल्य, उत्पाद का उपयोग, उपयोगकर्ता और उद्यम देश आदि ।
ब्राण्ड पहचान ये उत्पाद या सेवावोसे सीधे तौर पर जुड़ा होता है ये शैक्षिक विशेषज्ञों का कहना है ब्राण्ड जब कोई उत्पाद के रूप में बाजार में आता है तो ब्राण्ड प्रबंधकोने खास चीजे मानस में ली जाती है जैसे की उत्पाद और ब्राण्ड यह दो अलग बाते है जैसे की उदाहरन हेतु आप लक्स को ले सकते है। लक्स यह एक ब्राण्ड है जेसके उत्पाद लक्स गुलाब, लक्स चन्दन, लक्स स्ट्राबेरी आदि | यह करने के लिए एकाधिक दृष्टिकोण का उपयोग किया जा सकता है, यह सुनिश्चित करें कि ब्राण्ड पहचान एक आयामी नहीं बननी चाहिए | अभ्यासक ( Aaker, २००२ : ७२ ) ने ये कहा है की ब्राण्ड पहचान ये हमेशा एक उत्पाद से अधिक होनी चाहिए जब ब्राण्ड एक उत्पाद के रूप में देखा जाता है तब मतभेद का विषय यह ब्राण्ड में होना चाहिए ना की उत्पाद में
२ संगठन के रूप में ब्रांड: दूसरे नजरिए में ब्राण्ड एक संगठन के रूप में ब्रांड है। जब कोई उत्पाद या सेवाए किसी संगठन के नाम से जाने जाते है तो उसे ब्राण्ड एक संगठन के रूप में कहते है उदाहरन हेतु आप आपके घर का टेलीविज़न ले सकते है जब आप सोनी का टेलीविज़न लेते है तो उस संगठन के साथ रिश्ता बनाते है, आप उत्पाद के साथ सोनी संगठन का एक वादा, विश्वास, गुणवत्ता ले आते है, इसका मतलब ये है की आप ब्राण्ड को संगठन के रूप में जानते है | आप उत्पाद का नक़ल बना सकते है किन्तु किसी संगठन का चहरा नहीं बना सकते, संगठन के साथ मूल्यों, विश्वासों, मिशन, दृष्टि ये सब तत्व जुड़े होते है जो अपने आप ब्राण्ड के रूप में उत्पाद से जुड़ जाते है।
३ व्यक्ति के रूप में ब्रांड: तीसरे परिप्रेक्ष्य में ब्राण्ड एक व्यक्ति के रूप में ब्रांड है। इस परिप्रेक्ष्य के साथ व्यक्तित्व और ब्रांड ग्राहक संबंध नामित दो श्रेणियों होती है। जब कोई ब्राण्ड किसी व्यति के रूप में आता है तो उसे व्यति के रूप में ब्राण्ड कहते है,
उदहारण हेतु आप अमिताभ बच्चन जी को ले सकते है जो हमसे कहते है की "कुछ दिन तो बिताओ गुजरात में" हम लोक गुजरात को उनके नाम से जानते है उसे कहते है की व्यक्ति के रूप में एक ब्राण्ड।
दुसरे परिप्रेक्ष्य के साथ आप ये कहते है की ब्राण्ड ये उपभोक्ता का दोस्त है, या ब्राण्ड से उसका नाता है। उदाहरण के लिए आप "जीवन साथी डॉट कॉम" को ले सकते है | अन्भासक प्रबंधो (डी Chernatony और मैकडोनाल्ड, २००१:१३१) द्वारा ये बताया गया है की ब्राण्ड एक प्रतिबद्ध साझेदारी, एक बचपन की दोस्ती या एक विवाह के विभिन्न रूप में पाया जाता है।
४ प्रतीक के रूप में ब्रांड: इस श्रेणी में ब्राण्ड को एक प्रतिक के रूप में देखा गया |
परिप्रेक्ष्य के दो श्रेणिया होते हैं दृश्य कल्पना / रूपकों और ब्रांड विरासत । जब कोई ब्राण्ड किसी प्रतिक के रूप में कल्पता या ब्राण्ड विरासत में उपभोक्ता के मानस में स्थिर होता है तो उसे ब्राण्ड एक प्रतिक के रूप में देखते है | उदहारण हेतु आप आपका मोबाइल फोन ले सकते है, बिना चिन्न के आप आपके मोबाइल को पहचान नहीं सकते, प्रतिक उपभोक्ता के मानस में एक कल्पक रूप बनता है जिससे उपभोक्ता अपने उत्पाद के तरफ खींचा जाता है और उसे पाने के लालस में रहता है ।
ब्राण्ड एक प्रतिक के रूप में साथ ही ब्राण्ड विरासत की बातो को बढ़ावा देता है, उपभोक्ता उत्पाद को पा कर उस विरासत का हिस्सा बनना चाहता है, ब्रांड विरासत केवल प्रासंगिक है जब एक ब्रांड एक विस्तारित अवधि के लिए स्थापित किया जाता है।
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