सुपुर्दगी संबंधी नियम - delivery rules

सुपुर्दगी संबंधी नियम - delivery rules


सुपुर्दगी के संबंध में क्रेता तथा विक्रेता दोनों अपनी इच्छानुसार नियम बनाने के लिए स्वतंत्र होते हैं। यदि इस संबंध में दोनों कोई भी नियम न बनायें तो निम्नलिखित नियम लागु होते है।


1. सुपुर्दगी एवं भुगतान साथ-साथ होना- किसी विपरीत अनुबंध के अभाव में सुपुर्दगी तथा भुगतान दोनों साथ-साथ होता है।


2. सुपुर्दगी वास्तविक, रचनात्मक या सांकेतिक ये सकती है सुपुर्दगी का उद्देश्य माल का स्वामित्व विक्रेता से क्रेता को हस्तांतरित करना होता है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए माल की सुपुर्दगी वास्तविक, रचनात्मक अथवा सांकेतिक हो सकती है।


3. क्रेता द्वारा सुपुर्दगी के लिए आवेदन किया जाना क्रेता द्वारा सुपुर्दगी के लिए आवेदन किय जाने पर विक्रेता माल की सुपुर्दगी देने के लिए बाध्य हो जाता है।


4. सुपुर्दगी की विधि - माल विक्रेता के पास पहुँचाना विक्रेता का दायित्व होता है। यह बात दोनों पक्षों के बीच किये गये स्पष्ट या गार्भिय अनुबंध की प्रकृति पर आधारित होती है।


5. सुपुर्दगी का स्थान माल की सुपुर्दगी किस स्थान पर की जायेगी यह विक्रय अनुबंध में लिखित होता है। ऐसे किसी अनुबंध के अभाव में सुपुर्दगी उस स्थान पर की जायेगी जहाँ पर माल की बिक्री का ठहराव किया गया हो। यदि बिक्री के समय वहाँ माल न हो तो सुपुर्दगी उस स्थान पर की जायेगी जहाँ माल का निर्माण होता है।


6. सुपुर्दगी का समय यदि विक्रय अनुबंध के अंतर्गत विक्रेता माल को क्रेता के पास भेजने के लिए बाध्य हो, किन्तु सुपुर्दगी के लिए कोई समय निश्चित नहीं हुआ हो तो माल की सुपुर्दगी उचित समय में होना चाहिए।


7. जब माल तृतीय पक्षकार के पास हो यदि माल तीसरे पक्षकार के पास हो तो सुपुर्दगी उसी दशा में मानी जायेगी यदि तीसरा पक्षकार यह स्वीकार कर ले उसके पास क्रेता का माल है।


8. सुपुर्दगी की मांग करना और प्रस्तुत करना सुपुर्दगी की मांग उस समय तक निष्फल समझा जायेगा जब तक वह उचित समय पर न किया गया हो। अतः माल की सुपुर्दगी की मांग उचित समय में करनी चाहिए।


9. सुपुर्दगी व्यय किसी विपरीत अनुबंध के अभाव में माल की सुपुर्दगी की स्थिति में लाने तथा इससे संबंधित अन्य सभी व्यय विक्रेता की सहन करने होंगे।