सुपुर्दगी के प्रकार - Delivery Type

सुपुर्दगी के प्रकार - Delivery Type


माल की सुपुर्दगी निम्नलिखित तीन प्रकार की हो सकती है-


1. वास्तविक सुपुर्दगी जब माल वास्तविक रूप में अनुबंध की शर्तों के अंतर्गत क्रेता या अधिकृत - प्रतिनिधि के पास पहुँच जाता है तो उसे वास्तविक सुपुर्दगी कहते हैं। उदाहरण के लिए सचिन, सोहन, से मोटर साइकिल खरीदकर तथा उस पर सवार होकर अपने ऑफिस जाता है। यह वास्तविक सुपुर्दगी कहलायेगी।


2. रचनात्मक सुपुर्दगी- यह बनावटी अथवा कल्पित सुपुर्दगी की भ्रांति होता है। इस सुपुर्दगी में माल विक्रेता अथवा किसी अन्य पक्षकार के अधिकार में रहाता है, किन्तु क्रेता को माल संबंधी अधिकार पत्र दे दिया जाता है। इस प्रकार की सुपुर्दगी को रचनात्मक सुपुर्दगी कहते हैं। उदाहरण के लिए,

राजु, सुजीत को 100 कुलर बेचने का अनुबंध करता है। अनुबंध के समय वह सुजीत को 100 कुलर ट्रांसपोर्ट रसीद दे देता है। यहाँ पर यह कूलरों की रचनात्मक सुपुर्दगी कहलायेगी।


3. सांकेतिक सुपुर्दगी - जब माल भारी रहता है तथा उसे एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना अथवा भौतिक रूप से हस्तांतरण करना लगभग असंभव रहता है तो विक्रेता माल का अधिकार पत्र जैसे रेलवे, रसीद, जहाजी बिल्टी आदि क्रेता को सौंप देता है तो इसे सांकेतिक सुपुर्दगी कहते हैं। उदाहरण के लिए, सुरेश ने रमेश से 100 बोरे गेहूँ के खरीदे तथा माल लाने के लिए ट्रक भेजी। जैसे ही गेहूँ के ब्योरे ट्रक पर लादे जाते हैं माल की सुपुर्दगी रमेश को मान ली जायेगी। इस प्रकार के सुपुर्दगी की सांकेतिक सुपुर्दगी करते हैं।