प्रस्ताव का खंडन - denial of offer
प्रस्ताव का खंडन - denial of offer
भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, “प्रस्ताव का खंडन प्रस्तावक के विरुद्ध स्वीकृति का संवहन पूरा होने से पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है, किन्तु बाद में नहीं ।"
भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, निम्नलिखित रीतियों से प्रस्ताव का खंडन अथवा अंत हो जाता है :
i. खंडन की सूचना का संचार कर एक प्रस्ताव का अंत प्रस्तावक के विरुद्ध स्वीकृति से पूर्व सूचना देकर किया जा सकता है। एक प्रस्तावक अपने प्रस्ताव का खंडन दुसरे पक्षकार की स्वीकृति मिलने से पूर्व कर सकता है। अतः प्रस्ताव के खंडन की सूचन प्रस्ताव की तक उसके स्वीकृति से पूर्व पंहुच जाना चाहिए।
ii. समय व्यतीत होने पर यदि स्वीकृति के लिए समय निर्धारित हो और निर्धारित समयावधि में कोई प्रस्ताव स्वीकार न की गई हो तो निश्चित समय के खत्म होते ही प्रस्ताव का अंत हो जायेगा। यदि स्वीकृति के लिए समय सीमा निर्धारित न हो तो उचित समयावधि में उसे स्वीकार कर लेना चाहिए।
iii. पूर्व शर्त का संवहन करने में विफलता से यदि किसी प्रस्ताव में उसके स्वीकृति के लिए कुछ - शर्तें रखी गई हो और स्वीकार करने वाला पक्षकार उन शर्तों को स्वीकार करने में समर्थ न हो या उन शर्तों को स्वीकार किये बिना प्रस्ताव स्वीकार किया हो तो प्रस्ताव खंडित माना जायेगा ।
iv. प्रस्तावक की मृत्यु अथवा पागलपन की स्थिति में कोई भी प्रस्ताव अगर स्वीकारक के स्वीकार करने से पूर्व ही प्रस्तावक की मृत्यु हो जाय या उसे पागल घोषित कर दिया जाय तो प्रस्ताव को खंडित माना जाता है तथा इस प्रकार दी गई स्वीकृति अवैध मानी जाती है।
V. प्रति प्रस्ताव करने पर यदि किसी प्रस्ताव के ऊपर प्रतिप्रस्ताव आता है तो प्रस्ताव स्वतः ही अवैध हो जाता है।
vi. स्वीकर्ता की मृत्यु अथवा पागलपन होने पर यदि जिस व्यक्ति के समक्ष प्रस्ताव रखा गया,
- प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले ही उसकी मृत्यु हो जय अथवा वह पागल हो जाय तो प्रस्ताव खंडित माना जायेगा।
vil. निर्धारित अथवा सामान्य तरीके से प्रस्ताव को स्वीकार न करने पर कुछ प्रस्तावों में उसके - स्वीकार करने के तरीकों की व्याख्या की जाती है और यदि प्रस्ताव दिये गए तरीके से न स्वीकार किया जय तो उसे खंडित माना जाता है।
viii. कानून में बदलाव से कभी-कभी कानून में बदलाव के कारण प्रस्ताव खंडित हो जाता है क्योंकि उसमें दिये गए शर्तों को पूरा करना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में प्रस्ताव स्वतः खंडित हो जाता है।
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