वर्णात्मक अनुसंधान डिजाइन - descriptive research design

वर्णात्मक अनुसंधान डिजाइन - descriptive research design


वर्णात्मक अनुसंधान डिजाइन - यह अनुसंधान रचना का वह प्रकार है जो समस्या की विशेषताओं का वर्णन करने से संबंधित होता है। - एमोर्य के अनुसार वर्णानात्मक अध्ययन के उद्देश्य में समस्या के कौन, क्या, कब, कहां और कैसे का निर्धारण होता है। इस प्रकार विपणन समस्या के संबंध में वास्तविक तथ्यों के आधार पर वर्णनात्मक विवरण प्रस्तुत करना ऐसी अनुसंधान प्ररचना का मुख्य उद्देश्य होता है। इसके लिए समस्या या विषय के संबंध में यथार्थ एवं पूर्ण सूचनाएं प्राप्त होना आवश्यक होता है विपणन अनुसंधान में प्रायः अधिकांश अध्ययन इसी प्रकार के होते है।


उदाहरण के लिए, ए सी या कपड़े धोने वाली मशीन के बाजार को परिभाषित करना है तो इसमें निम्न सूचनाएं एकत्रित किये जायेंगे-


(i) उत्पाद को क्रय करने वाले उपभोक्ता शहरी होंगे या ग्रामीण


(ii) शिक्षित होगे या अशिक्षित


(iii) किस प्रात या राज्य के होंगे


(iv) धनी वर्ग के होंगे या निम्न आय वर्ग के


(v) युवा क्रय करेंगे या वृद्ध व्यक्ति आदि


इस प्रकार किसी विपणन समस्या का वर्णनात्मक विवरण प्रस्तुत करना है, तो उससे संबंधित वास्तविक तथ्यों को किसी एक या अधिक वैज्ञानिक प्रविधियों के द्वारा एकत्र करना आवश्यक होगा।


चर्चिल का मत है कि विपणन अनुसंधान का एक भाग व्याख्यात्मक अनुसंधान के रूप में ही होता है।


एमोर्य के अनुसार, इस प्रकार की अनुसंधान प्ररचना में तथ्यों का संकलन किसी भी वैज्ञानिक प्रविधि के द्वारा हो सकता है। जैसे-


(i) साधारण प्रविधि द्वारा।


(ii) अवलोकन पद्धति।


(iii) समस्या अध्ययन।


(iv) सामुदायिक रिकार्ड ।


(v) गहन साक्षात्कार के साथ साख्यिकीय अध्ययन।


किसी भी वर्णनात्मक अनुसंधान कार्य में मुख्यतः निम्न दो विधियों का प्रयोग किया जाता है-


(अ) समस्या या घटना अध्ययन पद्धति घटना अध्ययन एक ऐसी पद्धति है जिसमे विषयों के बारे में जानने के स्थान पर एक ही विषय या समस्या के बारे में अधिक गहनता के साथ जानने का प्रयास किया जाता है। वास्तव में यह होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, अनुसंधानकर्ता पोलिस्टर वस्त्र की गिरती मांग के संबंध में अध्ययन हेतु कुछ चुने हुए उपभोक्ताओं फुटकर व्यापारियों, बाजारों या क्षेत्रों आदि का विस्तृत अध्ययन कर सकता है विपणन अनुसंधान में इस विधि का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है विशेषतः उपभोक्ताओं की आंतरिक मन स्थिति एवं क्रय प्रेरणाओं को जानने हेतु बडी व्यवसायिक संस्थाएं घटना पद्धति का ही प्रयोग करती है।


(ब) साख्यिकीय पद्धति यह घटना अध्ययन पद्धति के ठीक विपरीत विधि है जिसमें अनेक घटनाओं या समस्याओं का अध्ययन बड़े पैमाने पर किया जाता है।

चूँकि इसमें अनेक घटनाओं का अध्ययन किया जाता है. अतः तथ्यों के विश्लेषण हेतु विभिन्न सांख्यिकीय पद्धतियों को प्रयोग में लाया जाता है। जैसे औसत या माध्य प्रतिशत झुकाव का माप आदि । अनेक विपणन समस्याएं इस प्रकृति की है जिनका विस्तृत विश्लेषण केवल साख्यिकीय विधियों के द्वारा ही किया जा सकता है जैसे ए. सी. का विक्रय, ग्राहक, क्षेत्र, बाजार, आदि के अनुसार ज्ञात करना हो, तो साख्यिकीय विधियों के प्रयोग द्वारा आसानी से विश्लेषण किया जा सकता है।


पी.वी. यंग के अनुसार वर्णनात्मक अनुसंधान में निम्न चरण सम्मिलित होते है


(i) अध्ययन के उद्देश्यों का निरुपण


(ii) समक सकलन की पद्धतियों की प्ररचना


(iii) सैम्पल का चयन


(iv) समकों का सकलन एवं जांच


(v) परिणामों का विश्लेषण:


(vi) रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण


यद्यपि वर्णनात्मक अनुसंधान में अनेक प्रविधियों का प्रयोग किया जाता है, परन्तु इसका आशय यह नहीं है कि अन्वेषणात्मक अनुसंधान की भांति यह लोचपूर्ण होती है वास्तव में ऐसे अध्ययन में अधिक निर्दिष्टता होती है, क्योंकि इसके द्वारा किसी समस्या के बारे में समय पर व सही विवरण प्राप्त करने के प्रयास किये जाते हैं। अत: वर्णनात्मक अध्ययन में प्रयोग की जाने वाली प्रक्रिया का सावधानीपूर्वक नियोजन आवश्यक है।