विदेशी बाजारों के लिए उत्पाद डिजाइन करना - Designing products for overseas markets

विदेशी बाजारों के लिए उत्पाद डिजाइन करना - Designing products for overseas markets


विदेशी बाजारों में सफलतापूर्वक प्रवेश पाने कि लिए व्यावसायिक इकाई को विभिन्न विदेशी बाजारों की भिन्न-भिन्न आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद के डिजाइन में संशोधन करने पड़ते है यदि एक ब्रांड एक बाज़ार में सफल रहा है, तो यह आवश्यक नहीं कि यह ब्राड अन्य देशों के बाजारों में भी सफलतापूर्वक बिकेगा। यदि ब्रांड में कुछ समायोजन या परिवर्तन कर दिए जाए, तो यही बाड विदेशी बाजार में अधिक प्रभावी ढंग से बिक सकता है। प्रत्येक बाजार में भौतिक दशाए. कार्यक्रम व व्यावहारिक आवश्यकताएं भिन्न होती है जैसे- प्रायः चीनी व जापानी लोग अमेरिका व अफ्रीका के लोगों की तुलना में छोटे कद के होते हैं, वे चीनी व जापानी लोगों के माप के नहीं होंगे। इसी तरह विभिन्न देशों में ऑटोमोबाइल की दशा में ड्राइविंग नियम अलग-अलग होते हैं। कुछ देशों में ड्राइवर की सीट बांयी तरफ होती है जबकि कुछ देशों में यह दायीं तरफ होती है कुछ देशों में फलों के जूस को नाश्ते के रूप में प्रयोग किया जाता है

जबकि कुछ देशों में इसे केवल स्वाद के लिए स्नैक्स के रूप में प्रयोग किया जाता हैं गरीब देशों में साइकिल को परिवहन में रूप में प्रयोग किया जाता है, जबकि विकसित देशों में इसे खेल व स्वास्थ्य उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है।


उपरोक्त विभिन्नताओं को ध्यान में रखकर ही विदेशी बाजारों के लिए बाड़ डिजाइन किए जाने चाहिए यदि बाढ विकासशील देशों के लिए बनाया जाना है, तो व्यावसायिक इकाई को कम कीमत वाले उत्पाद तैयार करने चाहिए। महगे उत्पाद उच्च स्तरीय टेक्नोलॉजी वाले उत्पाद विकसित देशों में.. जहां आर्थिक विकास का स्तर बहुत अधिक है तथा लोगों का जीवन सार बहुत ऊंचा है में ही सफल हो सकते हैं। यदि उत्पाद विकासशील तथा विकसित दोनों देशों के लिए बनाए जाने है तो दोनों प्रकार के देशों के लिए अलग-अलग प्रकार के उत्पाद डिजाइन किए जाने चाहिए। उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग मापन आदि वहाँ की वैधानिक अनिवार्यताओं के अनुरूप होनी चाहिए,

जैसे- कुछ देशों में केवल बॉयोडिग्रेडेबल तथा पुनः चकीय सामग्री को ही पैकिंग में प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा उत्पाद की पैकिंग जहाजरानी आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए अर्थात उत्पाद की पैकिंग ऐसी हो, जिसे समुद्री जहाज द्वारा भेजने में सहायता मिले। वैश्विक इकाई को अन्य देशों के पेटेंट ट्रेड मार्क, ब्रांडिंग आदि से संबंधित प्रावधानों की पूरी जानकारी होनी चाहिए अन्यथा मेजबान देश की स्थानीय व्यावसायिक इकाइया वैश्विक कंपनी के उत्पाद की नकल कर लेंगी तथा वैश्विक कंपनी उनके विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही भी नहीं कर पाएगी। उत्पाद के रंग का चयन भी मेजबान देश के सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण के अध्ययन के बाद किया जाना चाहिए क्योंकि विभिन्न संस्कृतियों में विभिन्न रंगो का भिन्न-भिन्न महत्व होता है तथा इनका अर्थ भी अलग-अलग प्रकार से निकाला जाता है जैसे सफेद रंग पश्चिमी देशों में तो खुशी का प्रतीक है जबकि पूर्वी देशों में यह शोक का प्रतीक है। विदेशी बाजार में प्रवेश लेने से उस देश के लोगों के विदेशी उत्पादों के प्रति दृष्टिकोण को भी समझ लेना चाहिए जैसे कुछ देशों के लोगों में स्वदेशी की भावना अत्यधिक होती है तथा ये विदेशी उत्पादों का सामान्य रूप से बहिष्कार करते है या किसी विशेष विदेशी उत्पाद का बहिष्कार करते है। वैश्विक इकाई को ऐसे विदेशी बाजार में प्रवेश करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।