लागत व्यवहार के निर्धारक तत्व - Determinants of Cost Behaviour
लागत व्यवहार के निर्धारक तत्व - Determinants of Cost Behaviour
किसी उत्पादक संस्था में लागतों की प्रवृत्ति कैसी है या कैसी होगी, यह अनेक तत्वों पर निर्भर करता है, जिन्हें लागत व्यवहार के निर्धारक तत्व कहा जाता है जिनका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है
(1) उत्पादन तकनीक - संस्था उत्पादन कार्य में किस उत्पादन तकनीक का प्रयोग कर रही हैं, यह तथ्य लागतों के निर्धारण में महत्वपूर्ण हैं। साधारणतया अत्याधुनिक उत्पादन तकनीक का प्रयोग करने से प्रारम्भ में स्थायी साधनों की लागत बहुत ऊँची होती है, परन्तु अधिक उत्पादन होने पर प्रति इकाई बहुत कम लागत आती है।
(2) उत्पादन की दर - यदि संस्था मशीनों का अधिक प्रयोग कर रही हैं तथा उत्पादन की दर भी अधिक है तो प्रति इकाई लागत कम आयेगी। इसके विपरीत यदि कम दर पर उत्पादन हो रहा है तो प्रति इकाई लागत अधिक होगी।
इसके विपरीत संस्था श्रमिकों के माध्यम से उत्पादन करती है तथा मशीनों का कम प्रयोग करती है तो अधिक दर से उत्पादन करने पर प्रति इकाई उत्पादन लागत उस अनुपात में कम नहीं होगी जिस अनुपात में मशीनों का अधिक प्रयोग करने से कमी आती है।
(3) प्लान्ट की कितनी क्षमता का प्रयोग हो रहा है-यदि प्लान्ट की शत-प्रतिशत क्षमता का प्रयोग हो रहा है तो उत्पादन लागत प्रति इकाई कम होगी, यदि प्लान्ट की कम क्षमता का प्रयोग हो रहा है तो प्रति इकाई उत्पादन लागत अधिक होगी।
(4) प्लाण्ट की विशालता प्लाण्ट कितना विशाल है अर्थात् उसका आकार कितना बड़ा है इस तथ्य पर भी उत्पादन की लागत निर्भर करती हैं
प्लाण्ट का आकार बड़ा होने पर अनेक तरह की आन्तरिक तथा बाह्मा बचते प्राप्त होती हैं जिनके कारण प्रति इकाई उत्पादन लागत घट जाती हैं परन्तु यदि प्लाण्ट का आकार बहुत बड़ा हो और उसकी व्यवस्था ठीक तरह से नहीं हो रही हो तो लागतें प्रबन्धकीय अमितव्ययितओं के कारण बढ़ने लगती हैं।
(5) उत्पादन कार्य में आने वाली बाधाएँ यदि उत्पादन कार्य निरन्तर बगैर किसी बाधा के चल रहा है तो प्रति इकाई लागत कम होगी। इकाई विपरीत उत्पादन कार्य बिजली हड़ताल, तालाबन्दी, मशीन की खराबी आदि कारणों से रूक-रूक कर होता है तो प्रति इकाई लागत बढ़ जायेगी।
(6) उत्पादन के ढेर का आकार क्या है?-उत्पादन के ढेर का आकार आर्थिक होने पर प्रति इकाई लागत कम होगी। इसके विपरीत उत्पादन का आकार अनार्थिक हो अर्थात् बहुत बढ़ा या बहुत छोटा हो तो उत्पादन की प्रति इकाई लागत अधिक होगी।
(7) कुशल कर्मचारी एवं प्रबन्धक - यदि प्रबन्धकों एवं कर्मचारियों की कुशलता उच्च किस्म की है तो प्रति इकाई लागत कम होगी अन्यथा अधिक होगी।
(8) उत्पादन साधनों का मूल्य उत्पादन साधनों के मूल्य तथा वस्तु के मूल्य मे धनात्मक सम्बन्ध होता है अर्थात् उत्पादन के साधनों के मूल्यों में वृद्धि होने पर वस्तु का प्रति इकाई मूल्य भी बढ़ जाता है इसी तरह से उत्पादन साधनों के मूल्य में कमी आने पर उत्पादन का प्रति इकाई मूल्य घट जाता है।
(9) श्रमिकों में असन्तोश - यदि श्रमिकों में असन्तोश है, संस्था में तालाबन्दी, हड़ताल, धीमे काम करो आदि आन्दोलन चलते रहते हैं तो प्रति इकाई उत्पादन लागत अधिक होगी, अन्यथा कम होगी।
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