माँग पूर्वानुमान के निर्धारक घटक - Determining Components of Demand Forecasting
माँग पूर्वानुमान के निर्धारक घटक - Determining Components of Demand Forecasting
उपर्युक्त विवरण से स्पष्टहोता है कि माँग पूर्वानुमान में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण घटक निम्नलिखित है:
(1) अवधि - पूर्वानुमान लगाते समय सर्वप्रथम यह निर्धारित किया जाता है कि भविष्य में कितनी अवधि के लिए पूर्वानुमान लगाया जा रहा है। पूर्वानुमान अल्प समय और दीर्घ समय के लिए लगाये जाते हैं। अल्पकाल के लिए पूर्वानुमान तीन महीने, छः महीने अथवा एक साल के लगाये जा सकते है । परन्तु व्यवहार में एक वर्ष के पूर्वानुमान ही उचित माने जाते हैं। दीर्घकाल के लिए पूर्वानुमान 5, 10, या20 वर्शो या इससे भी अधिक समय के लगाए जाते हैं कौन सी अवधि का चुनाव करना है यह व्यवसाय व उद्योग की प्रकृति पर निर्भर करता है। जब माँग प्रत्येक माह में परिवर्तित होने की प्रवृत्ति रखती है तो अल्पकाल के लिए पूर्वानुमान लगाए जाने चाहिए। यदि व्यवसाय में लम्बी अवधि के व्यवहार होते हैं तो दीर्घकाल के लिए पूर्वानुमान लगाने चाहिए।
आधुनिक अर्थशास्त्री अल्पकालीन पूर्वानुमान एवं दीर्घकालीन पूर्वानुमानों को विभिन्न समय के आधार पर परिभाषित न करके प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्यों व निर्णयों के आधार पर परिभाषित करते हैं। इस धारणा के अनुसार अल्पकाल के लिए पूर्वानुमान कार्य कुशलता में वृद्धि के लिए आवश्यक सूचनाएँ प्रदान करता। इसके विपरीत दीर्घकालीन पूर्वानुमान योजनाएँ बनाने के सम्बन्ध में निर्णयों के लिए सूचनाएँ प्रदान करता है।
(2) माँग पूर्वानुमान के स्तर - माँग पूर्वानुमान विभिन्न स्तरों पर लगाया जाता है, जो निम्न हैं (अ) व्यापक स्तर- इस स्तर में व्यवसाय की समस्त आर्थिक क्रियाएँ सम्मिलित हैं, जिनको औद्योगिक उत्पादन, राष्ट्रिय आय तथा व्यय के उचित सूचकांकों के आधार पर मापा जा सकता है। (ब) औद्योगिक स्तर- इस स्तर में उसी प्रकार की समस्त औद्योगिक इकाइयाँ सम्मिलित हैं।
(स) फर्म स्तर - इस स्तर में उद्योग विशेष से सम्बन्धित फर्म विशेष के लिए पूर्वानुमान किये जाते हैं। किसी उद्योग की एक संस्था के लिए मांग पूर्वानुमान हेतू उपर्युक्त सभी स्तरों को ध्यान में रखा जाता है।
( 3 ) सामान्य या विशिष्ट उद्देश्य - माँग पूर्वानुमान करते समय यह मुख्य घटक है कि पूर्वानुमान सामान्य है या विशिष्ट उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। सामान्य उद्देश्य के लिए पूर्वानुमान एक विस्तृत पूर्वानुमान हैं जबकि विशिष्ट पूर्वानुमान उद्देश्य विशेष तक ही सीमित होता है।
(4) बाजार में माल की स्थिति-माल की स्थिति से तात्पर्य है कि उपभोक्ता वस्तु से पूर्व परिचित है कि नहीं।
यदि कोई वस्तु नव उत्पादित है तो ऐसी वस्तु का माँग पूर्वानुमान का तरीका उस वस्तु की माँग पूर्वानुमान से अलग होगा जो कि बाजार में पहले से ही प्रचलित है।
(5) माल का वर्गीकरण - माँग पूर्वानुमान लगाते समय उसकी शुद्धता के लिए वस्तुओं को उनकी प्रकृति के अनुसार यथा- उत्पादक वस्तुएँ, स्थायी उपभोग की वस्तु अथवा उपभोक्ता की वस्तुएँ में वर्गीकृत कर लेना चाहिए। फिर आर्थिक विश्लेषण कर पूर्वानुमान लगाना चाहिए।
माँग को प्रभावित करने वाले अन्य तत्व यथा बाजार में प्रतियोगिता की स्थिति, अनिश्चितता, सामाजिक शक्तियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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