करियर नियोजन और उत्तराधिकार नियोजन में अंतर - Difference between career planning and succession planning
करियर नियोजन और उत्तराधिकार नियोजन में अंतर - Difference between career planning and succession planning
करियर नियोजन वह व्यवस्था है, जो व्यक्ति के पूरे जीवन काल में साथ चलती है। और इसमें व्यक्ति का कार्यकलाप व्यवस्था की पूर्ण गतिविधि होती है। इसमें विषयात्मक तत्व भी शामिल होते हैं। यह कर्मचारियों को उनकी योग्यताओं व संगठन की आवश्यकताओं के अनुसार करियर नियोजन रूपरेखा तैयार करने में सहायता प्रदान करता है। यह प्रक्रिया बहुत लंबी प्रक्रिया है यह व्यक्ति की नियुक्ति से लेकर उसके सेवानिवृत्ति तक चलती है। यह प्रक्रिया संगठन और कर्मचारी के बीच तालमेल स्थापित करने में काम आती है। यह कोई निश्चित प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि मानव संसाधन विकास प्रक्रिया है।
उत्तराधिकार नियोजन में जैसे कौन कर्मचारी इस समय पद पर है, किसकी सेवानिवृत्ति हो गई है। कौन सेवानिवृत्ति, स्वैछिक सेवानिवृत्ति, बीमारी आदि के कारण पद ग्रहण करने योग्य नहीं है।
यह प्रक्रिया समय-समय पर होती है करियर नियोजन जैसे लंबी नहीं चलती है। उत्तराधिकार नियोजन का महत्वपूर्ण कार्य है उन लोगों की जानकारी प्राप्त करना, जिन्हें वर्तमान में कार्यरत महत्वपूर्ण व्यक्तियों के स्थान पर नियुक्ति किया जा सके । यह योजना संगठन की आंतरिक प्रतिभा को बढावा, रिक्त पदों को भरने का कार्य करती है। यही कर्मचारियों के आगे बढ़ने में प्रोत्साहित करती है, जिससे कंपनी में स्वस्थ वातावरण स्थापित होता है। यह कर्मचारियों को सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि करियर भी देती है जिससे मानव संसाधन कौशल में भर्तीपूर्ण कमियों का आंकड़ा तैयार कर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा सके।
करियर नियोजन और उत्तराधिकार नियोजन दोनो अलग-अलग शब्द है,
लेकिन उनके कुछ कार्य समानांतर है। उत्तराधिकार नियोजन रिक्त हुए महत्वपूर्ण पदों को भरने का कार्य करता है और करियर नियोजन उच्च कुशल योग्य कर्मचारियों की नियुक्ति सहित सभी स्तरों पर लागू होता है करियर नियोजन में उत्तराधिकार शामिल होता है। उत्तराधिकार की अपेक्षा करियर नियोजन का क्षेत्र व्यापक है। नियोजन कर्मचारियों को मार्गदर्शित करता है, ताकि वह भविष्य में उन्नति प्राप्त कर सके। किसी रिक्त पद पर योग्य व्यक्ति की भर्ती के लिए करियर नियोजन उत्तराधिकार नियोजन द्वारा बनाए चार्ट के द्वारा समर्थित होता है। यह दोनों एक दूसरे के पूरक और परस्पर है।
करियर विकास का प्रारूप
करियर विकास लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। यह आमतौर पर व्यक्ति के संगठनात्मक या अंतर संगठनात्मक करियर के प्रबंधन से संबंधित है। करियर विकास का अर्थ है एक कर्मचारी का संगठन में प्रारंभिक स्तर से संतुष्ट स्तर तक पहुँचने से है। इसमें वेतन एवं सुविधाएँ अधिक अधिकार, उत्तरदायित्व एवं कार्य संतुष्टि समाहित है। व्यवस्थित करियर की योजना कर्मचारी की करियर की दिशा एवं गति को तय करती है। अधिक प्रभावी एवं संतोषजनक करियर का निर्णय लिया जा सकता है।
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