स्थिति के अनुसार अयोग्यताएँ - Disqualifications by position
स्थिति के अनुसार अयोग्यताएँ - Disqualifications by position
वे व्यक्ति जो भारतीय राजनियम जिसके अधीन वे हैं द्वारा अयोग्य घोषित किये गए हैं, अनिबंध नहीं कर सकते हैं।
निम्नलिखित व्यक्तियों को अनुबंध करने के लिए अयोग्य माना गया है:
i. विदेशी सम्राट, राजदूत अथवा प्रतिनिधि विदेशी सम्राट, राजदूत अथवा प्रतिनिधि पर भारतीय राजनियम लागू नहीं होता है तथा उनके खिलाफ भारतीय न्यायालयों में वाद प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है। अतः वे भारतीय अनुबंध अधिनियम के अनुसार अनुबंध करने के लिए अयोग्य घोषित किये गए हैं। यदि वे चाहें तो अपने किसी भारतीय प्रतिनिधि के माध्यम से अनुबंध कर सकते हैं तथा अनुबंध के निष्पादन के लिए वह भारत में रहने वाला प्रतिनिधि व्यक्तिगत तौर पर उत्तरदायी होगा।
ii. उच्च पेशे वाले व्यक्ति – उच्च पेशे वाले व्यक्ति जैसे कि डॉक्टर और बैरिस्टर को अनुबंध करने के लिए योग्य माना गया है।
iii. विदेशी शत्रु- अगर किसी देश का भारत के साथ युद्ध चल रहा हो या युद्ध की घोषणा कर दी गई हो तो उस देश का नागरिक विदेशी शत्रु कहलाता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी भारतीय नागरिक के साथ अनुबंध नहीं कर सकता है।
iv. कैदी या अपराधी - ऐसा व्यक्ति जो भारतीय न्यायालय द्वारा अपराधी घोषित किया गया है अथवा वह अपनी सजा की वजह से कैद में है वह अनुबंध करने की क्षमता नहीं रखता है।
वह तब तक अनुबंध नहीं कर सकता है जब तक न्यायालय द्वारा उसका दंड चालू है। सजा की समाप्ति के उपरांत अथवा इसके पूर्व क्षमा प्रदायी किये जाने पर वह अनुबंध करने के योग्य हो जाता है।
V. विवाहित स्त्रियाँ - विवाहित स्त्रियाँ केवल व्यक्तिगत संपत्ति के लिएय ही अलग से अनुबंध कर सकती हैं। साथ ही यदि विवाहित स्त्री का पति अनिवार्यताओं की व्यवस्था नहीं करता है तो वह अपने जीवन की आवश्यक वस्तुओं के लिए अपने पति की साख गिरवी रख सकती है।
VI. सम्मेलित संस्थाएँ अथवा निगम अथवा कंपनियाँ सम्मेलित संस्थाएँ अथवा निगम अथवा कंपनियाँ कृत्रिम व्यक्ति होने हैं संस्थाएँ अथवा निगम अथवा कंपनियाँ इनका निर्माण अथवा समापन राजनियमों द्वारा होता है। ये निम्नलिखित तरीके से अनुबंध कर सकते हैं:
• एजेंट द्वारा
• पार्षद- सीमानियम के अनुसार
vii. दिवालिया - यदि किसी व्यक्ति अथवा संस्था को भारतीय न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित कर दिया गया हो तो वह अनुबंध नहीं कर सकता है।
vill. भारत के राष्ट्रपति – भारतीय संविधान के अनुसार भारत के राष्ट्रपति सर्वोपरि स्थिति में होते हैं तथा उन पर किसी भी न्यायालय में वाद प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार भारत के राष्ट्रपति अनुबंध नहीं कर सकते हैं ।
वार्तालाप में शामिल हों